close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: निशा यादव ने मॉडलिंग में लहराया अपना परचम, पिता ने बताई बेटी के संघर्ष की कहानी

केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने अपने वीडियो में कहा कि निशा यादव अपने गांव से 5 किलोमीटर का रास्ता तय करके अपनी पढ़ाई करने जाती थी. 

राजस्थान: निशा यादव ने मॉडलिंग में लहराया अपना परचम, पिता ने बताई बेटी के संघर्ष की कहानी
फोटो साभार- निशा यादव/ इंस्टाग्राम

अमित यादव, कोटपूतली: राजस्थान जयपुर जिले की कोटपूतली तहसील के ग्राम शुक्लाबास की बेटी जो आज मुंबई की चहेती बन गई है और जिसकी सफलता की कहानी खुद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने वीडियो जारी कर पूरी दुनिया को बताई. कोटपूतली तहसील के एक छोटे से गांव शुक्लाबास में किसान परिवार में जन्मी इस बेटी का वीडियो जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के साथ देखा तो सभी का मन खुशी से गदगद हो गया. 

मुंबई में चल रहे एक फैशन वीक के मंच से स्मृति ईरानी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट शेयर किया है. वीडियो में स्मृति ईरानी खुद कह रही हैं कि मैं चाहती हूं आप सब निशा यादव से मिलें जिसकी हाइट है 5 फिट 11 इंच. यह सिर्फ एक मॉडल ही नहीं हैं यह साथ में जयपुर से लॉ की पढ़ाई भी कर रही हैं. दूसरा साल पूरा किया है. 

इसी के साथ लैक्मे फैशन वीक के प्लेटफार्म पर भी परफॉर्म कर रही हैं. इसी के साथ निशा यादव से बात करके केंद्रीय मंत्री ने यह भी संदेश दिया कि पहले बेटियों को पढ़ाई पूरी करवाएं बाद में बेटियों की शादी के बारे में सोचें और बालिग होने के बाद जब उनकी इच्छा हो तब परिजनों को उनकी शादी करनी चाहिए.

केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने अपने वीडियो में कहा कि निशा यादव अपने गांव से 5 किलोमीटर का रास्ता तय करके अपनी पढ़ाई करने जाती थी. लगभग 5 फीट 11 इंच कद वाली दुबली पतली लड़की सूट सलवार पहन के उसके ऊपर ब्लेजर डालकर राजस्थान के एक गांव से दूसरे गांव में पढ़ने के लिए जाया करती थी. 

निशा यादव के पिता कोटपूतली क्षेत्र के जाने-माने समाजसेवी राधेश्याम शुक्लाबास के नाम से जाने जाते हैं. निशा के पापा मॉडलिंग के खिलाफ थे और वह निशा की शादी करना चाहते थे लेकिन निशा ने अपने सपनों का पीछा नहीं छोडा. इसके चलते निशा को उसके पापा ने घर से निकाल दिया. आज उस बात को निशा के पाप याद करते है तो बहुत पछताते हैं और जी मीडिया से बात करते हुए भावुक भी हो गए. आज खुद समाज के लिये कहते हैं बेटियां आज भी बंदिशों की बेड़ीयों में जकड़ी हुई हैं. अगर इन्हें उड़ान भरने का मौका मिले तो आसमान छू सकती हैं. निशा के पाप ने बताया आज सब कुछ ठीक है. आज पापा राधेश्याम यादव को अपनी बेटियों पर गर्व है.

निशा यादव पांच बहने हैं जिनमें एक बहन आईएएस, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, एक पुलिस ऑफिसर और एक एजुकेशन फील्ड से जुड़ी है. पिता ने सभी बेटियों को पूरी आजादी दी हैं. गांव में समाज के लोग इसके खिलाफ थे लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की और आज सभी बेटियों को पढ़ाया लिखाया और पूरी आजादी दी. जिसका परिणाम यह है कि सभी बेटियां आज अच्छे मुकाम तक पहुंची हैं. मेरी एक बेटी आईएएस है. पिता ने जब हमें काम की आजादी दी तो गांव वालों ने इसका विरोध किया लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की और सबका विरोध झेलते हुए सभी बेटियों को काबिल बनाया. यदि सभी पिता अपनी बेटियों को इस तरह आजादी दें तो वो जीवन में सफलता की ऊंचाइयां छू सकती हैं.

सच में जब केंद्रीय मंत्री स्मृति रानी के मुंह से यह बात कोटपूतली की बेटियों ने सुनी तो उन्हें भी गर्व हुआ. निशा ने जिस स्कूल में अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी की उसी स्कूल की छात्राओं ने निशा को अपनी बड़ी बहन बताते हुए कहा कि निशा दीदी हमारे लिए प्रेरणादायक हैं. हम भी उनकी तरह देश और समाज के लिए काम करेंगे.

निशा यादव गांव से 6 किलो मीटर की दूरी पर बने ढाणी में खुद के मकान से स्कूल रोज आती थी. वो रास्ता वास्तव में बिल्कुल सुनसान नदी नालों के बीच जंगल से गुजरता है. इसी रास्ते से जब हम निशा के पिता राधेश्याम जी के साथ वहां पहुंचे तो उस घर मे निशा की दादी और उसके चाचा चाची मिले. निशा की कामयाबी से परिवार में बेहद खुशी दिखी दादी ने मोबाइल पर जब निशा का वीडयो देखा तो बहुत खुश नजर आई और सभी अपनी पोतियों को राजस्थानी स्थानीय भाषा मे आशिर्वाद दिया.