खुलासा: राजस्थान में 47 लाख न देने के कारण नहीं शुरू हुआ साइबर क्राइम प्रिवेंशन का काम

केंद्रीय गृहमंत्रालय ने देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम रोकथाम के लिए वर्ष 2017 में योजना शुरू की थी. इसके लिए राजस्थान सहित सभी राज्यों को फंड जारी करने की स्वीकृति दी थी.

खुलासा: राजस्थान में 47 लाख न देने के कारण नहीं शुरू हुआ साइबर क्राइम प्रिवेंशन का काम
47 लाख रुपए नहीं देने के कारण नहीं शुरू हो पाया काम. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जयपुर/ विष्णु शर्मा: राजस्थान में 47 लाख के चक्कर में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम प्रिवेंशन का काम शुरू नहीं हो पाया. केंद्र सरकार ने साइबर क्राइम रोकथाम के लिए राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला को 4 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी. करीब एक साल बाद गृहमंत्रालय ने इसकी कार्य प्रगति रिपोर्ट मांगी तो पता चला कि एक भी पैसा खर्च ही नहीं हुआ. महज साइबर सलाहकार और कैपिसिटी बिल्डिंग के लिए 47 लाख रुपए नहीं देने के कारण बजट खर्च नहीं हुआ. 

जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्रालय ने देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम रोकथाम के लिए वर्ष 2017 में योजना शुरू की थी. इसके लिए राजस्थान सहित सभी राज्यों को फंड जारी करने की स्वीकृति दी थी. योजना के तहत पुलिस अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को पुलिस अकादमी और अन्य संस्थानों के जरिए प्रशिक्षण दिया जाना था. इसके लिए साइबर फोरेंसिक कम ट्रेनिंग लेबोरेटरी की स्थापना, कैपिसिटी बिल्डिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम और जूनियार साइबर फोरेंसिक कंसल्टेंट की भर्ती की जानी थी. 

रिपोर्ट मांगी तो खुली पोल
गृहमंत्रालय ने योजना के तहत राजस्थान को लेबोरेटरी के लिए 3.94 करोड़ रुपए, कैपिसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम के लिए 35 लाख तथा साइबर कंसल्टेंट के लिए 12 लाख रुपए की स्वीकृति दी थी. इसमें पिछले साल 3.94 करोड़ रुपए का बजट दे दिया, लेकिन दोनों अन्य बजट नहीं दिए. इधर एक साल बाद गृहमंत्रालय ने जारी किए गए बजट की कार्यप्रगति रिपोर्ट मांगी, तब पता चला कि बजट जस का तस ही रखा हुआ है. गृह विभाग ने एफएसएल से रिपोर्ट मांगी तो जवाब आया कि कैपिसिटी बिल्डिंग और कंसल्टेंट का बजट नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया. 

एक साल से लिख रहे हैं पत्र
गृहमंत्रालय कार्य प्रगति रिपोर्ट मांगने के लिए 16 मई 2018 से गृह विभाग को पत्र लिख रहा है, लेकिन जवाब नहीं दिया जा रहा है. गृहमंत्रालय 7 जनवरी, 5 फरवरी और 8 मार्च को स्मरण पत्र जारी कर रिपोर्ट मांग चुका है, लेकिन आज तक रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है.