राजस्थान: पीएम मोदी के सपने को तोड़ रहे कलेक्टर्स, आवास प्लस ऐप में दिखी लापरवाही!

3 सितंबर तक राजस्थान में 14,62,821 परिवारों की जानकारी को इस ऐप से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अक्टूबर शुरू होने पर भी 7,07,548 परिवार यानि 49 फीसदी परिवारों को इस ऐप से नहीं जोड़ा गया. 

राजस्थान: पीएम मोदी के सपने को तोड़ रहे कलेक्टर्स, आवास प्लस ऐप में दिखी लापरवाही!
फाइल फोटो

आशीष चौहान/जयपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सपना देखा था कि हर परिवार को पक्की छत नसीब हो सके लेकिन राजस्थान में प्रधानमंत्री के सपनों को चकनाचूर करने में जिला कलेक्टर्स कोई कसर नहीं छोड रहे. ग्रामीण आवास योजना में शिथिलता और काम में तेजी लाने के लिए आवास प्लस ऐप की शुरूआत की गई थी. जिसके जरिए प्रत्येक लाभार्थी की पूरी जानकारी इस ऐप से जुड़नी थी. 

प्रधानमंत्री की इस पहल को राजस्थान ने पूरी तरह से नकार दिया है क्योंकि राजस्थान में लाभार्थियों का डेटा आवास साफ्ट से जोड़ने का काम इतना धीरे चल रहा है कि केंद्र सरकार को 8 बार पत्र लिखकर लापरवाही पर फटकार लगानी पड़ी लेकिन इसके बाद भी राजस्थान के एक जिले को छोड़कर सभी 32 कलेक्टर्स टस से मस नहीं हुए. 32 जिलों के कलेक्टर्स ने इस ऐप पर ना ही समय रहते ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थियों की सूची अपडेट की और ना ही केंद्र सरकार के आदेशों की पालना की. 

3 सितंबर तक राजस्थान में 14,62,821 परिवारों की जानकारी को इस ऐप से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अक्टूबर शुरू होने पर भी 7,07,548 परिवार यानि 49 फीसदी परिवारों को इस ऐप से नहीं जोड़ा गया. इस पूरे मामले पर पंचायतीराज विभाग ने सभी कलेक्टर्स को पत्र लिखकर खेद जताया है. लापरवाह जिलों में सबसे बड़ी लापरवाही करौली में देखी गई. करौली में अब तक 20,558 चिन्हित पात्र परिवारों में से मात्र 8 परिवारों को डाटा अपलोड किया गया है.

करौली के अलावा भरतपुर में 95 फीसदी, सिरोही में 94 फीसदी, पाली में 93 फीसदी और जयपुर में 90, जोधपुर में 87, बूंदी में 81 फीसदी आवासों को इस ऐप से जोड़ा ही नहीं गया है. इसके अलावा झुन्झुनू, कोटा, भीलवाडा, जालौर, हनुमानगढ, बाड़मेर, धौलपुर और चुरू जिले की हालत भी कुछ ऐसी ही देखी जा रही है. हालांकि, इससे पहले प्रदेश के ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड ने कई बार आवास योजना को लेकर निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक केंद्र सरकार की इस योजना में लापरवाही देखी गई. 

पंचायतीराज प्रमुख सचिव राजेश्वर सिंह ने बांसवाडा जिला कलेक्टर को छोड़ बाकी सभी 32 कलक्टर को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि वंचित पात्र परिवारों की जिला अपीलेट कमेटी द्धारा सत्यापित सूची के अनुसार बकाया चिन्हित वंचित पात्र परिवारों की जानकारी ऑनलाइन देने के निर्देश दिए है. 

राजस्थान के कलेक्टर्स की इस लापरवाही से सवाल ये खड़े हो चले हैं कि अब केंद्र सरकार की इतनी बड़ी योजना को कलक्टर्स हल्के में ले रहे हैं और डिजिटल काम नहीं हो रहा तो डिजिटल इंडिया का सपना राजस्थान में कैसे साकार हो पाएगा और कैसे लाभार्थियों को अपना हक मिलेगा.