एक बार फिर चर्चा में है 27 साल पुराना यह 'कांड', Jodhpur में हुआ था BJP का 'कब्जा'

इन 27 सालों में केस से जुड़े कितने ही लोग मर चुके हैं. जवानी और युवा अवस्था के दौरान लगे केस में अब जाकर बुढ़ापे में चार्जशीट (Chargesheet) पेश की जा रही है. 

एक बार फिर चर्चा में है 27 साल पुराना यह 'कांड', Jodhpur में हुआ था BJP का 'कब्जा'
पुलिस पेश आरोप पत्र में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है.

भवानी भाटी, जोधपुर: कानून का एक मूल मंत्र है-"Justice delayed is justice denied".. .मतलब न्याय में देरी का मतलब न्याय का नहीं मिलना है. हिंदुस्तान में कई केस (CASE) ऐसे होंगे, जो सालों से चल रहे हैं लेकिन जोधपुर (Jodhpur) का एक केस ऐसा है, जिसका फैसला 27 बाद भी अभी तक नहीं हो पाया है क्योंकि इस केस में पुलिस की जांच अब तक पूरी ही नहीं हो पाई है. 

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इन 27 सालों में केस से जुड़े कितने ही लोग मर चुके हैं. जवानी और युवा अवस्था के दौरान लगे केस में अब जाकर बुढ़ापे में चार्जशीट (Chargesheet) पेश की जा रही है. जोधपुर (Jodhpur) के इतिहास का ये ऐसा केस है, जिसमें पुलिस ने सबसे लंबी जांच का रिकॉर्ड बना दिया है. प्रदर्शन से जुड़ा एक ऐसा केस, जिसने जोधपुर की पूरी राजनीतिक तस्वीर बदलकर रख दी थी.

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जानिए केस से जुड़ा पूरा मामला
जोधपुर (Jodhpur) में करीब 27 साल पहले जिला कलेक्टर परिसर में एक प्रदर्शन हुआ था. इस मामले में 27 साल बाद पुलिस ने अधूरी जांच के साथ कोर्ट में चार्जशीट पेश की है. जोधपुर पुलिस (Jodhpur Police) ने शायद किसी मामले में सबसे लंबी जांच करने का रिकॉर्ड बनाया है. इस प्रदर्शन के आरोपी 70 साल से ज्यादा उम्र के हो चुके हैं और तो कई आरोपी तो दुनिया को अलविदा कह चुके हैं. 

दरसअल, 29 सितंबर 1993 को हजारों लोगों की भीड़ ने जोधपुर जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जमकर उत्पात मचाया था. जिला कलेक्टर कार्यालय में तोड़फोड़ भी थी. प्रदर्शनकारियों ने एडीएम की गाड़ी को उल्टा कर तोड़फोड़ की. यहां तक कि एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी को चूड़ियां तक पहना दी. 30 सितंबर 1993 को उदय मंदिर थाने में एक मुकदमा भी दर्ज हुआ था, जिसकी जांच 27 वर्षों से चली आ रही है, जो अभी भी खत्म नहीं हुई है. मामले में कुछ आरोपियों को पुलिस न तो गिरफ्तार कर पाई और न ही उनके बयान ले पाई थी.

प्रदर्शन, जिसने बदल दी थी जोधपुर की राजनीतिक तस्वीर
जोधपुर (Jodhpur) में साल 1993 में पहली बार जालोरी गेट चौराहे पर गणेश महोत्सव समिति ने गणेश प्रतिमा स्थापित की. कार्यक्रम के बाद प्रतिमा विसर्जन के मार्ग को लेकर विवाद हुआ था. विवाद के बाद पुलिस ने खुद ही मूर्ति को कब्जे में लेकर विसर्जन कर दिया. जोधपुर के मुथा जी मंदिर में चल रहे प्रवचन के दौरान स्वामी रामसुखदास महाराज (Ramsukhdas Maharaj) ने लोगों को कहा कि इस मामले को लेकर वे स्वयं ज्ञापन देने जिला कलेक्टर पहुंचेंगे. इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया, हजारों लोगों की भीड़ संत के पीछे-पीछे जिला कलेक्टर पहुंच गई.

लोग अपनी मांगों को लेकर आए थे, लेकिन प्रशासन उनकी मांग मानने को तैयार नहीं था. इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने देखते ही देखते मारपीट और कार्यालय में तोड़फोड़ कर दी. प्रदर्शन के बाद गुस्साए संत समाज ने हजारों लोगों की भीड़ में इस बात की कसम दिला दी कि ऐसी सरकार को वोट नहीं देना है, जिसके बाद साल 1993 के दिसंबर माह में हुए विधानसभा चुनाव में जोधपुर के तीनों विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमा लिया. चुनाव में शहर विधानसभा से सूर्यकांता व्यास चुनी गई. सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से राजेंद्र गहलोत चुने गए तो सूरसागर विधानसभा क्षेत्र से मोहन मेघवाल विधायक के रूप में चुने गए थे.

केस में कौन-कौन है आरोपी
पुलिस पेश आरोप पत्र में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रसन्ना चंद्र मेहता, राजसीको के पूर्व चेयरमैन मेघराज लोहिया, वीरेंद्र अवस्थी, राज बहादुर मिश्रा, प्रेमराज सोनी, गोविंद मेहता, ओम भूतड़ा, घनश्याम मुथा, जितेंद्र लोढ़ा, सुनील मूंदड़ा, सुरेंद्र सिंह, नरपत सिंह, देवी सिंह, पूनम चंद, कैप्टन रतन देवड़ा, सदानी, नैनी, रमेश सिंह, राकेश कश्यप, बाल किशन, सुरेश जैन, मुरलीधर बोहरा, महेश चंद्र शामिल हैं जबकि इसमें से 6 लोगों की मौत हो चुकी हैं.

Edited by- SUJIT KUMAR NIRANJAN