राजस्थान: औद्योगिक निवेश में इजाफे के लिए सरकार ने कसी कमर, दिए यह निर्देश...

राजस्थान का उद्योग महकमा नई नीतियों के साथ केंद्र और राज्य के प्रोजेक्टों को भी रफ्तार देने का काम कर रहा है. 

राजस्थान: औद्योगिक निवेश में इजाफे के लिए सरकार ने कसी कमर, दिए यह निर्देश...
राजस्थान में डीएमआईसी का 40 फीसदी भाग गुजर रहा है जो कि देश में सर्वाधिक है.

जयपुर: राजस्थान सरकार औद्योगिक निवेश में इजाफे के लिए पुराने प्रोजेक्टों की रफ्तार भी बढ़ा रहा हैं. इसके लिए प्रदेश से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की भी सुध ली जा रही है. इसके लिए अहम बैठक उद्योग भवन में आयोजित हुई. उद्योग मंत्री परसादीलाल मीणा ने अन्य राज्यों में हो रहे कामकाज का अध्ययन कर राजस्थान में इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए. साथ ही, इस पूरे प्रोजेक्ट की अपडेट कॉस्ट रिपोर्ट बनाकर मुख्यमंत्री से भी चर्चा करने की बात कही.

राजस्थान का उद्योग महकमा नई नीतियों के साथ केंद्र और राज्य के प्रोजेक्टों को भी रफ्तार देने का काम कर रहा है. इसके लिए डीएमआईसी को भी गति देने की तैयारी है. देश में सबसे सुस्त रफ्तार से डीएमआईसी प्लान राजस्थान में चल रहा है. उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा का कहना हैं कि गहलोत सरकार अब इसकी रफ्तार बढ़ाने की कवायद में है. इसके लिए राजस्थान से गुजर रहे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर कि सभी एजेंसियों को सक्रिय करने की तैयारी है. 

राजस्थान में डीएमआईसी का 40 फीसदी भाग गुजर रहा है जो कि देश में सर्वाधिक है. इसके बन जाने से औद्योगिक निवेश बढ़ने की भी संभावनाएं है.उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने डीएमआईसी की रफ्तार को कम करने का आरोप पहली सरकार पर लगाया. उन्होंने कहा कि हमने जो प्लान तैयार किया था उस पर पिछली भाजपा सरकार ने आते ही काम करना बंद कर दिया. अवाप्त की गई भूमि को भी दायर से बाहर कर दिया. 

बता दें कि, किसानों से वर्तमान में 532 हेक्टेयर भूमि अवाप्त की गई हैं, मुआवजे की कुल स्वीकृत राशि 128 करोड़ 64 लाख में से महज 22 करोड़ ही किसानों को वितरित किए गए हैं. 31 मार्च तक शेष राशि भी किसानों को आवंटित करने के निर्देश दिए हैं. उद्योग मंत्री ने स्पष्ट कहा कि अब इस प्रोजेक्ट में देरी नहीं होगी, सरकार पूरी तरह इसकी रफ्तार बढ़ाने के लिए गंभीर हैं.औद्योगिक विकास राजस्थान की जररुत हैं, जोधपुर, पाली मारवाड़ की सूरत इससे बदलनी तय है. गहलोत सरकार अगर इसे गंभीरता से लेती है तो इसका कामकाज तेजी से गति पकड़ेगा. वहीं, नए औद्योगिक निवेश की संभावनाओं को भी बल मिलेगा,