प्रवासी श्रमिकों का सम्बल बनेगा संघ, रोजगार दाता और श्रमिकों के बीच बन रहा कड़ी

समाज जीवन को प्रभावित करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कोरोना  के कारण विषम आर्थिक हालात से जूझ रहे लोगों का सम्बल बनने जा रहा है. 

प्रवासी श्रमिकों का सम्बल बनेगा संघ, रोजगार दाता और श्रमिकों के बीच बन रहा कड़ी
फाइल फोटो

विष्णु शर्मा, जयपुर: समाज जीवन को प्रभावित करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कोरोना  के कारण विषम आर्थिक हालात से जूझ रहे लोगों का सम्बल बनने जा रहा है. संघ ने राजस्थान के जिलों में आए प्रवासी श्रमिकों का सर्वेक्षण कर उनसे व्यक्तिगत संवाद करने, उनके आर्थिक, मानसिक, स्वास्थ्य परीक्षण और पारिवारिक समस्याओं के लिए परामर्श शुरू किया है. उनके आजीविका के प्रबंध में सहयोग करने तथा प्रशिक्षण के जरिए सेवा प्रदाता, श्रमिकों और स्वयं का रोजगार की इच्छा रखने वालों के बीच सामंजस्य बिठाया जा रहा है.

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दक्षिणी पूर्वी राजस्थान के संघ चालकों के बीच इस मुद्दे को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हो चुकी है. वीडियो कांफ्रेंस में राजस्थान के संघचालक डॉ. रमेश ने  कहा कि कोरोना काल में विषम परिस्थितियों में रेडजोन में जाकर भी स्वयंसेवकों ने सेवा कार्य किए हैं, जिनकी संघ के विचार से व्रत रखने वालों ने भी प्रशंसा की. उन्होंने वर्चुअल माध्यम से सामाजिक सद्भावना बैठकें कर समाज को एकजुट करने का निर्देश सभी संघचालकों को दिया. साथ ही आने वाली परिस्थितियों को देखते हुए चीन की सीमा पर हो रहे तनाव के लिए समाज को जागृत करने व किसी भी रिस्थितियों के लिए अपनी इकाई के स्वयंसेवकों को तैयार करने की बात भी कही. 

पश्चिमी राजस्थान सीमा क्षेत्र के संघचालक ललित शर्मा ने सभी से सामाजिक एकजुटता बनाए रखने, देश में विभाजनकारी शक्तियों पर पैनी दृष्टि रखने व जागरूक रहने का आह्वान किया. उन्होंने कहा इस समय हमें सामाजिक समरसता को लेकर व्यापक प्रयास करने होंगे. 

भरतपुर से उत्तर पूर्व के संघचालक सरदार महेंद्र सिंह मग्गो ने स्वरोजगार व परामर्श के लिए दो वेबसाइट की जानकारी देते हुए सभी को स्वदेशी का संकल्प दिलाया. चित्तौड़ प्रांत के संघचालक एडवोकेट जगदीश राणा ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग करने व स्वावलम्बन के लिए जागृति लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया.

गौरतलब है कि पिछले दिनों राजस्थान के पश्चिमी उत्तरी पूर्वी  क्षेत्रों में अलग-अलग में संघचालकों की बैठकें हुई, जिनमें खंड संघचालक से लेकर जिला व विभाग संघचालकों ने सहभाग किया. बैठकों में उपर्युक्त विषयों के अतिरिक्त संघ की संगठनात्मक व्यवस्था, वर्चुअल परिवार शाखाओं, स्वयंसेवक सम्पर्क, पर्यावरण गतिविधि व चीनी सामान के बहिष्कार आदि विषयों पर भी चर्चा हुई. तीनों बैठकों में गलवान में बलिदान हुतात्मा सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी गई.

सह प्रांत संघचालक  हरदयाल का कहना है कि संघ में संघचालक परंपरा डॉक्टर हेडगेवार के समय से ही चली आ रही है जिस प्रकार परिवार का मुखिया होता है. इस प्रकार संघ चालक की भूमिका सभी को साथ लेकर सभी की बात सुनना सभी कार्यकर्ताओं को उनका विकास कर आगे बढ़ाते रहना विभिन्न इकाइयों के संघचालक इस कार्य को सुचारू रूप से करते हैं.

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