राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव: पहली बार एससी प्रत्याशी ने दर्ज की अध्यक्ष पद पर जीत

राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ इतिहास में पहली बार अनुसूचित जाति के प्रत्याशी ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर विश्वविद्यालय में छाए हुए जातिगत समीकरणों को भी ठेंगा दिखाया है.

राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव: पहली बार एससी प्रत्याशी ने दर्ज की अध्यक्ष पद पर जीत
राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में विनोद जाखड़ को 4321 वोट मिले..

ललित कुमार. जयपुर: राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ इतिहास में पहली बार अनुसूचित जाति के प्रत्याशी ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर विश्वविद्यालय में छाए हुए जातिगत समीकरणों को भी ठेंगा दिखाया है. निर्दलीय उम्मीदवार विनोद जाखड़ के कैंपस का किंग बनने के साथ ही एक बात पर मुहर लग गई कि यूनिवर्सिटी के छात्र अब जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर मतदान करने का फैसला कर चुके हैं. इतना ही नहीं जाति कार्ड खेलने वाले छात्र संगठनों का वर्चस्व भी अब कैंपस में कमजोर होने लगा है. इस बार के चुनाव नतीजों को जातिगत चश्मे से देखें तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आते हैं.

प्रदेश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में शुमार राजस्थान विश्वविद्यालय में लगातार तीसरे साल अध्यक्ष पद पर निर्दलीय ने जीत हासिल करके इतिहास रच दिया है. विधानसभा चुनाव से पहले छात्रसंघ चुनावों को लिटमस टेस्ट के रूप में देखा जा रहा था. इस टेस्ट में बीजेपी और कांग्रेस के दोनों ही छात्र संगठनों को करारी हार का सामना करना पड़ा है. पिछले दो सालों से जहां एबीवीपी के निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर अपने संगठन को धूल चटाई थी तो वहीं इस साल एनएसयूआई के बागी विनोद जाखड़ ने जीत हासिल कर अपने ही संगठन को पटखनी दी.  

ये चार उम्मीदवार हुए विजयी: 
अध्यक्ष पद पर विनोद जाखड़ ने तो उपाध्यक्ष पद पर रेणू चौधरी ने बाजी मारी. महासचिव पद के चुनाव में जीत आदित्य प्रताप सिंह को मिली तो संयुक्त सचिव के पद पर मीनल शर्मा विजयी हुए.
कैंपस के चुनाव में युवाओं ने जातिगत समीकरणों को सिरे से खारिज कर अपना मेंडेट दिया है. एबीवीपी की ओर से इस साल अध्यक्ष और महासचिव दोनों ही पदों पर जाट प्रत्याशी का कार्ड खेला गया था. ये कार्ड पूरी तरह से गलत साबित हुआ. यही जाति कार्ड एनएसयूआई ने भी खेला था इसलिए अध्यक्ष पद पर जाट उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया था. ये फैसला पूरी तरह से फेल साबित हुआ. अध्यक्ष पद पर कुल 6 उम्मीदवार ताल ठोक रहे थे. वोटों के आधार पर उनकी स्थिति कैसी रही ये बताते हैं. 

किसको कितने वोट मिले
राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में विनोद जाखड़ को 4321 वोट मिले. वहीं, राजपाल चौधरी को 2467 वोट, रणवीर सिंघानिया को 1789 वोट, दुष्यंत राज को 1351 वोट, महेश सामोता को 1214 वोट मिले जबकि विनोद कुमावत को 66 वोट से संतोष करना पड़ा. इन वोटों के अलावा 176 छात्रों ने नोटा का भी इस्तेमाल किया जबकि 96 छात्रों के वोट को अवैध करार दिया गया. बहरहाल, साल 2016 में एबीवीपी के बागी अंकित घायल, 2017 में एबीवीपी के बागी पवन यादव और 2018 में एनएसयूआई के बागी विनोद जाखड़ ने जीत हासिल करके ये साबित कर दिया है कि छात्रसंघ चुनावों से अब ना सिर्फ जातिगत राजनीति को नकारा जा चुका है बल्कि जाति आधारित राजनीति करने वाले छात्र संगठनों का वर्चस्व भी कैंपस से अब खत्म होने के कगार पर है.