Covid-19: कोटा मेडिकल कॉलेज प्राचार्य के आदेश हवा, रोटेशन से नहीं हो रहा काम

कोरोना संक्रमण के चलते कोटा मेडिकल कॉलेज में इन दिनों एमबीबीएस कर रहे विद्यार्थियों की छुट्टियां चल रही हैं. 

Covid-19: कोटा मेडिकल कॉलेज प्राचार्य के आदेश हवा, रोटेशन से नहीं हो रहा काम
प्रतीकात्मक तस्वीर.

मुकेश सोनी, कोटा: कोविड-19 ट्रीटमेंट के लिए बने कोटा मेडिकल कॉलेज और नए अस्पताल में प्राचार्य के आदेश हवा हो रहे हैं. दोनों जगहों पर रोटेशन के अनुसार काम नहीं हो रहा है. माइक्रोबायलॉजी विभाग में कार्यरत टेक्नीशियनों से पिछले 22 दिनों से लगातार काम करवाया जा रहा है. 

नियमानुसार कोविड अस्पताल में कार्मिकों से 14 दिन काम करवाने के बाद क्वारंटाइन करना होता है, लेकिन यहां नहीं किया गया. इससे कार्मिकों में भय और तनाव का माहौल है. नए अस्पताल में तीन लैब टेक्निशियन स्थायी और तीन अस्थायी कार्यरत हैं, जो संदिग्ध, पॉजिटिव और ओपीडी में मरीजों के लगातार सैंपल ले रहे हैं. इनकी 14 दिन की ड्यूटी पूरी हो चुकी है. इनका क्वारंटाइन दिया जाना चाहिए, लेकिन नहीं किया जा रहा. 

ब्लड बैंक कर दिया बंद, कार्मिकों को बैठा दिया घर 
कोरोना संक्रमण के चलते नए अस्पताल में पिछले 22 मार्च से ब्लड बैंक भी बंद कर दिया. इससे मरीजों को ब्लड के लिए 12 से 15 किमी दूर एमबीएस अस्पताल आकर चक्कर काटना पड़ रहा है. उधर, कुछ  टेक्नीशियनों को एमबीएस अस्पताल में शिफ्ट कर दिया. कुछ को घर बैठा दिया जबकि इन टेक्नीशियनों को रोटेशन में लगाकर काम करवाया जा सकता है.

कॉलेज के टेक्नीशियनों को भी ले सकते
कोरोना संक्रमण के चलते कोटा मेडिकल कॉलेज में इन दिनों एमबीबीएस कर रहे विद्यार्थियों की छुट्टियां चल रही हैं. यहां फिजियोलॉजी, फार्मालॉजी, पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री की लैब में भी टेक्निशियन कार्यरत है. इनका अभी कोई उपयोग नहीं हो रह है. ऐसे में इनका उपयोग ले सकते हैं.

टेक्नीशियनों नहीं कमी!
विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले में करीब 150 लैब टेक्नीशियन है, जो सीएचसी, पीएचसी, एमबीएस, जेकेलोन, रामपुरा सैटेलाइट अस्पताल में पदस्थापित हैं. अगर इनको रोटेशन पद्धति के तहत कार्य में लिया जाए तो लगातार काम कर रहे कार्मिकों को भय और तनाव से मुक्ति मिलेगी.