close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: विधानसभा के पहले सत्र में ही कड़क अंदाज में नजर आया विपक्ष

बेनीवाल ने पूर्व अध्यक्ष कैलाश मेघवाल की भाषा और काम के तरीके पर सवाल उठाया तो विपक्ष की तरफ से भी तत्काल एतराज जता दिया गया

राजस्थान: विधानसभा के पहले सत्र में ही कड़क अंदाज में नजर आया विपक्ष
पूरे संवाद में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया भी कूद गए

जयपुर: विधानसभा में सत्र के दूसरे दिन स्पीकर का चुनाव हुआ तो उसके बाद बधाई और शुभकामनाओं के दौर में ही इस बात के संकेत मिल गए कि इस बार विधानसभा सत्र का नज़ारा कैसा होगा. हालांकि गुरूवार को मामला ज्यादा नहीं बढ़ा लेकिन जिस तरह से पूर्व अध्यक्ष कैलाश मेघवाल की शैली और उनके बर्ताव को लेकर कुछ विधायकों के सवाल और उस पर विपक्ष का ऐतराज सदन में गूंजा. उससे इसका अनुमान लग गया कि सदन में इस बार कोई भी पक्ष ढील नहीं छोड़ने वाला.

प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत यानि विधानसभा में सभी पक्ष आपसी तालमेल से सदन चलाने की बात करते हैं. लेकिन इस बात के लिए कोशिश कितने लोग करते हैं यह बड़ा सवाल है. सवाल इसलिए उठा क्योंकि पन्द्रहवीं विधानसभा में अध्यक्ष चुने जाने के बाद सीपी जोशी को बधाई और शुभकामना के दौर में पूर्व अध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाये गए और यहीं से सदन में टीका-टिप्पणी का दौर शुरू हो गया. नव निर्वाचित अध्यक्ष को बधाई देने के दौरान सबसे पहले खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल ने पूर्व अध्यक्ष पर भेदभाव के आरोप लगाए. बेनीवाल ने आवास आवंटन में भेदभाव के साथ ही पूर्व अध्यक्ष की भाषा शैली को लेकर भी सवाल उठाये.

बेनीवाल ने पूर्व अध्यक्ष कैलाश मेघवाल की भाषा और काम के तरीके पर सवाल उठाया तो विपक्ष की तरफ से भी तत्काल एतराज जता दिया गया. प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सरकार बदलने के बाद पूर्व अध्यक्ष पर टिप्पणी और आरोप लगाना आसन का अपमान है. राठौड़ ने कहा कि यह परंपरा राजस्थान की विधानसभा में नहीं होनी चाहिए.

हालांकि इस दौरान राजेंद्र राठौड़ की तरफ से कांग्रेस में मनमुटाव को लेकर की गई टिप्पणियों पर सत्ताधारी पार्टी के विधायकों ने भी ऐतराज जताया. परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि अगर पूर्व में आसन की तरफ से कुछ गलतियां हुई है और उन्हें दोहराया नहीं जाना चाहिए. इसको लेकर सभी सहमत हैं ऐसे में सदस्यों के वक्तव्य को गलत नहीं मानना चाहिए.

पूरे संवाद में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया भी कूद गए. कटारिया ने कहा कि आसन सभी का है और वह निष्पक्ष भी है. कटारिया ने कहा कि पूर्व अध्यक्षों पर किसी तरह के आरोप-प्रत्यारोप नहीं लगाए जाने चाहिए. कटारिया ने कहा कि नये अध्यक्ष को बधाई देने के मुबारक मौके पर इस तरह की टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए. कटारिया ने यह भी कहा कि इस काम के लिए बाद में मौके या चर्चा हो तो कहा जा सकता है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष की सदाशयता को उसकी कमजोरी न समझा जाए.

इस पूरी चर्चा में सदन के नेता और मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत ने भी कटारिया की बात पकड़ ली. गहलोत ने कटारिया की बात का पूरा समर्थन किया तो साथ ही यह भी कहा कि ऐसी बातें करने के दूसरे मौके भी आएंगें. सदन में इस दौरान गहमागहमी और एक-दूसरे के सम्बोधन के बीच टोकाटाकी का माहौल बना रहा. सदन के इस माहौल को देखकर विधायकों के साथ ही प्रेस दीर्घा में भी इस बात की चर्चा रही कि इस बार सदन के माहौल का संकेत अध्यक्ष के पहले दिन कुर्सी पर बैठते ही मिल गया है.