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राजस्थान: BJP की रायशुमारी बैठक से पहले संतों की शरण में पहुंची वसुंधरा राजे

बीजेपी की रायशुमारी बैठकों के दूसरे दिन का कार्यक्रम शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सादड़ी में सदानंद महाराज के आश्रम पहुंची और उनका आशीर्वाद लिया.

राजस्थान: BJP की रायशुमारी बैठक से पहले संतों की शरण में पहुंची वसुंधरा राजे
आश्रम में मुख्यमंत्री का तिलक लगाकर मंत्रोच्चार के साथ स्वागत किया गया

पाली:अपने हर काम देव दर्शन और आस्था के साथ शुरू करने वाली मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे बीजेपी की टिकट पर रायशुमारी से ठीक पहले एक बार फिर संतों की शरण में है. मुख्यमंत्री ने मंगलवार को पाली के सादड़ी में सदानंद महाराज के दर्शन किए और उनसे आशीर्वाद भी लिया. मुख्यमंत्री गौरव यात्रा के दौरान सदानंद महाराज के दर्शन करने नहीं जा पाई थी इसको लेकर उन्होंने खेद जताया.

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को आस्तिक स्वभाव की महिला माना जाता है और समय-समय पर त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन करके और दूसरे धार्मिक आयोजनों में शिरकत करके मुख्यमंत्री ने धर्म के प्रति अपनी निष्ठा का प्रमाण भी दिया है. लेकिन चुनावी माहौल में मुख्यमंत्री धर्म और धर्म गुरु की नाराजगी नहीं लेना चाहती. यही कारण है कि बीजेपी की रायशुमारी बैठकों के दूसरे दिन का कार्यक्रम शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सादड़ी में सदानंद महाराज के आश्रम पहुंची और उनका आशीर्वाद लिया.

खबर के मुताबिक आश्रम में मुख्यमंत्री का तिलक लगाकर मंत्रोच्चार के साथ स्वागत किया गया और उन्हें चुनरी ओढ़ा कर अभिनंदन भी किया गया. मुख्यमंत्री ने चैतन्य सदानंद महाराज से कुछ देर मंत्रणा भी की. इस दौरान उन्हें पता लगा कि पिछले दिनों अगस्त के आखिरी सप्ताह में जब उनकी गौरव यात्रा रणकपुर आई थी, तब भी आश्रम में 200 से ज्यादा संत उनका इंतजार कर रहे थे.  मुख्यमंत्री को इस बात का पता चला तो उन्होंने भी घटनाक्रम पर खेद जताया और कहा कि उनसे यह चूक हो गई.

वहीं इस मुद्दे पर सफाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दरअसल उन तक यह मैसेज ही नहीं पहुंचा कि आश्रम में संतजन उनका इंतजार कर रहे हैं. आश्रम से लौटते वक्त भी मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि यहां तो उन्हें आना ही था वरना इस पाप का भार उनके सर पर ही आता और वे ऐसा कतई नहीं चाहती.

पाली के सादड़ी में चातुर्मास प्रवास कर रहे संत चैतन्य अवधेश महाराज ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद देने के साथ ही एक माला भी भेंट की. आश्रम में मौजूद लोगों ने मुख्यमंत्री को बताया कि गौरव यात्रा के समय से ही यह माला उनके लिए रखी गई थी. यह सुनते ही मुख्यमंत्री ने एक बार फिर से उस माला को अपने सिर से लगा लिया. मुख्यमंत्री की आस्था और उनकी मान्यता के कारण ही बीजेपी इस बार भी रायशुमारी की बैठकें रणकपुर में कर रही है. पार्टी के नेताओं का ऐसा मानना है कि जिस तरह 

गौरतलब है कि पिछली बार भी बीजेपी ने चारभुजानाथ जी के दर्शन करने के साथ प्रदेश में सुराज संकल्प यात्रा की शुरुआत की गई थी और रणकपुर में ही फीडबैक लिया गया था जिसके बाद प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनीं. यही कारण है कि इस बार भी बीजेपी उसी तर्ज पर चलते हुए इस बार भी विधानसभा चुनाव में जीत की उम्मीद कर रही है.