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राजस्थान: बीसलपुर बांध में वाष्पीकरण को रोकने वाला प्रोजेक्ट रिजेक्ट

 विभाग के इस प्रोजेक्ट को रद्द करने पर बीसलपुर बांध से मिलने वाले चार जिले, 21 शहर और 2800 गावों को बड़ा झटका लगा है

राजस्थान: बीसलपुर बांध में वाष्पीकरण को रोकने वाला प्रोजेक्ट रिजेक्ट
इस प्रोजेक्ट में विशेष कैमिकल का छिड़काव कर एक परत बनाए जाने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था

आशीष चौहान/जयपुर: बीसलपुर बांध में वाष्पीकरण से उडने वाले पानी को रोकने के लिए जलदाय विभाग एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था, लेकिन अब विभाग ने कई तरह की तकनीकी खामियों के कारण इस प्रोजेक्ट को रिजेक्ट कर दिया गया है. इस प्रोजेक्ट में दावा किया गया था कि बांध से भाप बनकर उड़ने वाले पानी 25 से 35 फीसदी तक बचाया जा सकता था. लेकिन विभाग ने अब इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है, जिसके बाद में बीसलपुर बांध से मिलने वाले चार जिले, 21 शहर और 2800 गावों को बड़ा झटका लगा है. इस प्रोजेक्ट के आने के बाद उम्मीदे यही लगाई जा रही थी कि जलदाय विभाग काफी हद तक पानी का संचय करने में कामयाब रहेगा, लेकिन कई तरह की तकनीकी खामियों के कारण दोनों ही प्रोजेक्ट को रद्द करना पडा.

इस प्रोजेक्ट में विशेष कैमिकल का छिड़काव कर एक परत बनाए जाने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था, ताकि सूरज की तेज किरणों की ऊर्जा से पानी भाप बन कर न उड़ सके. इसके लिए पुणे की एक कंपनी ने जलदाय विभाग को प्रजेंटेशन भी दिया था. इस पर तीन से पांच करोड़ का खर्चा होने की संभावना थी. 

प्रोजेक्ट में रही कई खामियां
कंपनी ये पूरी तरह से आकंलन नहीं कर पाई कि कितना फीसदी पानी इस प्रोजेक्ट के जरिए बच पाएगा. विभाग के इंजीनियर्स ने गहराई से पूरे प्रोजेक्ट का अध्ययन किया, जिसमें यह पाया गया कि यह प्रोजेक्ट केवल छोटे बांध के लिए उपयुक्त है, जिसकी गहराई ज्यादा होती है. बडे बांध में वाष्पीकरण के उडने की संभावनाएं ज्यादा रहती है. ऐसी स्थिति में ये प्रोजेक्ट बीसलपुर बांध के लिए फिट नहीं बैठता. चीफ इंजीनियर आईडी खान का कहना है कि बडे बांध में पानी का वाष्पीकरण अधिक होता है, इसलिए इस प्रोजेक्ट को रद्द करना पड़ा. 

एमपीडीटी-मल्टीपाइंट डिसपेंसिंग तकनीक
यह तकनीक बांधों में भरे पानी के ज्यादा वाष्पीकरण पर अपनाई जाती है. विभाग के इंजीनियर बांध के जलस्तर पर हल्के वजन की गेंद छोड़ कर एक जाल बनाने के विकल्प का प्रस्ताव प्राइवेट कपंनी ने दिया था. इसके लिए दुनिया भर के बांधों में हुए काम की स्टडी करवाई गई.

स्टडी में ये पता लगा कि बांध में ये तकनीक भी कारगर साबित नहीं होती है. चीफ इंजीनियर आईडी खान का कहना है कि तेज आंधी आने के कारण ये गेंद भी एक जगह एकत्रित हो जाती है. जिस कारण पूरे बांध में वाष्पीकरण की प्रकिया आसान काम नहीं होगा, तेज हवा के कारण बांध मे रखी गेंद पूरे तरह से डिस्टब होगी. जिससे ये प्रोजेक्ट बीसलपुर बांध में लागू नहीं होगा. अब जलदाय विभाग पानी की व्यवस्था के लिए ट्यूबवेल्स को ही प्राथमिकता दे रहा है. शहर दर शहर ट्यूबवेल खोदकर पानी की व्यवस्था में जुटा हुआ है.