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राजस्थान: UIN ना लेने पर हजारों हथियारों के लाइसेंस हुए रद्द, गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

गृह मंत्रालय ने वर्ष 2016 में  ALIS सॉफ्टवेयर जारी किया. उसके बाद नए लाइसेंस ही ऑन लाइन जारी होने लगे हैं. इसमें लाइसेंस के साथ ही यूआईएन आता है और नवीनीकरण भी ऑन लाइन प्रक्रिया से हो रहा है.

राजस्थान: UIN ना लेने पर हजारों हथियारों के लाइसेंस हुए रद्द, गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर/ विष्णु शर्मा: राज्य में हजारों की तादाद में हथियार लाइसेंस अवैध हो गए हैं. दरअसल, लाइसेंस धारकों को 31 मार्च 2019 तक गृहमंत्रालय से यूनिक आईडेंटीटीफिकेशन नम्बर लेने थे, लेकिन हजारों की तादाद में लाइसेंस धारकों ने यूआईएन नहीं लिया. हालत यह है कि राज्य में पंजीकृत हथियार लाइसेंसों में उदयपुर में सबसे ज्यादा ढाई हजार से अधिक हथियार लाइसेंस हुए हैं. केंद्रीय गृहमंत्रालय ने अमान्य हुए ऐसे सभी हथियार लाइसेंसधारकों की जानकारी मांगी है.   

राजस्थान में हजारों की तादाद में रजिस्टर्ड हथियार लाइसेंस हैं. प्रदेश में जिला कलेक्टरों को हथियार लाइसेंस रजिस्ट्रेशन के अधिकार हैं. वहीं एसडीएम को एमएल गन यानी टोपीदार बंदूक के लाइसेंस जारी करने के अधिकार सौंपे हुए हैं. हथियार लेने के बाद कोई भी व्यक्ति कहीं भी लाइसेंस का रिन्यूअल करवा लेता है. वहीं किसी भी जिले से लाइसेंस ले सकता है. 

ऐसे में प्रदेश में कितने हथियार लाइसेंस हैं और कितनों ने नवीनीकरण करवाया है, इसकी एक साथ जानकारी नहीं मिल पाती थी. इसके बाद हथियार लाइसेंस में एकरूपता लाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 24 जुलाई 2012 को नेशनल डेटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस पोर्टल यानी नडाल शुरू किया. नडाल पोर्टल पर सभी शस्त्र लाइसेंस धारियों की सभी प्रकार की सूचना अपलोड करनी थी, उसके बाद शस्त्र अनुज्ञा धारी को एक UIN नंबर अर्थात यूनिक आईडेंटिफिकेशन नम्बर जारी किया जाता है. इसमें इस यूआईएन नम्बर को कहीं भी कम्प्यूटर में डालेंगे तो हथियार लाइसेंस धारक की पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी. इससे फर्जी हथियार लाइसेंस पर भी रोक लगेगी. 

वर्ष 2016 के बाद लाइसेंस के साथ यूआईएन
गृह मंत्रालय ने वर्ष 2016 में  ALIS सॉफ्टवेयर जारी किया. उसके बाद नए लाइसेंस ही ऑन लाइन जारी होने लगे हैं. इसमें लाइसेंस के साथ ही यूआईएन आता है और नवीनीकरण भी ऑन लाइन प्रक्रिया से हो रहा है. परंतु 2016 से पहले जारी हुए हथियार लाइसेंस की सूचना अपलोड करने के लिए NDAL पोर्टल पर अपलोड करना था. जानकारी अपलोड करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2019 थी, उसके बाद जिन हथियार लाइसेंस धारियों के पास यूआईएन नम्बर नहीं है वे सभी अवैध हैं. बताया जा रहा है कि कलेक्टर के स्तर पर एनडीएएल पर अपलोड करने का काम लगभग पूरा हो गया, लेकिन एसडीएम के स्तर पर कार्य अधूरा रह गया. इसका कारण हथियार लाइसेंस के नवीनीकरण की फीस बढ़ाया जाना बताया जा रहा है. 

गृह मंत्रालय ने भी पोर्टल पर हथियार लाइसेंस का डेटा अपलोड करने के लिए कई बार तारीख बढ़ाई, वीडियो कांफ्रेंस की, लेकिन फिर भी लाइसेंसधारकों ने यूआईएन नहीं लिया. अब गृह विभाग ने 31 मार्च को तारीख बढ़ाने से इनकार कर दिया. ऐसे में कमोबेश सभी जिलों में रजिस्टर्ड हथियार लाइसेंस की तुलना में सभी ने यूनिक आईडेंटीटीफिकेशन नम्बर नहीं लिए गए हैं. इनमें सबसे ज्यादा उदयपुर में ढाई हजारसे ज्यादा लाइसेंस है. गृहमंत्रालय ने राजस्थान से यूआईएन नम्बर नहीं लेने वाले हथियार लाइसेंस धारकों की जानकारी मांगी है.