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राजस्थान: दूध की खाली थैली वापस करने पर अब मिलेंगे रुपए, RCDF की बड़ी पहल

पर्यावरण पर बढ़ते प्लास्टिक के प्रभाव के बाद में जी मीडिया ने प्रमुखता से इस खबर को चलाया था. इसके बाद आरसीडीएसफ प्लास्टिक पर नियंत्रण के लिए नई पहल शुरू करने जा रही है.

राजस्थान: दूध की खाली थैली वापस करने पर अब मिलेंगे रुपए, RCDF की बड़ी पहल
जयपुर डेयरी की बात करे रोजाना 10 लाख लीटर दूध की सप्लाई पूरे जयपुर शहर में करता है.

जयपुर: लोग डेयरी से दूध खरीदते है और उपयोग के बाद प्लास्टिक की थैलियों को कूड़ा समझकर डस्टबिन में फेंक देते हैं. यह प्लास्टिक पर्यावरण को दूषित करती है. लेकिन, अब इन प्लास्टिक की थैलियों को पैसा मिलेगा, जिन्हें कूड़ा समझकर लोग डस्टबिन में फेंक देते हैं. इसके लिए राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन सरस की डेयरी बूथ पर सेंटर बनाएगा. जी मीडिया की खबर के बाद में प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने आरसीडीएफ को नोटिस थमाकर दूध की थैलियों के निस्तारण के आदेश दिए थे. इसके बाद में अब आरसीडीएफ इसकी डीपीआर बना रहा है. जल्द ही ये नई व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि प्लास्टिक से पर्यावरण दूषित ना हो. 

पर्यावरण पर बढ़ते प्लास्टिक के प्रभाव के बाद में जी मीडिया ने प्रमुखता से इस खबर को चलाया था. इसके बाद आरसीडीएसफ प्लास्टिक पर नियंत्रण के लिए नई पहल शुरू करने जा रही है. जी मीडिया ने भी 12 जुलाई को खबर के माध्यम से आरसीडीएस और प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड को चेताया था, जिसके बाद आरसीडीएस अब नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में जुट गया है.

जयपुर डेयरी की बात करे रोजाना 10 लाख लीटर दूध की सप्लाई पूरे जयपुर शहर में करता है. ऐसे में एक लीटर दूध पर एक प्लास्टिक की पॉलिथिन माना जाए तो रोजाना जयपुर डेयरी 10 लाख प्लास्टिक पॉलिथिन से पर्यावरण को दूषित कर रहा है. इसके साथ साथ दूसरी बड़ी दूध की डेयरियां भी प्लास्टिक की पॉलिथिन में दूध बेच रही है. ऐसे में इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रोजाना लाखों टन प्लास्टिक दूध की डेयरियों से सड़क तक पहुंच रही है. लेकिन आरसीडीएफ की इस कोशिश में आम जनता का जुड़ना बहुत जरूरी है. हालांकि कई लोगों का ये भी कहना है कि विभाग को इससे भी ठोस कदम उठाना चाहिए था, ताकि पूरी तरह से ये प्लास्टिक बैन हो.

राजस्थान में प्रतिदिन 3 से 3.5 लाख किलो प्लास्टिक का यूज पॉलीबैग, पॉलीथिन, दूध की थैली, बिस्किट, नमकीन, वेफर्स, पानी की बोतल के रूप में यूज हो रहा हैं. लेकिन इस प्लास्टिक का निस्तारण और रियूज नहीं होने के कारण डम्पिग स्टेशन पर प्लास्टिक के पहाड़ खड़े हो रहे हैं और ये पहाड़ ही पर्यावरण के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. राज्य को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड एक्शऩ प्लान बना चुका हैं.

राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की सचिव शैलजा देवल ने बताया कि अपने प्रोडक्ट में प्लास्टिक का यूज करने वाली फर्मों और कम्पनियों को राजस्थान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने नोटिस जारी कर स्पष्ट निर्देशित किया हैं कि जितना प्लास्टिक का यूज किया जा रहा हैं, उस प्लास्टिक का 30 प्रतिशत प्लास्टिक वापस कलेक्ट करके निस्तारण करे. साथ ही इसकी मॉनिटरिंग के लिए ऑनलाईन मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार किया गया हैं.