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राजस्थान: सरकारी स्कूलों के मिड डे मील में घोटाला आया सामने, जांच में जुटा रसद विभाग

जिला रसद अधिकारी रामसिंह मीना ने बताया कि जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए पहुंचने वाले पोषाहार में रसद विभाग को अनियमितत्ता मिली है.

राजस्थान: सरकारी स्कूलों के मिड डे मील में घोटाला आया सामने, जांच में जुटा रसद विभाग

पुरूषोत्तम जोशी, टोंक: जिले में करीब 430 सरकारी स्कूलों में सरकार की ओर से मिड डे मील सप्लाई की जा रही है लेकिन इस सप्लाई में पिछले तीन महीनों में ठेका फर्म टोंक परिवहन समिति द्वारा गडबड़झाला कर मासूम बच्चों के निवाले पर डाका डाला जा रहा है. विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा सरकारी स्कूलों के औचक निरीक्षण में सामने आई शिकायत के बाद रसद विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई जांच पड़ताल में घोटाले और हेरफेर का मामला सामने आया है.

जिला रसद अधिकारी रामसिंह मीना ने बताया कि जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए पहुंचने वाले पोषाहार में रसद विभाग को अनियमितत्ता मिली है. इसके लिए रसद विभाग ने पर्वतन निरीक्षक धर्मचंद जैन, निरीक्षक रामअवतार और मुनेश मीना ने टोंक क्रय विक्रय सहकारी समिति के दस्तावेजों की जांच पड़ताल की जिसमें ये सामने आया है. इसमें सामने आया कि टोंक परिवहन समिति की ओर से जिले के सरकारी स्कूलों में नियमित रूप से पोषाहार का आवंटन अप्रैल से जून तक तीन में नहीं किया गया.

सहकारी समिति की ओर से परिवहन समिति को दिए गए 74 क्विंटल गेहूं तथा 18 क्विंटल चावल का हिसाब भी नहीं मिला और अधिकारी-कर्मचारी इसका हिसाब नहीं दे पाए. परिवहन समिति को स्कूल के लिए चावल, गेहूं, 7 अगस्त को दिए गए थे लेकिन 28 अगस्त तक उनका हिसाब नहीं मिला है. 

ऐसे में निरीक्षक ने परिवहन समिति के खिलाफ अनियमितता की कार्रवाई शुरू कर दी है. पिछले दिनों लाम्बा और लहन गांव की सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया गया तो वहां पिछले कई माह से पोषाहार सप्लाई नहीं होने की शिकायत मिली थी. जिसके चलते स्कूल प्रधानाध्यापक ग्रामीणों के सहयोग से उधार पोषाहार लेकर बच्चों को खिला रहे थे.

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सप्लाई फर्म ने बम्बोर सहित कई सरकारी स्कूलों में आवंटन नहीं होने के बाद भी पोषाहार की सप्लाई कर दी और इलाहीपुरा सहित कई गांवों की स्कूलों में आवंटन से ज्यादा मात्रा में पोषाहार सप्लाई करने की जानकारी भी सामने आई है. जांच पूरी होने के बाद के क्रय विक्रय सहकारी समिति के अधिकारी-कार्मिकों सहित सप्लाई फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जिसमें पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी.

मासूम बच्चों के पोषाहार पर डाका डालने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी प्रदेश के कई जिलों में करोड़ों के गड़बड़झाले सामने आ चुके हैं. अब सवाल यह उठता है कि बच्चों के निवाले पर डाका डालने वालों पर क्या कार्रवाई होती है.