उदयपुर: जाने कहां हैं सरकार के रैन बसेरे, सड़कों पर रात गुजारने को मजबूर हैं गरीब

लोगों को रोड के किनारे खुले आसमान में सोना पड़ रहा है. यही नहीं, सर्दी से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे लेकिन राहत नहीं मिल रही. 

उदयपुर: जाने कहां हैं सरकार के रैन बसेरे, सड़कों पर रात गुजारने को मजबूर हैं गरीब
चारपाई के अभाव में लोग मजबूरी में नीचे सोए हुए थे.

अविनाश जगनावत, उदयपुर: पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी के असर से उदयपुर में साफ देखा जा रहा है. बर्फबारी के चलते शहर में इन दिनों ठिठुरा देने वाली ठंड पड़ रही है. शहर से लेकर गांव ठंड का असर देखा जा रहा है. 

ठंड से गरीब और बेसहारा लोगों के लिए नगर निगम की ओर से रैन बसेरे बनाए गए हैं, जहां तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है. उदयपुर नगर निगम के इन्हीं दावों की पड़ताल की जी राजस्थान के संवाददाता  ने की.

लेकसिटी उदयपुर इन दिनों सहित लहर की चपेट में है. लगातार घट रहे तापमान का असर दिन में भी देखने को मिल रहा है, जहां लोगों को धूप में भी राहत मिलती नहीं दिख रही है तो वहीं रात को तो आलम यह हो जाता है कि अलाव के पास बैठने से भी ठंड से राहत नहीं मिल रही है. सर्दी से लोगों को राहत देने के लिए नगर निगम की ओर से कई स्थाई और अस्थाई रैन बसेरों की व्यवस्था की जाती है, जहां गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति निशुल्क रुक सकता है. 

इन रैन बसेरों में तमाम सुविधाएं देने का दावा किया जाता है, इन्हीं दावों की हकीकत सर्द रात में की गई. जी मीडिया की टीम सबसे पहले सिटी रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां हर साल निगम की ओर से अस्थाई रैन बसेरा बनाया जाता है लेकिन इस बार यहां रैन बसेरा नहीं बनाया गया और लोगों को रोड के किनारे खुले आसमान में सोना पड़ रहा है. यही नहीं, सर्दी से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे लेकिन राहत नहीं मिल रही. 

निगम के दावों की धरातल पर जांच करने जी राजस्थान की टीम इसके बाद उदिया पोल स्थित निगम के स्थाई रैन बसेरे में पहुंची, जो दो दिन से अंधेरे डूबा हुआ था. यही नहीं, चारपाई के अभाव में लोग मजबूरी में नीचे सोए हुए थे.
दो स्थानों पर अव्यवस्था का अंबार देखने के बाद टीम पहाड़ी बस स्टैंड स्थित निगम के स्थायी रेन बसेरे में पहुंची, जहां अधिकांश व्यवस्था सुचारू मिली. साथ ही निगम की ओर से यहां टीवी भी लगाई गई है, जिससे यह ठहरने वाले लोगों का मनोरंजन भी हो सके.