'किसानों का शोषण, पूंजीपतियों का पोषण' मोदी सरकार का मूलमंत्र: सुरजेवाला

कांग्रेस नेता ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि, 'जो कानून तुम्हारें अधिकारों की रक्षा न कर सके उसकी अवहेलना करना तुम्हारा परम कर्त्तव्य हैं.'

'किसानों का शोषण, पूंजीपतियों का पोषण' मोदी सरकार का मूलमंत्र: सुरजेवाला
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने किसानों के आंदोलन को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा है. (फाइल फोटो)

दिल्ली/जयपुर: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार खेती हड़पने के तीन काले कानूनों को सही बता किसानों के साथ षड़यंत्र कर रही है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार किसानों को 'गुलामी की जंजीरों' में जकड़ने का षड़यंत्र कर रही है.  साथ ही  किसानों को 'आतंकी' बता एफआईआर दर्ज करवा रही है.

सुरजेवाला ने कहा कि लाठी और अश्रु गैस चलवा दमन करने के भाजपा के षड़यंत्र को विफल किसान व कांग्रेस विफल कर देंगे. कांग्रेस नेता ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि, 'जो कानून तुम्हारें अधिकारों की रक्षा न कर सके उसकी अवहेलना करना तुम्हारा परम कर्त्तव्य हैं.'

कांग्रेस नेता ने कहा कि तीन खेती विरोधी काले कानूनों ने मोदी सरकार के मुखौटे को उतार दिया है! असल में मोदी सरकार का मूल मंत्र है, 'किसानों का शोषण, पूंजीपतियों का पोषण, किसानों का दमन, पूंजीपतियों को नमन.' उन्होंने कहा कि  आज 'मन की बात' (Mann Ki Baat) में प्रधानमंत्री मोदी ने देवी अन्नपूर्णा की बात की. क्या देवी अन्नपूर्णा दिल्ली के चारों ओर लाखों की संख्या में बैठे अपने बच्चों यानि कराहते हुए किसानो की दुर्दशा देख खुश होंगी या दुखी? क्या मोदी जी ने इस बारे भी सोचा?'

सुरजेवाला ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने पूरे देश में आंदोलनरत किसानों का अपमान करते हुए कृषि विरोधी काले कानूनों को सही बता दिया. जब देश का प्रधानमंत्री ही 62 करोड़ किसानों की बात सुनने के बजाय पूंजीपतियों के पोषण के तीन खेती विरोधी काले कानूनों को सही बताए, तो न्याय कौन देगा?'

उन्होंने कहा कि यही नहीं, भाजपा के प्रवक्ता व सांसद तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर किसानों को 'आतंकी' बताते हैं. उत्तर प्रदेश के एक मंत्री किसानों को 'गुंडा' कहते हैं. पहले भी देश के कृषि मंत्री द्वारा किसान आत्महत्या का कारण 'नपुंसकता' तक संसद के पटल पर बता किसानों का अपमान किया जा चुका है. यही नहीं शांतिप्रिय तरीके से खेती विरोधी काले कानूनों के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली आ रहे किसानों पर 12 हजार एफआईआर भाजपा सरकार द्वारा दर्ज की गई हैं.

रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'सच्चाई ये है कि मुट्ठी भर पूंजीपतियों के पैर पूजने वाली मोदी सरकार 20-25 लाख करोड़ का खेती उपज का कारोबार 62 करोड़ किसानों, मजदूरों, आढ़तियों, कामगारों से छीनकर मुट्ठीभर पूंजीपतियों को सौंप देना चाहती है. क्या पीएम मोदी किसानों द्वारा उठाई जा रही- सरल बातों का जवाब देंगे?'

'MSP की समाप्ति का षड़यंत्र'
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनाज मंडियों को खत्म करने का कानून बनाया है। अगर अनाज मंडिया खत्म हो जाएंगी तो MSP पर किसान का अनाज खरीदेगा कौन? क्या मोदी सरकार व 'फ़ूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया' (FCI) से फसल खरीदने जाएंगे? यह अपने आप में असंभव है. जब समर्थन मूल्य कोई देगा ही नहीं, जो अनाज मंडी में मिलता था, तो फिर MSP मिलेगा कैसे, देगा कौन और मिलेगा कहां?  

'जमाखोरों को खुली छूट'
कांग्रेस नेता न कहा कि इन काले कानूनों में मोदी सरकार ने जमाखोरों को असीमित मात्रा में फ़सलों यानि गेहूं, चावल, दाल इत्यादि की जमाखोरी की छूट दे दी है. किसानों की फसलें आने पर ये जमाखोर सस्ते दाम में फसल खरीद लेंगे और बाद में आम आदमी को औने पौने दामों में बेचेंगे. न किसान को कीमत मिलेगी और आम आदमी महंगाई की मार से पिसेगा.

'एक देश, एक बाजार का सफेद झूठ'
सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार ने एक और झूठ परोसा, कहा कि किसान एक राज्य से दूसरे राज्य फ़सल बेच सकता है. देश में 86 प्रतिशत किसानों के पास 5 एकड़ से कम जमीन है. उसमें से भी 80 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिनके पास 2 एकड़ ज़मीन है. वो अपने जिले से बाहर फसल बेचने की क्षमता नहीं रखते तो दूसरे राज्य में कैसे बेचेंगे? साफ है मुट्ठीभर धन्ना सेठ खरीदेंगे और वो अपने मर्जी के दाम पर बेचेंगे.

'पूंजीपतियों के हवाले खेती'
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार ने कॉरपोरेट कॉन्ट्रेक्ट फार्मिग का कानून बनाकर फिर जमींदारी की शोषणकारी प्रथा की आग में किसानों को झोंक दिया है. मोदी सरकार जानती है कि 86 प्रतिशत छोटे किसानों की क्षमता ही नहीं होगी पूंजीपतियों से लड़ने की और इस तरह 20 से 25 लाख करोड़ का खेती का व्यापार करोड़ों किसानों से छीनकर मुट्ठी भर पूंजीपतियों को सौंप दिया जाएगा. 

'गरीब की राशन प्रणाली पर प्रहार'
उन्होंने कहा, 'जब समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदा ही नहीं जाएगा तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 86 करोड़ लोगों को अनाज कैसे मिलेगा? और अनाज मंडिया खत्म होने पर लाखों मंडियों के कर्मचारी, हम्माल, छोटे आढ़ती, सभी का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा. 

(इनपुट-शादाब)