राजस्थान: 25 सीटों में से 21 पर महिलाओं की दावेदारी किसे मौका देगी कांग्रेस!

राजनीतिक तौर पर महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण की वकालत करने वाली कांग्रेस के भीतर लोकसभा चुनाव में भी 33 फीसदी महिलाओं के टिकट वितरण की आवाज उठने लगी है. 

राजस्थान: 25 सीटों में से 21 पर महिलाओं की दावेदारी किसे मौका देगी कांग्रेस!

जयपुर: राजस्थान लोकसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरु हो चुका है. आज (शुक्रवार) दिल्ली में होने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में कांग्रेस की पहली सूची का रोड मैप तैयार हो जाएगा. राजस्थान की 25 लोकसभा सीटें बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन इस बार राजस्थान में 25 में से 21 सीटों पर महिला दावेदारों ने अपनी ताल ठोक रखी है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या राजनीतिक तौर पर महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की वकालत करने वाली पार्टी लोकसभा सीटों में प्रत्याशियों के चयन में भी इस वकालत को कायम रख पाएगी.

राजनीतिक तौर पर महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण की वकालत करने वाली कांग्रेस के भीतर लोकसभा चुनाव में भी 33 फीसदी महिलाओं के टिकट वितरण की आवाज उठने लगी है. हाल ही में कांग्रेस राजस्थान विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का संकल्प पारित हुआ है. उसके बाद से महिला दावेदारों की उम्मीदें परवान पर हैं. हालांकि एक सच ये भी है कि 2014 में कांग्रेस ने अब तक की सबसे ज्यादा 6 टिकट महिलाओं को दी थी, लेकिन, उनमें से कोई भी चुनाव नहीं जीत सकी थीं. ॉ

जिताऊ महिला चेहरों में अभाव के बाद भी इस बार राजस्थान में 25 लोकसभा सीटों में से 21 सीटों पर महिला दावेदारों ने दावेदारी ठोक रखी है. केवल अलवर, जालौर, सिरोही भरतपुर, धौलपुर-करौली की सीट ऐसी है जहां महिला दावेदार नहीं है. वर्तमान में बदली रणनीति के तहत अब कांग्रेस महिला चेहरों को प्राथमिकता देने का मन बना रही है.

अगर राजस्थान में लोकसभा चुनाव के इतिहास को देखें तो पहली महिला जिन्होंने जीत दर्ज की थी. वह कांग्रेस या भाजपा की प्रत्याशी नहीं थी बल्कि पहली महिला के तौर पर पूर्व राजमाता गायत्री देवी . कांग्रेस की ओर से पहली बार किसी महिला को टिकट साल 1962 में जयपुर की शारदा देवी को दिया गया था. 1980 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दो महिलाओं को कांग्रेस का टिकट दिया. इनमें से चित्तौड़गढ़ से निर्मला कुमारी ने जीत दर्ज की थी. इसी तरीके से भाजपा ने पहली बार महिला उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव का टिकट पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को दिया था. उसके बाद भाजपा में महिला राजनीति का नया दौर शुरू हुआ है. 

कांग्रेस में ममता शर्मा, गिरिजा व्यास, सुमित्रा सिंह, कमला बेनीवाल, लक्ष्मी कुमारी चूडावत जैसे बड़े नाम रहे हैं लेकिन फिर भी इतनी पुरानी पार्टी के लिहाज से ये संख्या बेहद कम रही है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान महिला प्रतिनिधियों को बढ़ावा देने की बात कह चुके हैं. विधानसभा चुनाव में इसका असर भी देखा गया था लेकिन सवाल ही लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इस पर कितना अमल कर पाती है क्या जितना मकसद रहेगा या पार्टी ऐसे महिला चेहरे भी सामने रखेंगे तो पार्टी को जीत दिला सके.