राजस्थान के 'मसाला मेले' ने स्थापित किए नए आयाम, टूटेगा 34 साल पुराना रिकॉर्ड

जयपुर में 34 साल से लग रहे मसाले मेले को अब नई पहचान मिल गई है. इसी वजह से सूखे मसाला मेले का कारोबार भी लगातार बढ़ता जा रहा है. 

राजस्थान के 'मसाला मेले' ने स्थापित किए नए आयाम, टूटेगा 34 साल पुराना रिकॉर्ड

जयपुर: जयपुर का सहकार मसाला मेला अब पूरे देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने मे कामियाब हुआ है. पिंकसिटी का मसाला मेला लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है. जयपुर शहर को कॉनफैड का ये मेला खूब रास आ रहा है. मसालों की गुणवत्ता और शुद्धता के चलते मसाला मेले की महक लगातार बढ़ती जा रही है. इसलिए अब मसाला मेला 34 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ रहा है.

जयपुर में 34 साल से लग रहे मसाले मेले को अब नई पहचान मिल गई है. इसी वजह से सूखे मसाला मेले का कारोबार भी लगातार बढ़ता जा रहा है. मसाला मेले में इस बार कॉनफेड 34 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने जा रहा है. पिछली बार सवा करोड़ की ब्रिकी का रिकॉर्ड बना था, लेकिन इस बार 6 दिन में 90 लाख से ज्यादा की ब्रिकी हो चुकी है. शुद्धता और अच्छी गुणवत्ता के चलते जयपुर शहर के लोग मसाले मेले की ओर खिचे चले जा रहे है. मसालों की खुशबू से उपभोक्ता का अंदाजा लग जाता है कि मसाले शुद्ध हैं या नहीं. कॉनफैड के एमडी संजय गर्ग का कहना है कि इस बार भी दूसरे राज्यों के मसालों की डिमांड बढ़ गई है.

इस मेले के माध्यम से हम एक ही छत के नीचे प्रदेश के साथ-साथ केरल, तमिलनाड़ु, पंजाब के विशिष्ट मसालों और उत्पादों को पूर्ण शुद्धता के साथ उचित मूल्य पर उपलब्ध करा रहे हैं. सहकारिता का मूल उद्देष्य आमजन को गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय सेवाओं के माध्यम से सहकारिता की भावना को साकार करना है. मेले में लोगों को बूंदी का चावल जिसे राजस्थान का बासमती चावल भी कहा जाता है, बहुत लुभा रहा है. 

शुद्धता और अच्छी गुणवत्ता की बदौलत ही सहकारिता विभाग का मसाला मेला लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है. ऐसे में अब विभाग की ये भी कोशिश रहेगी कि अगले साल विदेशों से भी मसाले मेले में लगें, ताकि मसाले मेले ना केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम दर्ज करवा सके.