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राजस्थान: 5 दिन में 2 बार अलग अलग इलाकों में दिखे पैंथर, लोगों में दहशत का माहौल

पैंथर ने इस दौरान तीन जनो को घायल भी कर दिया. पैंथर की सूचना वन विभाग को दी गई. पैंथर को पकड़ने के लिए जयपुर टीम को सूचना दी गई.

राजस्थान: 5 दिन में 2 बार अलग अलग इलाकों में दिखे पैंथर, लोगों में दहशत का माहौल
प्रक्रति को संरक्षण के लिए हर जीव का संरक्षण अतिआवश्‍यक हैं.

अशोक शेखावत, सीकर: जिले में पिछले पांच दिनों में पैंथर के आने से दहशत फैल गई है. दो पैंथर शहरी इलाके में क्‍या घुसा लोगों में भगदड़ मच गई तो तीन जनों को पैंथर ने घायल भी कर दिया. जयपुर की रेस्‍क्‍यू टीम ने आकर पैंथर को पकड़ा तब जाकर लोगों की सांस में सांस आई. अब सवाल यह है कि आखिर जंगली जानवर शहरों का रूख क्‍यों करने लगे हैं.

जिले के अजीतगढ और कुंडलपुरा दो अलग अलग स्‍थानों पर पैं‍थर क्‍या आया लोग जान बचाकर भागते नजर आए. इन इलाकों में पैथर के आने से दहशत का माहौल बन गया है. अजीतगढ़ में पैथर ने चार घंटे आतंक मचाया और वह पेड़ पर जा बैठा. तो कुंडलपुर में पैंथर खेतों में जा छिपा. अजीतगढ़ में सीसीटीवी फुटेज में पैंथर सड़क पर सरेआम आतंक फैला रहा है. लोग कैसे जान बचाकर भाग रहे हैं. 

पैंथर ने इस दौरान तीन जनो को घायल भी कर दिया. पैंथर की सूचना वन विभाग को दी गई. पैंथर को पकड़ने के लिए जयपुर टीम को सूचना दी गई. जिसके बाद जयपुर की टीम पहुंची और पैंथर को ट्रेक्‍यूलाइज कर चार घंटे बाद पकड़ा तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली. तो कुंडलपुर में छह घंटे तक पैंथर ने टीम को छकाया, आखिरकार रेस्‍क्‍यू टीम ने पैंथर को पकड़ा. जानकारी के अनुसार सीकर जिले की अरावली की वादियों वाले इलाके बालेश्‍वर नीम का थाना गणेश्‍वर लोहार्गल हर्ष सहित कई पहाड़ी इलाके हैं. इनमें पांच पैंथर भी हैं. पैथर के आने से जहां ग्रामीण इलाकों में दहशत फैल जाती है तो वन विभाग सीकर के पास ऐसे कोई इंतजामात नहीं है कि पैथर को ट्रेक्‍यूलाइज कर पकड़ा जा सके. 

पैंथर के शहरी और आबादी वाले इलाको में आने की सालभर में कई घटनाएं होती रहती हैं. कई लोगों को जख्‍मी भी जंगली जानवरों और पैंथरों द्वरा किया जाता रहा है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिकर पैंथर और जंगली जानवर शहरी इलाकों की ओर क्‍यों आ रहे हैं. पर्यावरण प्रेमी महावीर प्रसाद पुरोहित बताते हैं कि घने जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है. पानी के स्रोतों की पहाड़ी इलाको में कमी हो रही है. ऐसे में ये जंगली जानवर आबादी वाले इलाके की ओर पलायान कर जाते हैं और कई दफा लोगों का शिकार भी कर लेते हैं. पुरोहित बताते हैं कि सरकार को इनके संरक्षण के लिए पुख्‍ता इंतजामात करने चाहिए.

प्रक्रति को संरक्षण के लिए हर जीव का संरक्षण अतिआवश्‍यक हैं. ऐसे में जगली जानवरो की पनाह गाह जंगलो की अंधाधुंध कटाई पर सरकार को अंकुश लगाना होगा ताकि जगली जानवर अपने इलाकों से बाहर नहीं आए ओर लोगों को इन जंगली जानवर का शिकार होने से बचाया जा सके और इन जंगली जानवरो का भी संरक्षण हो सके.