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राजस्थान: दोबारा जांचे जाएंगे मूक बधिर छात्रों के रिजल्ट, 98 में से 88 हुए थे फेल

विद्यार्थियों की योग्यता और मानसिकता के आधार पर प्रश्न पत्र बनाए जाते थे. जिसकी वजह से इस कॉलेज का परिणाम हर साल 80 फीसदी से ज्यादा रहता था लेकिन इस साल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस कॉलेज के प्रश्न पत्र बाहरी सामान्य शिक्षकों से बनवाए

राजस्थान: दोबारा जांचे जाएंगे मूक बधिर छात्रों के रिजल्ट, 98 में से 88 हुए थे फेल
फाइल फोटो

जयपुर: राजस्थान के एक मात्र राजकीय मूक बधिर कॉलेज में द्वितीय वर्ष में पढ़ने वाले 88 विद्यार्थी इस समय अपने परिणाम को लेकर यूनिवर्सिटी के चक्कर काटते हुए नजर आ रहे हैं, क्योंकि इस कॉलेज में द्वितीय वर्ष में पढ़ने वाले 91 विद्यार्थियों से 88 विद्यार्थी फेल हो गए हैं.  ये सभी विद्यार्थी सिर्फ सामाजिक विज्ञान और पेंटिंग विषय में फेल हुए हैं. जिसकी सबसे बड़ी वजह इस साल पेपर कॉलेज के शिक्षकों से ना बनवाकर बाहर के सामान्य शिक्षकों से बनवाना रही.

करीब 5 साल पहले इस कॉलेज की शुरूआत की गई थी. साथ ही कॉलेज में सामान्य शिक्षकों के साथ ही ट्रांसलेटर भी पर्याप्त संख्या में कार्यरत हैं और हर साल इस कॉलेज के प्रश्न पत्रों को बनाने का जिम्मा कॉलेज के शिक्षकों के पास होता था. विद्यार्थियों की योग्यता और मानसिकता के आधार पर प्रश्न पत्र बनाए जाते थे. जिसकी वजह से इस कॉलेज का परिणाम हर साल 80 फीसदी से ज्यादा रहता था लेकिन इस साल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस कॉलेज के प्रश्न पत्र बाहरी सामान्य शिक्षकों से बनवाए. साथ ही जांच भी बाहरी सामान्य शिक्षकों से करवाई जिसकी वजह से इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने की शिकायत सामने आई है.

वहीं दूसरी ओर कॉलेज प्रशासन अभी इन विद्यार्थियों की मार्कशीट का इंतजार कर रहा है. कॉलेज शिक्षिका पुष्पा पारीक ने बताया कि इस साल यूनिवर्सिटी ने कॉलेज के प्रश्न पत्र बाहर से बनवाए जो काफी बड़े थे. इन बच्चों की योग्यता के अनुसार ये इतने बड़े प्रश्नों को हल नहीं कर पाए. जबकी इनके प्रश्न पत्रों को लेकर रियायत दी जाती है और बड़े प्रश्न नहीं दिए जाते हैं. साथ ही यूनिवर्सिटी प्रशासन से भी इस संबंध में बात की है. जिसके बाद परिणाम को फिर से जारी करने की मांग की गई है.

अपनी व्यथा को अपनी सांकेतिक भाषा में समझा रहे इन विद्यार्थियों की पीड़ा इनके चेहरों से साफ झलक रही थी. सांकेतिक भाषा में समझाकर कैलाश सिंह ने बताया कि जो पेपर बाहर से बनवाया वो काफी बड़ा था. इसके साथ ही पेपर को हल करने का जो समय था वो उस समय पर पूरा नहीं हो पाया. जिसकी वजह से 88 विद्यार्थी फेल हुए हैं.

बहरहाल, 88 विद्यार्थी इस समय कॉलेज और यूनिवर्सिटी के चक्कर काट रहे हैं. कॉलेज प्रशासन जहां पुनः कॉपी जांच करवाने की बात कह रहा है, तो वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन फिर से कॉपी जांच करवाने का आश्वासन दे रहा है.