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राजस्थान: खदानों में रोज हो रहे ब्लास्ट से लोगों में भय, प्रशासन भी नहीं ले रहा एक्शन

लगातार हो रहे ब्लास्ट से आसपास निवास कर रहे लोगों के मकानों में दरारें आ चुकी हैं जिससे अब मकानों के धराशाई होने का खतरा बना हुआ है. जो बड़े हादसे को खुला आमंत्रण है. 

राजस्थान: खदानों में रोज हो रहे ब्लास्ट से लोगों में भय, प्रशासन भी नहीं ले रहा एक्शन
प्रतीकात्मक तस्वीर

लोहावट: जोधपुर के लोहावट पंचायत समिति के गांव बरसिंगों का बास के कई परिवार दिन रात डर के साए में जिंदगी जीने को मजबूर हैं. इन परिवारों को भय सता रहा है कि कब न जाने इनका आशियाना ताश के पत्तों की तरह धराशाई होकर बिखर जाएगा और वो बेघर हो जाएंगे. दरअसल, बरसिंगों का बास गांव के ठिक पास पत्थर कटिंग की खदान में हो रहे ब्लास्ट यहां निवास कर रहे परिवारों के लिए जी का जंजाल बनी हुई है. 

खदान में ब्लास्ट होने पर यहां के मकानों में कंपकंपी होने लगती है जिससे डर कर इनमें निवास कर रहे लोगों को बाहर दौड़कर खुले में आना पड़ता है. खदान में पत्थर कटिंग को लेकर ब्लास्ट करने की कोई तय समय सीमा नहीं है. दिन हो या रात कभी भी खदान ठेकेदार ब्लास्ट कर देता है. लगातार हो रहे ब्लास्ट से आसपास निवास कर रहे लोगों के मकानों में दरारें आ चुकी हैं जिससे अब मकानों के धराशाई होने का खतरा बना हुआ है. जो बड़े हादसे को खुला आमंत्रण है. 

गांव बरसिंगों का बास के ग्रामीण मोहन ने बताया कि ये खदान अवैध लीज पर है लेकिन प्रशासनिक मिलीभगत हमारे आशियाने उजाड़ने का काम कर रही है. मोहन ने मीडिया को बताया कि गांव से खदान की दुरी नियमानुसार नहीं है और न ही लीज की वैधानिकता है लेकिन खनन माफिया सक्रिय होने से प्रशासन भी चुप्पी साधे हैं. ग्रामीण मोहन की मानें तो वो खनन विभाग के चक्कर लगा लगाकर थक गए लेकिन बालेसर खनन अधिकारी इन परिवारों की एक नहीं सुन रहे उल्टा ये कह कर टाल देते हैं कि जोधपुर जाओ जब जोधपुर जाते हैं तो वहां बैठे अधिकारी ये कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि उदयपुर खनन कार्यालय जाओ. 

यहां वहां की दौड़ धूप से परेशान बरसिंगों का बास ग्रामीणों ने थक हार कर आखिर यहां से पलायन का मन बना लिया है. जिसके चलते कई ग्रामीणों ने अपने मकानों को कौड़ियों के दाम बेचने को लेकर घरों पर लिखित बोर्ड तक लगा दिए हैं. मामले को लेकर जब उपखंड अधिकारी ओसियां के रतनलाल रैगर से बात की तो उन्होंने तुरंत मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के निर्देश देकर पीड़ित परिवारों की समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है. हम आपको बता दें कि बरसिंगों का बास गांव के ग्रामीणों के साथ हो रहा अन्याय खनन माफियाओं की खुल्लम खुल्ला दादागिरी का ही नतीजा है. जिस पर प्रदेश सरकार और प्रशासन नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहा है.