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राजस्थान का इकोसिस्टम खतरे में, पेड़ों की संख्या घटी तो और बढ़ेगा तापमान: रिपोर्ट

राजस्थान की बात करें तो हर साल पेड़ो की कटाई से ताममान में बढ़ोतरी हो रही हैं, जिसका विपरित प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है.

राजस्थान का इकोसिस्टम खतरे में, पेड़ों की संख्या घटी तो और बढ़ेगा तापमान: रिपोर्ट
रिपोर्ट में राजस्थान के वनों से हर साल 33,244 करोड़ रूपए का ऑक्सिजन मिलना सामने आया है.

रोशन शर्मा/राजस्थान: एक पेड़ अपने पूरे जीवनकाल में हर तरह से मनुष्य के काम आता है. भोजन प्रदान करने, छांव देने और घर बनाने को लकड़ी देने से लेकर सांसे लेने के लिये जीवनदायिनी ऑक्सीजन भी देता है. आपके आस-पास जितने अधिक पेड़ उतना कम प्रदूषण होगा. हाल ही में जारी हुई भारतीय वन प्रबंधन संस्थान की रिपोर्ट में राजस्थान के वनों से हर साल 33,244 करोड़ रूपए का ऑक्सिजन मिलना सामने आया है.

आप हर साल बढ़ते तापमान से परेशान हैं. क्या कभी आपने सोचा हैं कि इतनी गर्मी, उमस क्यों पड़ रही हैं. फिर कभी आपने सोचा हैं कि बारिश अब इतनी कम क्यों होने लगी है. हाल ही में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल की ओर से किए सर्वे में कई चौकानें वाले तथ्य सामने आए हैं. राजस्थान की बात करें तो हर साल पेड़ो की कटाई से ताममान में बढ़ोतरी हो रही हैं, जिसका विपरित प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है. पेड़ो से मिलने ऑक्सीजन को लेकर कभी किसी नें नहीं सोचा की हमें ये अनमोल ऑक्सीजन पेड़ो से फ्री मिल रहा हैं.

भारतीय वन प्रबंधन संस्थान की रिपोर्ट में सालाना 33244 करोड़ रुपये मूल्य का वास्तविक लाभ समाज और अर्थव्यवस्था को प्राप्त हो रहा है. साथ ही इस रिपोर्ट में बताया गया है की राजस्थान के वनों में 52,433 करोड़ रुपये का 8 करोड़ 96 लाख टन कार्बन स्टॉक भी जमा है. लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग का स्तर कम करने के लिए शहरों के बीचों-बीच जंगलों को खड़ा किया जा रहा है. ऐसे टिकाऊ शहरों का निर्माण करके ही वन क्षेत्र और पेड़ों को बढ़ाया जा सकेगा. 

रिपार्ट में सामने आया की आंकड़ा दरअसल और अधिक होना चाहिए क्योंकि अभी इसमें वनों से प्राप्त होने वाले केवल 18 प्रकार की सेवाएं और उत्पाद ही अध्ययन में शामिल किए जा सके हैं. इनमें टिंबर, जलाऊ लकड़ी, लघु वनोपज, वनों में आमोद-प्रमोद और पर्यटन, संचित कार्बन, कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन, हाइड्रोलोजिकल सर्विसेज, न्यूट्रिएंट्स रेगुलेशन, मृदा संरक्षण, परागण, वन्य प्राणियों के लिये आवास, जैव-विविधता और जीन-पूल संरक्षण, ऑक्सीजन समेत अन्य गैसों का रेगुलेशन जिसमें सांस लेने की हवा भी  आदि शामिल हैं.

इस शोध के लिए विश्व में उपलब्ध उच्चकोटि की उन सभी विधियों का प्रयोग किया गया है जो इकोलॉजिकल इकोनॉमिक्स से संबद्ध अध्ययनों के लिए उपलब्ध हैं. राजस्थान के भीतर केवल एक क्षेत्र, अरावली और विंध्याचल पर्वत श्रंखलाओं के मिलान पर स्थित रणथम्भोर जो विश्व का सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व है. शोध से ज्ञात होता है कि कार्बन और लकड़ी के रूप में रणथम्भोर टाइगर रिजर्व में 49.2 अरब रुपये का स्टॉक जमा है. इस मूल जमापूंजी से वस्तुओं एवं सेवाओं के रूप में सालाना 8.3 अरब रुपये का अनुमानित आर्थिक प्रवाह प्राप्त होता है. ऐसे क्षेत्रों का सतत विकास और दीर्घकालीन संरक्षण न केवल राजस्थान के लोगों के लिए फायदेमद हैं बल्कि पूके देश के लिए उपयोगी है.

IIFM स्टेडी के सर्वे में यह बात भी सामने आयी हैं की पिछले दो दशकों में पर्यावरणीय प्रबंधन की एक रणनीति के रूप में पर्यावरण सेवाओं के बदले भुगतान में बढ़ती वैश्विक रुचि देखी गई है. यदि आपके शहर को साफ़ पानी चाहिए तो जिन वन क्षेत्रों से यह पानी आता है वहां के लोगों को उन वनों के सतत प्रबंध के लिए आपको भुगतान करना होगा. आप अपनी फैक्ट्री से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम नहीं कर पा रहे हैं तो उन लोगों को बजट देकर वृक्षारोपण के सतत प्रबंध में निवेश कीजिए. एक अन्य रूप में समझें तो यदि आपको राजस्थान के वनों से सालाना 33,244 करोड़ रुपये मूल्य के वास्तविक उत्पाद एवं सेवाएं प्राप्त करते रहना है तो इन वनों के सतत प्रबंध एवं संरक्षण हेतु वित्तीय निवेश करना होगा. समुचित निवेश के बिना, वनों का विनाश होने पर, 33,244 करोड़ रुपये मूल्य के वास्तविक उत्पाद एवं सेवाएं मिलना बंद हो जाएगा