जयपुर में राहुल गांधी की रैली तय करेगी देश के राजनीति की दिशा- सचिन पायलट

मीडिया से बात करते हुए सचिन पायलट ने कहा देश में जो हालात बने हैं उसके मद्देनजर राहुल गांधी की रैली देश की राजनीति की दिशा तय करेगी. देश के युवा वर्ग में जो आक्रोश है उसे यह रैली एक नई आवाज देगी.

जयपुर में राहुल गांधी की रैली तय करेगी देश के राजनीति की दिशा- सचिन पायलट
डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सभी नेताओं पदाधिकारियों को भी दिशा निर्देश दिए.

जयपुर: 28 जनवरी को जयपुर में होने वाली राहुल गांधी की रैली की तैयारियों को लेकर आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में बैठक का आयोजन हुआ. बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित प्रदेश के मंत्री विधायक पीसीसी पदाधिकारी मौजूद रहे. बैठक में रैली की तैयारियों रणनीति और उसमें शामिल होने वाले युवाओं की संख्या को लेकर विचार-विमर्श हुआ. 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ ही डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सभी नेताओं पदाधिकारियों को दिशा निर्देश दिए. रैली में युवाओं को लाने की जिम्मेदारी एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस को दी गई है लेकिन इसके अलावा कांग्रेस के नेताओं को उनका सहयोग करने के लिए कहा गया है. 

केंद्र सरकार और आम आदमी के बीच संवाद खत्म
मीडिया से बात करते हुए सचिन पायलट ने कहा देश में जो हालात बने हैं उसके मद्देनजर राहुल गांधी की रैली देश की राजनीति की दिशा तय करेगी. देश के युवा वर्ग में जो आक्रोश है उसे यह रैली एक नई आवाज देगी. देश में सरकार और आम आदमी के बीच संवाद खत्म हो गया है. केंद्र सरकार अपनी तानाशाही नीति के जरिए विरोध के स्वर को कुचलने की कोशिश कर रही है लेकिन कांग्रेस पार्टी देश की जनता के साथ खड़ी है. यही, वजह है कि आम आदमी से जुड़े हुए मुद्दों को लेकर राहुल गांधी जयपुर में रैली करने जा रहे हैं. 

साथ ही सचिन पायलट ने कहा देश के युवाओं को यह पता होना बेहद जरूरी है कि आखिर कैसे आर्थिक मुद्दों से बेरोजगारी से महंगाई से ध्यान हटाकर सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दे देश के सामने रख दिए गए हैं. सचिन पायलट ने कहा कि राहुल गांधी देशभर में इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे. जयपुर से इसकी शुरुआत की जा रही है.

25 जनवरी को आएगा विधानसभा में विरोध प्रस्ताव
सचिन पायलट ने यह भी कहा की 24 तारीख से बजट सत्र का आगाज हो रहा है. 25 जनवरी को सीएए के खिलाफ विधानसभा में विरोध प्रस्ताव लाया जाएगा.सीडब्ल्यूसी ने दिशा निर्देश दिए हैं कि केंद्र शासित सभी राज्यों में विधानसभा में यह प्रस्ताव लाया जाए. सीएए को लेकर देश में कानून बन चुका है लेकिन इसके खिलाफ असहमति का स्वर हो सकता है. लोकतंत्र में इसकी गुंजाइश है. यह होना भी चाहिए कि क्योंकि एक कानून के जरिए देश को बांटने की राजनीति की जा रही है.