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राजस्थान: सातवें वेतन को लेकर RCDH और डेयरी कर्मचारी आमने सामने, CM गहलोत को लिखा पत्र

डेयरी एमडी, पूर्व आरसीडीएफ वित्तीय सलाहकार और कई अधिकारियों को चार्जशीट एवं कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं. जबकि डेयरी को-ऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम के तहत स्वायत्तशासी संस्था है. 

राजस्थान: सातवें वेतन को लेकर RCDH और डेयरी कर्मचारी आमने सामने, CM गहलोत को लिखा पत्र
फाइल फोटो

दामोदर प्रसाद, जयपुर: छह महीने पहले डेयरी कर्मचारियों को दिया गया सातवें वेतन को लेकर आरसीडीएफ और डेयरी कर्मचारी आमने-सामने हो गए हैं. डेयरी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सातवें वेतन दिए जाने पर आरसीडीएफ एमडी डा. वीना प्रधान और वित्तीय सलाहकार राधेश्याम मीणा पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा है. 

पत्र में लिखा गया है कि पांचवें और छठे वेतनमान राज्य सरकार कर्मचारियों के अनुरूप यथावत डेयरी संचालक मंडल की स्वीकृति के बाद दिया गया था. इस संबंध में पहले रहे आरसीडीएफ एमडी और सरकार के किसी प्रतिनिधि ने पत्राचार नहीं किया लेकिन सातवें वेतन लगाने को लेकर आरसीडीएफ अधिकारी डेयरी कर्मचारियों को पत्र लिख कर बार-बार प्रताड़ित कर रहे हैं. 

डेयरी एमडी, पूर्व आरसीडीएफ वित्तीय सलाहकार और कई अधिकारियों को चार्जशीट एवं कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं. जबकि डेयरी को-ऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम के तहत स्वायत्तशासी संस्था है. जिसमें कार्यरत कर्मचारी- अधिकारी के वेतन-भत्ते समस्त अधिकार संघ के संचालक मंडल में निहित है. इस वजह से आरसीडीएफ से स्वीकृति लेने का कोई अधिकार नहीं है. 

उधर एसोसिएशन के मुख्य संयोजक नरेंद्र पारीक का कहना है कि आरसीडीएफ के कुछ अधिकारी जानबूझ कर राज्य सरकार को बदनाम करने उद्देश्य से इस बात को हवा दे रहे हैं ताकि डेयरी में अशांति पैदा हो सके. आरसीडीएफ एमडी डॉ. वीना प्रधान ने बताया कि सातवें वेतन डेयरी को वित्त विभाग की स्वीकृत के बाद ही लगाना चाहिए था. डेयरी ने बिना स्वीकृति के वेतन बढ़ा दिया जो गैर कानूनी है. डेयरी चेयरमैन ओम प्रकाश पूनिया ने बताया कि आरसीडीएफ इस मामले का अवाश्यक पत्राचार कर रहा है. डेयरी स्वायत्तशासी संस्था, जो बीते 15 साल से लाभ की स्थिति में है. इसी को देखते हुए संचालक मंडल दारा कर्मचारियों को सातवां वेतन दिया गया था. वेतन-भत्ता का निर्धारण करना संचालक मंडल के क्षेत्राधिकार में है.