पुलवामा अटैक 2019: आज भी हरा है शहीद हेमराज के परिजनों का दर्द, मां बोली- नहीं लौटा मेरा लाल

शहीद की वीरांगना मधुबाला आज भी अपने पति को याद कर उस दिन को कोसती नजर आती हैं, जब आतंकवादियों ने इस कायराना घटना को अंजाम दिया. 

पुलवामा अटैक 2019: आज भी हरा है शहीद हेमराज के परिजनों का दर्द, मां बोली- नहीं लौटा मेरा लाल
शहीद हेमराज मीणा की शहादत के बाद राज्य सरकार ने भी शहीद परिवार का भरपूर साथ दिया

हेमंत सुमन, सांगोद: 14 फरवरी 2019 का दिन, सुबह से सब ठीक-ठाक था. दोपहर बाद एक ऐसी खबर आई, जिसे सुनकर पूरा देश स्तब्ध रह गया. जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के वाहनों के काफिले पर हमला कर दिया. चालीस से अधिक जवान इस हमले में शहीद हो गए. 

इनमें से एक थे कोटा जिले के विनोदकलां गांव निवासी शहीद हेमराज मीणा. देश के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले वीर शहीद हेमराज मीणा की शहादत को एक साल बीत गया. शुक्रवार को उनकी शहादत की पहली बरसी है लेकिन परिवार का दर्द आज भी वैसा ही है, जैसे घटना वाले दिन था. आज भी शहीद हेमराज को याद कर परिजनों की आंखें भर आती हैं. 

विनोदकलां निवासी हेमराज मीणा (43 वर्ष) ने करीब 18 साल पहले सीआरपीएफ में नौकरी शुरू की थी और 61वीं बटालियन में सेवा दे रहे थे. घटना के एक दिन पहले ही वो छुट्टियां बिताकर बटालियन में ड्यूटी पर पहुंचे थे. बीस दिन में वापिस आने की कहकर गए शहीद हेमराज मीणा वापस तो चार दिन बाद ही पहुंच गए, लेकिन तिरंगे में लिपटकर. आज पूरा देश उनकी शहादत को याद कर रहा है. परिजनों को भी गर्व है कि सरकार ने आतंकवादियों से उनकी शहादत का बदला लिया और अब भी ऐसे फैसले सरकार ले रही है, जिससे पूरा देश अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा है. 

रोते-रोते सूख गए शहीद की वीरांगना की आंखें
शहीद हेमराज मीणा को याद कर आज भी बुजुर्ग पिता की आंखें भर आती हैं. शहीद की वीरांगना मधुबाला आज भी अपने पति को याद कर उस दिन को कोसती नजर आती हैं, जब आतंकवादियों ने इस कायराना घटना को अंजाम दिया. आज भी वो अपने पति की तस्वीर के सामने घंटों तक बैठे उन्हें याद करती हैं. आंखों के आंसू भले ही सूख गए लेकिन वीरांगना के दिल का दर्द आज भी लोगों की आंखों में आंसू ला देता है. छोटा बेटा ऋषभ आज भी मां की गौद में बैठकर अपने पिता की शहादत को याद करता है. उसे भले ही शहादत का मतलब पता नहीं हो लेकिन आतकंवादियों के प्रति गुस्सा और देश प्रेम की बातें आज भी उसकी जेहन में ताजा हैं.

मां बोली- नहीं लौटा मेरा लाल
अपने वीर सपूत की यादें आज भी बुजुर्ग माता-पिता की आंखों में आंसू ला देती है. मां रतन बाई और पिता हरदयाल मीणा के जेहन में आज भी घटना के दिन की यादें ताजा होती हैं तो आंखें नम हो उठती हैं. रोते हुए मां रतन बाई ने बताया कि घटना के दो दिन पहले ही बीस दिन की छुट्टी बिताकर हेमराज बीस दिन बाद आने की बोलकर ड्यूटी पर गया, वो तो आया नहीं उसकी शहादत की खबर जरूर पहुंची.

शहीद की प्रतिमा को तरस रहा शहीद स्मारक
शहीद हेमराज मीणा की शहादत के बाद राज्य सरकार ने भी शहीद परिवार का भरपूर साथ दिया. कॉलेज का नामकरण शहीद के नाम से करने से लेकर शहीद के परिजनों को मिलने वाली आर्थिक मदद भी सरकार ने परिजनों को मुहैया करवाई. लेकिन परिजनों के मन में कई कसक ऐसी भी है, जो एक साल बाद भी पूरी नहीं हुई. विनोदकलां में शहीद के पेतृक आवास तक एक साल बाद भी सड़क नहीं बनी. वहीं, शहीद स्मारक भी शहीद की प्रतिमा को तरस रहा है. सांगोद में अदालत चौराहे पर सर्किल निर्माण एवं प्रतिमा लगाने का भी परिजनों को भरोसा दिलाया लेकिन वो घोषणा भी अभी तक पूरी नहीं हुई, जिसका परिजनों को मलाल है. 

यह मिला परिजनों को
- राज्य सरकार की ओर से वीरांगना को पचास लाख रुपये नकद.
- राजकीय महाविद्यालय का शहीद के नाम पर नामकरण.
- आउट ऑफ टर्न आधार पर बिजली कनेक्शन.
- रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा के पास.
- सरकारी नौकरी के लिए बड़े पुत्र अजय को प्रस्तावित किया है, लेकिन उम्र भी कम है.
- शहीद स्मारक के लिए सांसद कोष से दस लाख रुपये (कार्य पूर्ण)
- शहीद स्मारक पर सांसद कोष से सौंदर्यीकरण एवं अन्य कार्य (प्रस्ताव तैयार).