घरवालों को फिल्म 'सांड की आंख' दिखाना चाहती हैं राजस्थान की स्कूली छात्राएं

पूरा मामला हाल ही में रिलीज बॉलीवुड फिल्म सांड की आंख से जुड़ा हुआ है. फिल्म की कहानी बताती है कि कैसे एक परिवार के मर्द घर की बेटियों और महिलाओं को आगे नहीं बढ़ने देते. घर के मर्दों को लगता है कि औरत सिर्फ घर के कामकाज के लिए ही हैं.

घरवालों को फिल्म 'सांड की आंख' दिखाना चाहती हैं राजस्थान की स्कूली छात्राएं
राजस्थान पुलिस की एक महिला टुकड़ी ने स्कूली छात्राओं को सेल्फ डिफेंस टिप्स भी दिए.

जयपुर: 'मुझे फिल्म बहुत अच्छी लगी. मगर बच्चों को दिखाने से अच्छा ये फिल्म हमारे घर वालों को दिखाते तो उनके दिल में आता. उनको लगना चाहिए कि हमारे बच्चे कुछ कर सकते हैं पर हमारे घर वाले ऐसा नहीं समझते' ये दर्द है दसवीं क्लास की एक छात्रा का जो राजस्थान सरकार से कह रही है  हमारे माता-पिता को फिल्म सांड की आंख दिखाएं ताकि उनकी सोच बदले.

दरअसल, ये पूरा मामला हाल ही में रिलीज बॉलीवुड फिल्म सांड की आंख से जुड़ा हुआ है. फिल्म की कहानी बताती है कि कैसे एक परिवार के मर्द घर की बेटियों और महिलाओं को आगे नहीं बढ़ने देते. घर के मर्दों को लगता है कि औरत सिर्फ घर के कामकाज के लिए ही हैं. 

देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्म जयंती के मौके पर आज राजधानी जयपुर में 2500 से ज्यादा स्कूली छात्र छात्राओं को राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की तरफ से बॉलीवुड की प्रेरणादायक फिल्म दिखाई गई. फिल्म देखने के बाद स्कूली छात्राओं को सिनेमा हॉल में ही फीडबैक फॉर्म भरने को दिए गए. सरकार को मिले इन्हीं फीडबैक फॉर्म में से सबसे ज्यादा भावुक पत्र दसवीं क्लास की एक छात्रा का था, जिसने लिखा कि वो चाहती है कि सरकार द्वारा इस फिल्म को उनके माता-पिता को भी दिखाएं ताकि उनकी सोच बदले.

फिल्म के लिए किया सरकार का धन्यवाद
इस आयोजन की शुरुआत मालवीय नगर स्थित इनोक्स सिनेमाघर के साथ हुई, जहां DIPR मिनिस्टर डॉ रघु शर्मा, DIPR कमिश्नर नीरज के पवन बच्चों के बीच पहुंचे और बच्चों के साथ फिल्म सांड की आंख देखी. राजस्थान सरकार के इस प्रयास से स्कूली छात्राएं काफी उत्साहित और खुश नजर आईं और उन्होंने राजस्थान सरकार को इसके लिए धन्यवाद भी दिया.

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इस मौके पर राजस्थान सरकार के DIPR मिनिस्टर डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि देश में महिला शक्ति की जब बात कही जाती है तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक प्रमुख नाम है, जो युवा पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करती है. इस मौके पर राजस्थान पुलिस की एक महिला टुकड़ी ने स्कूली छात्राओं को सेल्फ डिफेंस टिप्स भी दिए.

क्या है फिल्म सांड की आंख की कहानी
बागपत के जोहर गांव में स्थित ये कहानी है तोमर परिवार की बहू चंद्रो और प्रकाशी तोमर की, जो अपनी जिंदगी में घर का काम करने, खाना पकाने, अपने पति की सेवा करने, खेत जोतने और भट्टी में काम करने के अलावा ज्यादा कुछ खास कर नहीं पाईं. उनके पति दिन भर हुक्का फूंकते और बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. जिंदगी के 60 साल ऐसे ही जीवन निकाल देने एक बाद चंद्रो और प्रकाशी को अचानक से अपने शूटिंग टैलेंट का पता चलता है लेकिन शूटर बनने का सपना देखने लगी. इन दोनों दादियों के सामने एक-दो नहीं बल्कि हजारों चुनौतियां हैं. इनमें से सबसे बड़ी है शूटिंग की ट्रेनिंग लेना और उससे भी बड़ी है टूर्नामेंट में जाकर खेलना. जो औरतें कभी अपने घर से बिना किसी मर्द के बाहर न निकली हों, उन्होंने कैसे अपने इस सपने को न सिर्फ पूरा किया बल्कि बाकी देशभर की महिलाओं को भी कर दिखाने की प्रेरणा कैसे दी यही इस फिल्म में दिखाया गया है.