राजस्थान: राहुल गांधी की रैली में दिखा PCC की टीम से दूरी का असर

रैली को कामयाब बनाने का जिम्मा पूरी तरह से युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के कंधों पर था. इसके लिए बकायदा यूथ कांग्रेस को 25000 और एनएसयूआई को 20,000 कार्यकर्ताओं को लाने का लक्ष्य दिया गया था.

राजस्थान: राहुल गांधी की रैली में दिखा PCC की टीम से दूरी का असर
प्रदेश कांग्रेस कमेटी को पहले ही दिन से इस आयोजन से अलग रखा गया था.

जयपुर: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दूसरी पारी के आगाज के मकसद से जयपुर में आयोजित युवा आक्रोश रैली का हर रंग फीका नजर आया. अगर सही और साफ शब्दों में कहा जाए तो जयपुर में राहुल गांधी की रैली में ना तो उनके भाषण में दम दिखा और ना ही युवाओं की संख्या बल कांग्रेस को उत्साह देने वाला दिखाई दिया. 

रैली को कामयाब बनाने का जिम्मा पूरी तरह से युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के कंधों पर था. इसके लिए बकायदा यूथ कांग्रेस को 25000 और एनएसयूआई को 20,000 कार्यकर्ताओं को लाने का लक्ष्य दिया गया था. कांग्रेस के मंत्री विधायकों को भी युवाओं को लाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन जानकारों की मानें तो रैली में महज 15 से 20 हजार की ही मौजूदगी ही हो लाई. इसकी एक बड़ी वजह प्रदेश कांग्रेस कमेटी की टीम का इस आयोजन से दूर रहना था. 

दरअसल, प्रदेश कांग्रेस कमेटी को पहले ही दिन से इस आयोजन से अलग रखा गया था. राहुल गांधी का कार्यक्रम बनने के बाद से ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी को कहा गया था कि इस आयोजन की जिम्मेदारी युवाओं पर रहेगी. लिहाजा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की टीम इस रैली को लेकर उतनी सक्रिय ही नहीं हो पाई. रैली को लेकर दावा किया गया था कि राहुल गांधी इसमें युवाओं के आक्रोश को एक नई आवाज देंगे. देश की राजनीति को नई दिशा देंगे लेकिन राहुल गांधी का भाषण भी उनके पुराने भाषणों की ही कॉपी नजर आया. 

राहुल गांधी के भाषण में युवा शक्ति और रोजगार के अलावा चाइना के महाशक्ति बन जाने और हिंदुस्तान के पिछड़ जाने की कथा ही सुनाई गई. राहुल गांधी के भाषण में न तो एनआरसी का जिक्र था और ना ही सीएए को लेकर पुरजोर तरीके से आवाज उठाई गई भाषण में ना ही दिल्ली में चल रहे शाहीन बाग के संघर्ष को लेकर जिक्र किया गया. 

इतना ही नहीं राहुल गांधी के इस भाषण में देश की युवाओं की आवाज बन चुकी जेएनयू यूनिवर्सिटी और जामिया के घटनाक्रम को लेकर भी कोई चर्चा नहीं हुई. कहा गया था कि राहुल गांधी जयपुर में सत्ता और संगठन में तालमेल के मकसद से मंत्रियों के समूह के साथ संवाद करेंगे लेकिन जयपुर की ओटीएस में आधे घंटे के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने केवल लंच लिया और मंत्रियों के अभिवादन ही स्वीकार किए. 

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि राहुल गांधी की दूसरी पारी की लॉन्चिंग को भव्य बनाने की पूरी कोशिश की गई अल्बर्ट हॉल जैसी शानदार लोकेशन को चुना गया. कार्यक्रम में राहुल गांधी का स्टेज भव्य रहा. 50 फीट ऊंचे उनके कटआउट बनाए गए. राहुल गांधी से आने से पहले युवाओं को बांधे रखने के लिए डीजे गीत संगीत का भी आयोजन हुआ लेकिन इन सब तामझाम के बावजूद कार्यक्रम में आया प्रत्येक युवा निराशा ही महसूस करता नजर आया.

युवा जो मुद्दे जिस तरीके से राहुल गांधी से सुनना चाहते थे वह कार्यक्रम से मिसिंग रहा. वहीं, जो उम्मीद युवाओं की बड़ी संख्या की कार्यक्रम में की जा रही थी उसको लेकर भी पार्टी के नेताओं में मायूसी नजर आई. यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चांदना ने कहा था कि उनके कार्यकाल का यह आखिरी कार्यक्रम यादगार होगा लेकिन लगता नहीं है कि इस कार्यक्रम को यादगार कार्यक्रमों की श्रेणी में रखा जाएगा.