राजस्थान: लोकसभा चुनाव में सिर्फ वोटर सिल्प से वोट नहीं कर पाएंगे मतदाता

पिछले विधानसभा चुनाव में 86.94 फीसदी मतदाताओं ने मतदान के समय वोटर स्लीप का उपयोग किया था लेकिन अब यही वोटर स्लीप लोकसभा चुनाव में पहचान का आधार नहीं होगा.

राजस्थान: लोकसभा चुनाव में सिर्फ वोटर सिल्प से वोट नहीं कर पाएंगे मतदाता
फाइल फोटो

जयपुर: लोकसभा इलेक्शन में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए इस बार सख्ती की जाएगी. वोटर स्लिप या फोटो युक्त वोटर स्लिप से वोट डालने वालों को इलेक्शन कमीशन ने तगड़ा झटका दिया है. इस बार कोई भी सिर्फ वोटर स्लिप से वोट नहीं डाल सकेगा. उसे वोट डालने के लिए पहचान पत्र ही लेकर जाना होगा. किसी तरह के दुरुपयोग से बचने के लिए चुनाव आयोग ने यह निर्देश दिए हैं लेकिन विधानसभा चुनाव में 87 फीसदी मतदाताओं ने वोटर स्लिप से मतदाताओं ने मतदान किया था.

पिछले विधानसभा चुनाव में 86.94 फीसदी मतदाताओं ने मतदान के समय वोटर स्लीप का उपयोग किया था लेकिन अब यही वोटर स्लीप लोकसभा चुनाव में पहचान का आधार नहीं होगा. राज्य में होने वाले लोकसभा आम चुनाव-2019 में मतदाता केवल वोटर स्लिप के आधार पर मतदान नहीं कर सकेंगे. मतदान के लिए मतदाता को ईपिक कार्ड (मतदाता फोटो युक्त पहचान पत्र) दिखाना होगा.

विधानसभा चुनाव में ईपिक कार्ड से केवल 9.93 मतदाताओं ने मतदान किया था. ईपिक कार्ड नहीं होने की स्थिति में 11 अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक को दिखाने पर ही मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे. दिसंबर में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में वोटर स्लिप को पहचान का आधार मानकर मतदान कराया गया था लेकिन इनके दुरुपयोग होने की आशंका को देखते हुए पिछले दिनों भारत निर्वाचन आयोग ने नए निर्देश जारी किए थे. हालांकि, इस बार भी वोटर स्लिप सभी मतदाताओं की सुविधा के लिए पहुंचाई जाएगी लेकिन केवल मतदाता पर्ची पहचान का वैद्य दस्तावेज नहीं होगी. विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 4 करोड़ 76 लाख 72 हजार 871 मतदाताओं में से 3 करोड़ 53 लाख 90 हजार 712 ने मतदान किया था. इसमें से 3,07,69,749 ने वोटर स्लीप, 35,14,742 ने ईपिक कार्ड से और 10,93,780 ने अन्य दस्तावेजों से मतदान किया था.

लोकसभा चुनाव में ईपिक कार्ड के अलावा पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राज्य या केन्द्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, पब्लिक लिमिटेड कम्पनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किए गए फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र, बैंकों या डाकघरों द्वारा जारी की गई फोटोयुक्त पासबुक, पेन कार्ड, आरजीआई और एनपीआर द्वारा जारी किए गए स्मार्ट कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, श्रम मंत्रालय की योजना द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज, विधायकों, सांसदों को जारी किए सरकारी पहचान पत्र या आधार कार्ड में से कोई एक दस्तावेज को मतदान करते समय दिखाना जरूरी होगा. केवल पर्ची के आधार पर कोई भी मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा.  

बहरहाल, कोई भी वोटर वोट डालने से छूट न जाए, इसके लिए इलेक्शन कमीशन ने पिछले चुनावों में वोटर स्लिप से वोट डालने की व्यवस्था शुरू की थी. लोगों के घरों में पहले से वोटर स्लिप पहुंचा दी जाती थी तो वोटर सीधे बूथ पर जाकर इस स्लिप से वोट डाल देता था. वोटर लिस्ट चुनाव से कुछ दिनों पहले भी जारी होती है. इसी के आधार पर कुछ वोटर स्लिप बाद में प्रिंट होती थीं. इनकी प्रिंटिंग अथेंटिक नहीं होती थी जिसकी वजह से इसके फर्जीवाड़े होने का डर बना रहता था. इसी फर्जीवाड़े को रोकने के लिए इलेक्शन कमीशन ने फोटो युक्त वोटर स्लिप से वोट डालने पर रोक लगा दी है.