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राजस्थान रोडवेज की बसों में महिलाओं की जगह पक्की, बदला गया सीटों का रंग

आरक्षित सीटों का कलर ही बदलकर एक बार फिर झुंझुनूं के महिला अधिकारिता विभाग ने महिलाओं को सशक्त बनाने का संदेश दिया है. 

राजस्थान रोडवेज की बसों में महिलाओं की जगह पक्की, बदला गया सीटों का रंग
पूरे प्रदेश में एक अनूठा और अलग उदाहरण है

झुंझुनूं: महिलाओं को 33 से लेकर 50 फीसदी आरक्षण देने की बात तो सभी करते है, लेकिन असल मायने में महिलाओं के आरक्षित अधिकार ही उन्हें नहीं मिल रहे है. लेकिन हमेशा की तरह एक बार फिर झुंझुनूं जिला इसमें एक मिसाल बनकर सामने आया है. बात छोटी है, लेकिन गंभीर होने के साथ-साथ पूरे देश और प्रदेश में संदेश देने वाली भी है. जी, हां बसों में महिलाओं, दिव्यांगों और पूर्व विधायकों के लिए अलग से सीटें आरक्षित होती है. लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता. झुंझुनूं में इस ओर ध्यान दिया गया तो हालात भी बदले और महिलाएं भी खुश हुई.

झुंझुनूं का रोडवेज बस स्टैंड देखने में अन्य स्टैंड की तरह सामान्य दिखता है, लेकिन इसमें खड़ी बसें, पूरे देश और प्रदेश में महिला आरक्षण का संदेश दे रही है. जी, हां राजस्थान रोडवेज की हर बस में नौ सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती है. लेकिन इस आरक्षण की जानकारी या तो किसी को है नहीं. होती है तो भी वो इतना गंभीर नहीं होता. महिलाएं भी उनकी आरक्षित सीटों पर पूर्व में बैठे गए पुरुषों से अपनी सीट नहीं मांग सकती. लेकिन झुंझुनूं में महिला अधिकारिता विभाग ने बेटी बचाओ बेटी पढाओ और महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाया और आरक्षित सीटों का कलर ही बदल दिया. ताकि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को लेकर जागरूकता आए और महिलाओं को उनका अधिकार मिले. इस पहल के बाद महिला यात्री खुश है.

झुंझुनूं आगार के डिपो मैनेजर वासुदेव शर्मा की मानें तो उनके आगार में कुल 92 बसें है. जिन्हें लेकर अक्सर देखा जाता था कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें भी पहले आओ पहले पाओ के तहत बुक हो जाती थी. जिसके चलते महिलाओं की सीटों पर पुरुष यात्री बैठ जाते थे और महिलाओं को अपनी यात्रा बस में खड़े खड़े करना पड़ती थी. कई बार कोई आरक्षित सीटों को लेकर टोकता तो झगड़े की संभावना बन जाती. लेकिन जब महिला अधिकारिता विभाग ने इस ओर ध्यान दिया तो अब हालात बदल गए है. पिंक कलर की सीट को देखकर पहले तो कोई दूसरा पुरुष यात्री बैठता नहीं और यदि बैठ भी जाता है तो पास खड़ी महिला यात्री को देखकर खुद ही खड़ा हो जाता है. यह पूरे प्रदेश में एक अनूठा और अलग उदाहरण है, जो सकारात्मक दिशा की ओर एक बड़ा कदम भी है.

बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में झुंझुनूं ने कई मिसाल दी है. पूरे प्रदेश में ही नहीं, देश में नाम भी कमाया और तीन बार नेशनल अवार्ड भी प्राप्त किया है. लेकिन अब बसों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का कलर ही बदलकर एक बार फिर झुंझुनूं के महिला अधिकारिता विभाग ने महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाने के लिए बड़ा कदम बढ़ाने के साथ-साथ संदेश दिया है. महिला अधिकारिता विभाग के उप निदेशक विप्लव न्यौला ने बताया कि अब वे चाहते है कि पूरे प्रदेश की राजस्थान रोडवेज ही नहीं, बल्कि लोक परिवहन बस सेवा और निजी बस सेवाओं में भी इस अनिवार्य लागू करने के साथ-साथ सीटों का कलर अलग रखा जाए. ताकि खुद ब खुद महिलाओं को अपनी सीटों का पता चले और आमजन भी महिलाओं को उनकी आरक्षित सीटें दें. इसके लिए सरकार को पत्र लिखने का काम भी हो रहा है.

महिलाओं को नौकरियों में आरक्षण, संसद में आरक्षण व अन्य मामलों में आरक्षण की बात तो चुनावी मुद्दा भी बनती है और नेता भाषण में भी देते है. लेकिन जो आरक्षण पहले से महिलाओं को जो अधिकार मिले है, असल में तो वो ही उन्हें दिलाने में हम फेल है. बात चाहे फिर पंचायतराज चुनावों में हो या फिर बसों की सीटों की. बस की सीट मिलना, चाहे छोटी बात हो, लेकिन महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें अधिकारों के प्रति जागरूक करने में एक ऐसा संदेश है, जो पूरे देश में दिया जा सकता है.