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राजस्थान: NHM के अधिकारी ने सरकार से अनुमति के बिना निकाली 2500 पदों पर वेकेंसी

इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने साफ़ कहा है कि ना तो उन्हें और ना ही ACS रोहित कुमार सिंह को इस भर्ती परीक्षा के बारे में कोई जानकारी थी. 

राजस्थान: NHM के अधिकारी ने सरकार से अनुमति के बिना निकाली 2500 पदों पर वेकेंसी
नियमानुसार एनएचएम को राज्य सरकार से भर्ती से पहले अनुमति लेनी चाहिए थी

जयपुर: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन NHM एक बार फिर चर्चाओं में है. इस बार किसी सकारात्मक पहल को लेकर नहीं बल्कि एक ऐसी महाभारत को लेकर जो गले की फांस बन चुका है. NHM मिशन निदेशक की. दरअसल एनएचएम में कम्युनिटी हैल्थ ऑफिसर के 2500 पदों के लिए भर्ती निकाल दी गई. 22 जून यानि आज इसकी परीक्षा भी होनी थी, लेकिन इससे पहले ही शुक्रवार को मामला सरकार की जानकारी में आ गया. इसके बाद इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया.

IEC की तरफ से इस परीक्षा को लेकर बकायदा 19 जून को प्रेस रिलीज भी जारी करवाई गई थी. इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने साफ़ कहा है कि ना तो उन्हें और ना ही ACS रोहित कुमार सिंह को इस भर्ती परीक्षा के बारे में कोई जानकारी थी. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की वो जांच करवा रहे है और मामले में दोषी पाए जाने वाले हर स्तर के व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. 

शुरुआती तौर पर इस मामले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस रोषित कुमार सिंह ने एनएचएम की पूरी HR सेल और वरिष्ठ सहायक अशोक भंडारी को सस्पेंड करने के आदेश भी जारी कर दिए है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि परीक्षा में कुल 30 हजार आवेदन आए और कई अभ्यर्थियों से नियुक्ति देने के लिए डेढ़-डेढ़ लाख रु. भी वसूले गए हालांकि इस बात के अभी कोई प्रमाण सामने नहीं आए है.

वहीं, बीजेपी ने इसे महाघोटाला करार दिया और सीबीआई से जांच की मांग की है. बीजेपी ने चेतावनी दी कि इस घोटाले पर वे सरकार को बख्सेगें नहीं, विधासनभा के आगामी सत्र में गहलोत सरकार को घेरेंगे कि आखिर चिकित्सा मंत्री की नाक के नीचे कैसे इतना बड़ा भर्ती घोटाला कैसे हुआ. साथ ही बीजेपी ने कहा कि मंत्री की इसकी जिम्मेदारी लें और इस्तीफा दें.

बता दें कि, नियमानुसार एनएचएम को राज्य सरकार से भर्ती से पहले अनुमति लेनी चाहिए थी, लेकिन इजाजत तो दूर सूचना तक नहीं दी गई. एनएचएम में कम्यूनिटी हेल्थ स्कीम में फंड का चालीस फीसदी पैसा राज्य सरकार औऱ 60 फीसदी केंद्र सरकार वहन करती है. लेकिन एनएचएम को राज्य सरकार की मंजूरी के बिना फैसले का हक नहीं है. वहीं जब एनएचएम के एमडी शर्मा इन आरोपों पर जबाब के लिए कैमरे पर आने को तैयार नहीं थे.

गौरतलब है कि एनएचएम के एमडी डॉ समित शर्मा ने ही गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में मुफ्त दवा योजना लांच की थी, ब्रांडेड की जगह जेनरिक दवा अस्पतालों में अनिवार्य की थी. इससे सीनियर आईएएएस समित शर्मा की तारीफ देश ही नहीं दुनियाभर में होने लेगी थी, लेकिन अब मामला गंभीर होता जा रहा है. महकमे के मुखिया स्वास्थ्य मंत्री ने साफ़ किया है कि इस पुरे मामले में अगर भ्रष्ट्राचार हुआ है तो किसी भी पद पर बैठे हुए व्यक्ति को बक्शा नहीं जाएगा.