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राजस्थान: बच्चा चोर समझ कर साधु को लोगों ने बेरहमी से पीटा, मूक बन देखता रहा पुलिस ऑफिसर

डिप्टी दिनेश राजोरा से जब हमने पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि साधू महाराज ने कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है. 

राजस्थान: बच्चा चोर समझ कर साधु को लोगों ने बेरहमी से पीटा, मूक बन देखता रहा पुलिस ऑफिसर
प्रतीकात्मक तस्वीर

टोंक/ पुरुषोत्तम जोशी: राजस्थान के टोंक में मॉब लिचिंग की एक घटना सामने आई है. जानकारी के मुताबिक लोगों ने एक साधू को बच्चा चोर समझकर पीट दिया. लोगों ने काफी देर तक साधु को पीटा और उसकी एक न सुनी. वहीं घटना के पास मौजूद अलीगढ़ पुलिस थाने का ऑफिसर भी तमाशबीन बनकर घटना को देखता रहा. जिसके बाद काफी देर तक जब अलीगढ़ पुलिस मौके पर नहीं पहुंची तो गुस्साई भीड़ ही साधू को बच्चा चोर समझ कर पकड़ को थाने ले गई. 

पुलिस ने भी भीड़ के गुस्से के आगे साधू को काफी देर तो धमकाया, फिर जब पूछताछ में साधू संत निकला तो पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई. उनियारा डिप्टी दिनेश राजोरा, उपखंड अधिकारी संतोष मीना, तहसीलदार संदीप चोधरी पुलिस थाने पहुंचे और लहूलुहान साधू को अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां उसका उपचार करवाया गया. जब डिप्टी दिनेश राजोरा ने साधू से हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात पूछी तो साधू ने तो एक संत होने के नाते किसी पर भी कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया और यह कह दिया कि सब पर ईश्वर ही अपने आप कार्रवाई करेगा.

डिप्टी दिनेश राजोरा से जब हमने पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि साधू महाराज ने कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है. साधू महाराज ने यह कह दिया कि दोषियों को सजा देना वाला राम ही, ईश्वर ही है क्योंकि शायद पुलिस के कानून नें अब वो दम रहा नहीं क्योंकि जब भीड़ उसकी जान की प्यासी हो उस पर टूट रही थी तो खाकी का ही एक जवान तो मूक दर्शक बना वहीं तमाशबीन खड़ा था. डिप्टी के इस बयान से याद आते हैं टोंक पुलिस के पूराने कारनामें जहां पुलिस ने अपराधियों को बचाने के लिए कई काले कागज सफेद कर दिए और कई निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सफेद कागजों को लाल स्याही से रंग दिया.

सवाल यह उठता है कि जब पुलिस अधीकारी भी ऐसा ही जवाब दे जिससे अपराधियों के हौंसले बढ़ जाएं तो फिर अपराधियों में भय कैसे हो सकता है फिर तो आमजन में ही भीड़ का भी खौफ होगा और खाकी का भी. ऐसे में फिर मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को कोई रोक नहीं पाएगा फिर चाहे सरकार बड़े बड़े दावे करे. कानून बनाए, सख्ती दिखाए, लेकिन जिन हाथों के जिम्मे कानून की पालना है. वो ऐसा गैर जिम्मेदारना जवाब दें तो फिर उम्मीद किसी से रह नहीं जाती है.