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राजस्थान: कैग रिपोर्ट में खुलासा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के खरीद में खामियां

रिपोर्ट में घाटे में चल रहे पीएसयू के अपनी वित्तीय सेहत सुधारने के बजाय लापरवाही भरे निर्णय लेकर करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे हैं.

राजस्थान: कैग रिपोर्ट में खुलासा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के खरीद में खामियां
राजस्थान विधानसभा में पेश हुई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ. (फाइल फोटो)

जयपुर: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में ढिलाई की पोल खोल कर रख दी है. घाटे में चल रहे पीएसयू अपनी वित्तीय सेहत सुधारने के बजाय लापरवाही भरे निर्णय लेकर करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे हैं. बात ऊर्जा विभाग की कंपनियों की हो या उद्योग विभाग की सभी की खामियां रिपोर्ट में सामने आई है.

ऊर्जा सेक्टर में वित्तीय लापरवाही
राजस्थान विधानसभा में कैग की रिपोर्ट पेश हुई. कैग की राजस्थान ईकाई ने प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की खामियां उजागर की है. कैग की रिपोर्ट में सबसे अधिक गड़बड़ी ऊर्जा विभाग की कंपनियों में मिली.

जयपुर डिस्कॉम में ट्रांसफामर्स खरीद में गड़बड़ी प्रमुख तौर पर उजागर हुई. संबंधित फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए आवश्यकता से अधिक ट्रांसफार्मर्स खरीदे गए. अधिकतर ट्रांसफार्मर्स गोदामों में एक्सपायर अवधि को पार कर गए. मांग के मुकाबले अधिक खरीदे गए ट्रासंफार्मर्स समय पर वितरित ही नहीं हो पाए. 

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रीको की भी रही लापरवाही
राजस्थान उत्पादन निगम ने 200 करोड़ रुपए अनुपयोगी खर्चे किए, इसमें रामगढ़ संयुक्त चक्र वि्रुत संयत्र चरण दो के लिए गैस की उपलब्धता किए बिना मशीनरी खरीदने पर खर्च किया गया. कोयला आपूर्ति समय पर नहीं होने से 52.66 करोड़ की वसूली पर असर पड़ा. ऊर्जा विभाग के 12 मामलों में वित्तीय गैर जिम्मेदाराना रवैया पकड़ में आया.

वहीं, अजमेर डिस्कॉम ने ऑनलाइन रिचॉर्ज की सुविधा नहीं होने के बावजूद 13 करोड़ 62 लाख रुपए के प्रीपेड मीटर खरीदें, वहीं नियमों के इतर 1 करोड़ 54 लाख रुपए के ट्रांसफार्मर्स भी खरीदे. सामग्री नियंत्रण भी भौतिक सत्यापन की कमी पाई गई. रीको जमीन लेकर औद्योगिक ईकाई नहीं लगाने वालों पर नरम रही, जिससे राजस्व नुकसान हुआ.