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राजस्थान: नौनिहालों की शिक्षा के लिए दे दी जीवन की पूरी जमापूंजी, फिर भी सपना अधूरा

गांव खेदड़ो की ढाणी के सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल रहे शिक्षा प्रेमी ने गांव में ही बेहतर शिक्षा के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी, लेकिन उनकी एक अंतिम इच्छा आज तक पूरी नहीं हुई. 

राजस्थान: नौनिहालों की शिक्षा के लिए दे दी जीवन की पूरी जमापूंजी, फिर भी सपना अधूरा
वह चाहते थे कि गांव के लोग यही पर ही पढ़कर डॉक्टर बन सके

संदीप केडिया/झुंझुनूं: प्रदेश के झुंझुनूं का एक शिक्षाप्रेमी रामचंद्र खेदड़ जिसने अपने गांव के सरकारी स्कूल के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी, लेकिन अभी तक उनकी अंतिम इच्छा पूरी नहीं हुई. अब रामचंद्र खेदड के परिजन उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए शिक्षा मंत्री का मुंह ताक रहे है. आखिर शिक्षाप्रेमी रामचंद्र खेदड़ की अंतिम इच्छा क्या है?

यह कहानी प्रदेश के एक भामाशाह और शिक्षा प्रेमी रामचंद्र खेदड़ की है जो अब इस दुनिया में नहीं रहे. गांव खेदड़ो की ढाणी के सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल रहे शिक्षा प्रेमी ने गांव में ही बेहतर शिक्षा के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी, लेकिन उनकी एक अंतिम इच्छा आज तक पूरी नहीं हुई. उनकी इच्छा थी कि गांव के सरकारी स्कूल साइंस फैकल्टी खुलवाए और उसमें सब्जेक्ट बायोलॉजी हो. लेकिन विभाग के तकनीकी कारण मानें या फिर सरकारी सिस्टम की उदासीनता, यह शिक्षा प्रेमी बायोलॉजी विषय की मांग करते करते स्वर्ग सिधार गया. अब परिजन गुहार लगा रहे है कि उनकी आत्मा को तभी शांति मिलेगी जब स्कूल में साइंस फैकल्टी बॉयोलोजी सब्जेक्ट के साथ शुरू हो.

शिक्षा प्रेमी रामचंद्र खेदड़ के बेटे और पोते-पोतियों ने बाहर से पढ़ाई कर डॉक्टर बने. वह चाहते थे कि गांव के लोग यही पर ही पढ़कर डॉक्टर बन सके इसलिए उन्होने गांव के स्कूल में साइंस फैकल्टी खुलवाने के लिए शिक्षा के विभाग के न सिर्फ चक्कर काटे बल्कि हर मुमकिन कोशिश की. बावजूद उनका ख्वाब पूरा नहीं हो सका.

शिक्षा प्रेमी भामाशाह रामचंद्र खेदड़ ने यह स्कूल भवन अपने पिता शिवनारायण खेदड़ के नाम से करवाया और इसमें परिवार का पैसा भी लिया. परिवार और गांव के लोगों की मानें तो 1985 में भवन बनने के बाद उन्होंने अपनी पाई पाई इस स्कूल को दी है.

यहां तक की रिटायरमेंट के बाद मिले पैसे भी स्कूल के निर्माण में ही लगा दिए. अभी भी कोई भी छोटा मोटा काम हो. वे खुद अपने पैसे से करवाते और जब भी समय मिलता एक मजदूर की भांति स्कूल में काम करते और समय भी देते थे.रामचंद्र खेदड़ समाज के लिए एक बड़ी मिसाल है. ऐसे में शिक्षा मंत्री गोविंग सिंह डोटासरा को जल्द से जल्द गांव खेदड़ो की ढाणी के सरकारी में साइंस फैकल्टी शुरू कर उनकी आखिरी इच्छा को पूरा करना चाहिए.