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'बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ' अभियान में राजस्थान फिर से देश में अव्वल

महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी 24 जनवरी को दिल्ली में राजस्थान को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करेगी. 

'बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ' अभियान में राजस्थान फिर से देश में अव्वल
राजस्थान को इस योजना में तीन पुरस्कार मिलने जा रहे हैं. (फाइल फोटो)

आशीष चौहान,जयपुर: पूरे देश में चला 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान में राजस्थान एक बार फिर देश में अव्वल आया है. राजस्थान को लगातार दूसरी बार श्रेष्ठ राज्यों में चुना गया है. केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी 24 जनवरी को दिल्ली में राजस्थान को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करेगी. 

आपको बता दें कि, राजस्थान को इस योजना में तीन पुरस्कार मिलने जा रहे हैं. पहला पुरस्कार श्रेष्ठ राज्य की श्रेणी में और दूसरा और तीसरा पुरस्कार श्रेष्ठ जिलों में श्रेणी में दिया जाएगा. वहीं, श्रेष्ठ जिलों में देशभर से 25 जिलों का चयन हुआ है, जिसमें राजस्थान के दो जिले झुन्झुनू और हनुमानगढ को पुरस्कृत किया जाएगा. झुन्झुनू को पीसीपीएनडीटी (PCPNDT)के क्रियान्वयन के लिए और हनुमानगढ को सामुदायिक भागीदारी निभाने के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा. 

यह पहला मौका नहीं है जब राजस्थान को 'बेटी बचाओ बेटी पढाओ' में पुरस्कार मिल रहा है, 2018 में भी राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति के हाथों इस श्रेणी में पुरस्कार मिला था. 

पीएम नरेंद्र मोदी के द्वारा शुरू किए गए इस अभियान के जरिए राजस्थान में लिंगानुपात में भी कमी आई है. 2015 में जहां प्रति 1 हजार पुरूषों पर 929 महिलाए थी, वहीं अब यह बढकर 950 तक पहुंच गई है. इसके साथ साथ बाल विवाह जैसी कुरूतियों पर भी लगाम लगी है.

महिला अधिकारिता विभाग के डायरेक्टर पीसी किशन का कहना है " विभाग को 24 जनवरी को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिलेगा. लेकिन इस पुरस्कार का श्रेय इस योजना से जुड़े तमाम अधिकारियों को जाता है. 2011 की जनगणना के मुताबिक झुन्झुनू में 1 हजार पुरूषों पर 837 महिलाए थी. जब मिशन का पहला साल खत्म हुआ तो यहां इतना बदलाव हुआ कि किसी को आस नहीं थी. यहां 1000 पुरूषों पर 837 से बढकर महिलाओं की संख्या 903 पहुंच गई. उसके बाद अगले साल पुरूषों के अनुपात में महिलाओं की संख्या बढकर 952 हो गई है. वहीं पूरे राजस्थान की बात करे तो 2015 में 1 हजार पुरूषों पर महिलाओं का लिंगानुपात 929, 2016 में 938 और 2017-18 में 950 तक बढ गया है."

इन आंकडों को देखकर तो ये साफ हो गया है कि ये जिले राष्ट्रीय पुरस्कार के हकदार है, लेकिन अब देखना यह होगा कि बाकी के जिले कैसे इन जिलो से सीख ले पाते है.