Rajasthan Politics: पूर्व MLA सुदर्शन सिंह रावत का हरि सिंह रावत पर आरोप, बोले- BJP का कार्यकर्ता बेईमान विधायक के कारण रो रहा

Rajasthan Politics: राजसमंद जिले में राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस के दिग्गज नेता व भीम से पूर्व विधायक सुदर्शन सिंह रावत द्वारा भाजपा से वर्तमान विधायक हरिसिंह रावत को बेईमान बताने पर जबरदस्त चर्चा हो रही है.

Rajasthan Politics: पूर्व MLA सुदर्शन सिंह रावत का हरि सिंह रावत पर आरोप, बोले- BJP का कार्यकर्ता बेईमान विधायक के कारण रो रहा

Rajasthan Politics: राजस्थान के राजसमंद जिले में राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस के दिग्गज नेता व भीम से पूर्व विधायक सुदर्शन सिंह रावत द्वारा भाजपा से वर्तमान विधायक हरिसिंह रावत को बेईमान बताने पर जबरदस्त चर्चा हो रही है. आपको बता दें कि भीम देवगढ़ की जनता के आग्रह पर लगभग एक साल बाद सुदर्शन सिंह रावत जनता के बीच पहुंचे. 

इस बीच सुदर्शन सिंह रावत ने विधायक हरिसिंह रावत पर जमकर हमला बोला. पूर्व विधायक सुदर्शन सिंह रावत ने कहा कि भीम देवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में पूरी तरह से लूट चल रही है. बीजेपी का कार्यकर्ता बेईमान MLA के कारण घर में बैठकर रो रहा है. वहीं इस बीच सुदर्शन सिंह रावत ने एक बड़े उग्र प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है. 

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उन्होंने कहा कि यदि चंबल परियोजना का कार्य दो से तीन माह में शुरू नहीं हुआ, तो कांग्रेस के लोग उग्र आदोलन करेंगे. भीम देवगढ़ की जनता को ध्यान में रखते हुए सुदर्शन सिंह रावत ने कहा कि हरिसिंह जी आपको कमीशन मिले ना मिले, लेकिन भीम देवगढ़ की जनता को पानी मिलता रहना चाहिए.

पढ़ें एक और बड़ी खबर

भीलवाड़ा के मांडलगढ़ में धाकड़ खेड़ी गांव के पास कोटा-चित्तौड़गढ़ रेलवे लाइन की भूमि में सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार ने सैकड़ों हरे पेड़ों पर आरी चला कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है. बताया जा रहा है कि संवेदक ने पेड़ काटने की परमिशन अधिकारियों से नहीं ली है और काटे गए पेड़ों की कीमत लाखों में होने से पेड़ों की लकड़ियों को मौके से उठाने की जुगत की जा रही है. 

इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने रेलवे विभाग को सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है. उल्टा संवेदक द्वारा ग्रामीणों को डराया गया.ग्रामीणों का आरोप है कि धाकड़ खेड़ी में रेलवे लाईन समपार फाटक के पास विभिन्न प्रजाति के बड़े-बड़े हरे वृक्षों को धराशाही कर दिया गया. जबकि गांव वालों ने पेड़ लगाकर संरक्षित किया था. यहां गांव के मवेशी घास चरने के बाद पेड़ों की छाया में विश्राम भी करते आए हैं.

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