पंचायतीराज चुनाव 2020: हटकर होगी मतदान प्रक्रिया, अब प्रिंटेड मत पत्र पर लगाएंगे ठप्पा

 मतदान दल के कर्मचारियों को दो दिन में होने वाली प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए नई व्यवस्था के तहत काफी समय मिलेगा.

पंचायतीराज चुनाव 2020: हटकर होगी मतदान प्रक्रिया, अब प्रिंटेड मत पत्र पर लगाएंगे ठप्पा
मतदान दल के कर्मचारियों की रात काली नहीं होगी. मतपत्र छपवाए जाएंगे.

जयपुर: गांव की सरकार चुनने का समय आ चुका है. इस बार पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया गत पांच वर्ष पूर्व हुए चुनाव से जरा अलग होगी. इससे इस वर्ष गांव में चुनाव को लेकर रोमांच रहेगा. मतदान दल के कर्मचारियों की रात काली नहीं होगी. मतपत्र छपवाए जाएंगे.

मतदाताओं को छपे हुए मतपत्र देने का संभवतया यह पहला अवसर होगा. पहले मतदानकर्मियों को मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम हाथों से लिखने होते थे. मतदान दल के कर्मचारियों को दो दिन में होने वाली प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए नई व्यवस्था के तहत काफी समय मिलेगा.

जयपुर जिले में चार चरणों में होने वाले 21 पंचायत समितियों की 583 ग्राम पंचायतों में 2 हजार 589 मतदान केंद्रों पर 23 लाख 63 हजार 120 मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे. इस बार सरपंच और वार्ड पंच प्रत्याशियों को एक रात की जगह सात दिन का प्रचार-प्रसार करने का समय मिलेगा तो वहीं पोलिंग पार्टियों को मतदान संबंधी प्रकिया करने के लिए भी एक सप्ताह का पूरा समय मिलेगा. 

प्रथम चरण में जयपुर जिले में आमेर, मौजमाबाद और जालसू पंचायत समिति की 80 ग्राम पंचायतों में 252 मतदान केंद्रों पर वोटिंग होगी. आपको बताते हैं की पहले पूरा मतदान दल एक साथ ही मतदान के लिए रवाना होता था लेकिन इस बार प्रथम चरण के तय कार्यक्रम के अनुसार सात जनवरी को आरओ और सहायक आरओ की दो सदस्यीय टीम सम्बंधित ग्राम पंचायतों में जाएगी. आठ जनवरी को नामांकन पत्र स्वीकार करेगी. 

प्रत्याशियों से नामांकन-पत्र प्राप्त करने के बाद दूसरे दिन नौ जनवरी को नामांकन-पत्रों की जांच होगी. उसी दिन नाम वापसी का समय रहेगा. नाम वापसी के बाद उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह का आवंटन किया जाएगा. यह प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद आरओ और सहायक आरओ की दो सदस्यीय टीम वापस मुख्यालय लौट आएगी. इसके आधार पर सरपंच और वार्ड पंच के लिए मतपत्र को छपवाया जाएगा, जिसमें सरपंच का मतपत्र ईवीएम में लगेगा और वार्डपंच पर मुहर लगाई जाएगी.

कर्मचारी चैन से सोएंगे
इस बार सरपंच का चुनाव ईवीएम मशीन और पंचों का चुनाव बैलेट पेपर पर कराए जाने की घोषणा के तहत मतपत्रों को छपवाने की नौबत आ गई है. ईवीएम मशीन में छपे हुए मतपत्र रखे जाएंगे. पहले इन मतपत्रों में केवल चुनाव चिन्हित छपे हुए रहते थे. उम्मीदवारों के नाम हाथ से लिखे जाते थे. इससे मतदान दल के कर्मचारियों को ग्राम पंचायत के कुल मतदाताओं की संख्या के आधार पर मतपत्र लेकर उन पर उम्मीदवारों के नाम लिखने पड़ते थे. इस प्रक्रिया में कई बार रात की दो तीन बज जाती थी. कर्मचारी एक-एक मतपत्र पर हाथ से लिखते थे तो हैंडराइटिंग में फर्क रहता था. दो-तीन घंटे नींद निकालने के बाद सुबह फिर मतदान कक्ष को तैयार करना व दिनभर मतदान कराना होता था. इससे मतदान दल के सदस्य थकान और तनाव महसूस करते थे, लेकिन इस बार इससे राहत रहेगी तो कर्मचारी चैन से सोएंगे.

सरपंच पद के लिए ईवीएम से मतदान कराए जाने की व्यवस्था से इनके मतों की गिनती में भी 15-20 मिनट का ही समय लगेगा. पहले शाम पांच-छह बजे तक मतदान प्रक्रिया के बाद मतदान कर्मियों को मतपत्रों की गिनती करनी होती थी. एक-एक मतपत्र की छंटनी कर उनकी गिनती होने में काफी रात हो जाती थी. गिनती के बाद किसी तरह का आक्षेप आने तथा रि-काउंटिंग कराने की नौबत आ जाती थी तो रात की दो-तीन तक बज जाती थी. इस बार रि-काउंटिंग कराने की स्थिति भी होगी, तब भी कुछ मिनटों में ही हो जाएगी.