राजस्थान में प्रशासन का शिकार हो रही 1 लाख पदों की भर्तियां, युवक घूम रहे बेरोजगार

प्रदेश में बीते 7 सालों की अगर बात की जाए तो करीब तीन दर्जन से ज्यादा ऐसी भर्तियां हैं जो लम्बे समय से पूरा होने का इंतजार कर रही हैं. 

राजस्थान में प्रशासन का शिकार हो रही 1 लाख पदों की भर्तियां, युवक घूम रहे बेरोजगार
प्रदेश में करीब तीन दर्जन भर्तियों के करीब 1 लाख पदों पर भर्तियां अटकी हुई हैं.

जयपुर: प्रदेश में बेरोजगारी लगातार अपने पैर पसार रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है समय पर भर्ती परीक्षाओं का पूरा नहीं होना. प्रदेश में बीते 7 सालों मे करीब तीन दर्जन से ज्यादा ऐसी भर्तियां हैं जो लम्बे समय से पूरा होने का इंतजार कर रही हैं. करीब तीन दर्जन भर्तियों के करीब 1 लाख पदों पर भर्तियां अटकी हुई हैं. 

प्रदेश में बीते 7 सालों की अगर बात की जाए तो करीब तीन दर्जन से ज्यादा ऐसी भर्तियां हैं जो लम्बे समय से पूरा होने का इंतजार कर रही हैं. करीब तीन दर्जन भर्तियों के करीब 1 लाख पदों पर भर्तियां अटकी हुई हैं. अधिकतर भर्तियां जहां अदालती फेर में अटकी पड़ी हैं तो वहीं कई भर्तियां प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो रही हैं.

वर्ष 2011 से वर्ष 2018 के बीच में प्रदेश सरकार ने दर्जनों भर्तियां निकाली, लेकिन ये भर्तियां समय पर पूरा नहीं हो सकी. विभिन्न विभागों में करीब 1 लाख 16 हजार से ज्यादा पदों पर भर्तियां अटकी पड़ी हैं. लेकिन लम्बा समय बीत जाने के बाद भी इन भर्तियों की सुध लेना वाला कोई नहीं है.

इन दो दर्जन से ज्यादा भर्तियों के साथ ही करीब एक दर्जन ऐसी भर्तियां हैं जिनको भी पूरा होने का इंतजार है, जिसमें जूनियर इंस्ट्रक्टर भर्ती 2016, एएओ भर्ती 2018, वरिष्ठ अध्यापक भर्ती 2013, एएओ भर्ती 2018, आरपीएससी एलडीसी भर्ती 2013, संस्कृत विभाग रीट लेवल द्वितीय 2017 की भर्तियां शामिल हैं.

इसके साथ ही, ग्राम सेवक छात्रावास अधीक्षक भर्ती 2016, कर सहायक भर्ती 2018, अन्वेक्षक भर्ती 2019, आयुर्वेद नर्सिंग भर्ती 2013, वरिष्ठ अध्यापक भर्ती सामाजिक, हिंदी, विज्ञान, गणित भर्ती 2016 के पद लम्बित चल रहे हैं, जो बेरोजगारी की बड़ा कारण है.

पिछले साल दिसम्बर में कांग्रेस सरकार सत्ता में आई. सत्ता में आने के साथ ही कांग्रेस सरकार ने बेरोजगारों को अटकी हुई भर्तियों को जल्द पूरा करने का वादा तो किया. साथ ही 75 हजार नई भर्तियों की घोषणा की बजट में की. हालांकि सरकार द्वारा 75 हजार पदों पर की गई घोषणा में से 5 हजार पदों पर पुलिस विभाग और 4260 पदों पर पटवारी के पदों पर सरकार की ओर से विज्ञप्ति जारी कर दी गई है.

वहीं, समय पर भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो के चलते राजस्थान के बेरोजगारों में भी खासा आक्रोश है. राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ अध्यक्ष उपेन यादव का कहना है कि 'राजस्थान में सरकार चाहे किसी की भी हो, पिछले 7 सालों से पर्याप्त मात्रा में विभिन्न विभागों में भर्तियां निकाली गई हैं. लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते अधिकतर भर्तियां जहां कोर्ट में अटकी हुई हैं. वहीं, दूसरी ओर दर्जनभर भर्तियां सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही के फेर में अटकी पड़ी हैं. ऐसे में सरकार को समय पर भर्तियां पूरी करने पर जोर देना चाहिए'.

वहीं, लम्बे समय से जयपुर में रहकर परीक्षा की तैयारी में जुटे बेरोजगार भी बेरोजगारी के चलते त्रस्त होते जा रहे हैं. बेरोजगारों का कहना है कि एक भर्ती परीक्षा की तैयारी में कम से कम 40 से 50 हजार रुपये का खर्चा आ जाता है. ऐसे में समय पर भर्ती पूरी नहीं होने के चलते आर्थिक हालात भी अब बिगड़ने लगे हैं. बहरहाल, बेरोजगारी सिर्फ राजस्थान ही नहीं पूरे देश के सामने एक विकराल समस्या बनती जा रही है. सरकारें इस समस्या पर काबू पाने का प्रयास भी कर रही है. समय पर भर्तियां निकल भी रही है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही इन बेरोजगारी पर ज्यादा भारी नजर आ रही है.