Rajsmand: चारा-पानी के अभाव में निराश्रित पशुओं बेहाल, गर्मी में तड़पने को मजबूर

Rajsmand News: गणगौर का मेला आते ही मानो निराश्रित पशुओं पर एक पहाड़ सा टूट जाता है. लगभग 5 से 6 दिन तक इन निराश्रित पशुओं की सुध लेने वाला कोई नहीं रहता है.

Rajsmand: चारा-पानी के अभाव में निराश्रित पशुओं बेहाल, गर्मी में तड़पने को मजबूर

Rajsmand News: गणगौर का मेला आते ही मानो निराश्रित पशुओं पर एक पहाड़ सा टूट जाता है. लगभग 5 से 6 दिन तक इन निराश्रित पशुओं की सुध लेने वाला कोई नहीं रहता है. दरअसल आपको बता दे कि राजसमंद नगर परिषद द्वारा हर साल गणगौर महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जो की लगभग 5 दिनों तक चलता है.

ऐसे में निराश्रित पशु मेले में कोई व्यवधान पैदा ना करें. इसके चलते इन निराश्रित पशुओं को एक बाड़े में पकड़ पकड़ कर बंद कर दिया जाता है. बता दें कि यह टेंपरेरी बाड़ा कांकरोली शहर के विट्ठल बाग में अस्थाई तौर पर बनाया गया है. यहां तक तो सब ठीक है लेकिन इस बाड़े की जो व्यवस्था होनी चाहिए वह व्यवस्था इन निराश्रित पशुओं के लिए नहीं की गई है.

राजसमंद नगर परिषद द्वारा नाम मात्र का एक तंबू लगा दिया जाता है और दो से तीन क्यारी टाइप में पानी भरकर उनके लिए व्यवस्था की जाती है. चाह कर भी दो से तीन निराश्रित पशु अपनी प्यास नहीं बुझा सकते, तो वहीं जो तंबू लगाया गया है. इसमें पूरे पशु नहीं बैठ सकते हैं.

जब मौके पर जाकर इसकी स्थिति देखी गई तो बाड़े में बंद निराश्रित पशु कोई दीवार के नीचे बैठा हुआ था. कोई चारे के लिए इधर-उधर भटक रहा था. वहीं पानी के लिए जो क्यारी बनाई हुई थी. उसमें पानी नहीं था. पूरी तरीके से सूखा पड़ा हुआ था. आपको बता दें कि अभी जो गर्मी का टेंपरेचर नोट किया जा रहा है, वह लगभग 38 से 40 डिग्री सेल्सियस नोट किया जा रहा है.

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जहां पर एक व्यक्ति ऐसी गर्मी में 5 मिनट तक भी खड़ा नहीं हो सकता तो ऐसे में यह निराश्रित पशु लगभग 5 से 6 दिन तक इसी बाड़े में बंद रहते हैं. वहीं जब इस बारे में गो प्रेमी देवीलाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह हर साल इसी तरीके से करते हैं. इन पर कोई ध्यान नहीं देता है.

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