राजस्थान: राजे के राज में महिलाओं से जुड़ी योजनाएं रहीं पीछे, अब नई सरकार उठाएगी जिम्मेदारी

मंत्री ममता भूपेश ने योजनाओं का पूरा ठीकरा वसुंधरा सरकार पर फोड़ा था. 

राजस्थान: राजे के राज में महिलाओं से जुड़ी योजनाएं रहीं पीछे, अब नई सरकार उठाएगी जिम्मेदारी

आशीष चौहान, जयपुर: राजनीतिक पार्टियां वोट बैंक पर निशाना साधने के लिए महिला सशक्तिकरण की बात करती है यहां तक कि सरकार बनने पर भी कई तरह की योजनाएं लाई जाती हैं. राजस्थान में वसुंधरा राजे शासन में भी महिलाओं की योजनाओं के लिए बजट तो खूब आवंटित हुआ लेकिन उस बजट का इस्तेमाल सरकार नहीं कर पाई. करोड़ों के बजट के बावजूद भी महिला अधिकारिता की कई बड़ी योजनाएं धरातल पर उतर ही नहीं पाई. 

राजस्थान में महिलाओं की मुख्य योजनाएं का हाल बेहाल है
जिस में सबसे बुरी हालत चिराली योजना की है. चार करोड़ से ज्यादा का फंड होने के बावजूद भी चिराली योजना में महज 28,000 खर्च हो पाए. इसके अलावा चार दूसरी बड़ी योजनाओं में भी बजट भरपूर आवंटित हुआ, लेकिन खर्च ना मात्र का ही हो पाया. चिराली योजना में 0.06 फीसदी, स्वयं सहायता समूह संस्थान योजना में 7.5 प्रतिशत, महिला सुरक्षा योजना में केवल 7 फीसदी, बेसिक केयर कोर्स में 0.78 प्रतिशत और विजयाराजे सिंधिया स्वयं सहायता समूह योजना में महज 15 फीसदी बजट खर्च हो पाया. कुल 5 योजनाओं की बात की जाए तो केवल 6 फीसदी बजट ही खर्च हो पाया. 

राजस्थान में 5 योजनाओं में 10 करोड़ 80 लाख से ज्यादा का बजट आवंटित हुआ लेकिन उसमें से महज 75 लाख रुपए भी खर्च नहीं हो पाए. राजस्थान में कांग्रेस सरकार के आते ही सबसे पहले इन्ही योजनाओं पर एक्शन लिया गया, प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने इन योजनाओं को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द इन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाए ताकि महिलाओं को उनका हक मिल सकें और उनकी सुरक्षा के लिए बनाई गई योजनाएं धरातल पर उतर सकें. 

गौरतलब है कि मंत्री ममता भूपेश ने योजनाओं का पूरा ठीकरा वसुंधरा सरकार पर फोड़ा था. उन्होंने कहा था "शासन की कमी के चलते इन योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पाया लेकिन अब कांग्रेस सरकार के आते ही इन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है".

दूसरी ओर महिला अधिकारिता के नए आयुक्त पीसी पवन ने भी इस संबंध में अधिकारियों की मीटिंग ली और योजनाओं के क्रियान्वयन के निर्देश दिए उनका कहना है कि उन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा जो योजना बहुत पीछे चल रही हैं. इसके साथ साथ उन्होंने यह भी कहा कि "जल्द से जल्द इन योजनाओं का धरातल पर लाने की प्रयास किया जाएगा जिससे कि महिलाओं को इन योजनाओं का लाभ मिल सके और यह योजना पूरी तरह से धरातल पर उतर सके".