जयपुर: सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ दिल्ली कूच के लिए आगे बढ़ा किसानों का काफिला

सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर ट्रॉली में भरा चना और किसान खुले आसमान के नीचे को रहने को मजबूर है.

जयपुर: सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ दिल्ली कूच के लिए आगे बढ़ा किसानों का काफिला
सरकार इन किसानों को सुध नहीं ले रही है.

अमित यादव, जयपुर: पिछले चार दिन से किसानों का पड़ाव दूदू के महला गांव में ठहरा हुआ है. दूदू से दिल्ली के लिए रवाना हुआ किसानों का काफिले को पुलिस ने राजधानी में आने से पहले ही रोक दिया. सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर ट्रॉली में भरा चना और किसान खुले आसमान के नीचे को रहने को मजबूर है लेकिन सरकार इन किसानों को सुध नहीं ले रही है. 

मंगलवार को बाबूलाल नागर ने किसान नेता रामपाल जाट के नेतृत्व में किसानों से मुलाकात की और उनकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया लेकिन लंबी वार्ता के बाद भी वार्ता बेनतीजा रही है. इसी बात पर आज रामपाल जाट ने सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ने को कहा और कहा किसान अब किसी का इंतजार नहीं करेगा. जहां पर चना खरीद की मांग को लेकर लोग दिल्ली कूच के लिए निकल पड़े.

किसान महापंचायत के बैनर तले समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की मांग को लेकर को किसानों ने दूदू से दिल्ली कूच कर दिया है लेकिन पुलिस प्रशासन ने किसानों के दिल्ली कूच को महलां गांव में रोक दिया. सरकार से ब तक तीन दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है. आज किसानों के महापड़ाव का चौथे दिन भी किसानों का महलां में पड़ाव जारी है.

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार अड़ियल रवैया अपना रही है. किसानों को बेवजह परेशान करने के साथ चना खरीद बंद कर दी है. प्रशासन किसान आंदोलन को दबाने की कोशिश करने में लगा है.

चना खरीद को लेकर किसानों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री लोकसभा सदस्यों को पत्र लिखा गया था लेकिन खरीद व्यवस्था शुरू नहीं की गई. इसके बाद किसानों को मजबूर होकर दूदू से दिल्ली कुछ करना पड़ रहा है. साथ ही रामपाल जाट ने बताया कि पूर्व में दूदू एसडीएम राजेंद्र सिंह को ज्ञापन में दिया गया था कि 4 जुलाई को खरीद केंद्र चालू नहीं हुई तो 5 जुलाई को किसान चने से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ ही दूदू से दिल्ली की ओर कूच करेंगे.

नेशनल हाइवे नम्बर आठ पर सैकड़ों की संख्या में फसल से लदे ट्रेक्टर ट्रॉलियों की लंबी लाइन लगी हुई है. इस किसान संगठन का कहना है कि सरकारी खरीद बंद होने से प्रदेश के किसानों को 20 हजार 70 रुपए का नुकसान होगा. किसान महापंचायत के मुताबिक राज्य सरकार ने 6 लाख 15 हजार टन खरीद का लक्ष्य पूरा कर चुकी है लेकिन अभी किसानों के पास 18 लाख टन से ज्यादा चना पड़ा हुआ है.

क्या कहना है किसानों के नेता का
किसान नेता रामपाल जाट ने कहा कि अगर सरकार ने मांग शीघ्र नहीं मानी तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा. इस दौरान दूदू विधायक बाबूलाल नागर भी किसान पड़ाव में शामिल हुए और किसानों की समस्याएं सुनी. साथ ही मुख्यमंत्री को अवगत करवाने का आश्वासन दिया. जाट ने बताया कि किसानों को बाजार में चना बेचने पर करीब 1200 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान होता है.

केंद्र और राज्य सरकार किसानों को अच्छी फसल के दाम देने की कवायद कर रही है और ये कवायद सफल भी हो रही है. किसानों की मांग है कि चना खरीद दोबारा शुरू की जाए ताकि जो 25 फीसदी किसानों अभी बाकी है. उम्मीद की जा सकती है की सूबे की गहलोत सरकार किसानों की पुकार जरूर सुनेगी.