नए साल में तैयार होगा स्वच्छता मैप, ODF Plus Panchayat के रूप में विकसित होंगे गांव

राजस्थान में ओडीएफ ग्राम पंचायत ओडीएफ प्लस पंचायत (ODF Plus Panchayat) के रूप में विकसित होगी, जिसमें स्वच्छता गतिविधियों का ध्यान पूरी तरह से गूगल मैपिंग (Google mapping) के जरिए किया जाएगा.

नए साल में तैयार होगा स्वच्छता मैप, ODF Plus Panchayat के रूप में विकसित होंगे गांव
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: राजस्थान में ओडीएफ ग्राम पंचायत ओडीएफ प्लस पंचायत (ODF Plus Panchayat) के रूप में विकसित होगी, जिसमें स्वच्छता गतिविधियों का ध्यान पूरी तरह से गूगल मैपिंग (Google mapping) के जरिए किया जाएगा. राज्य सरकार (State government) ने इस संबंध में पहले ही आदेश जारी कर दिए थे. अब इसके क्रियान्वयन के लिए पंचायती राज विभाग (Panchayati Raj Department) अपने स्तर पर तैयारी में जुट गया है.

प्रत्येक ब्लॉक में 5 गांव को ओडीएफ प्लस का रूप देना होगा-
प्रदेश की ओडीएफ पंचायतों को अब और डेवलप करने की तैयारी चल रही है. नए साल में इन पंचायतों और अधिक स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए पंचायती राज विभाग जियो टैगिंग के जरिए मॉनिटरिंग करेगा, जिले के प्रत्येक ब्लॉक के 5 गांवों को ओडीएफ प्लस के रूप में विकसित करने के ठोस और तरल कचरा प्रबन्घन की प्रभावी क्रियान्विति के लिए 2 जनवरी तक स्वच्छता गतिविधियों का मैप तैयार करना होगा. अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक ग्राम के लिये ग्रामीण सहभागिता नियोजन दल में आवष्यक रूप से सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी, कनिष्ठ तकनीकी सहायक, कनिष्ठ अभियन्ता, ब्लॉक समन्वयक को शामिल कर ग्राम में प्रस्तावित प्रत्येक स्वच्छता गतिविधि को डवलव करें.

ये काम होंगे जिओ मैपिंग के- 
कचरे एवं गंदे पानी के स्त्रोत, निस्तारण, कचरे का ढ़ेर, ठहरा पानी, नाली ढलान एवं स्वच्छता परिसम्पत्तियों (यथा, सोख्ता गड्डा, मैजिक पिट, लीचपीट, नालिया, कम्पोस्ट पिट, सामुदायिक मैजिक पिट, संस्थान पुनः प्राप्ति केन्द्र आरआरसी  का आंकलन और चिन्हिकरण कर जियो टैक (कैमरा स्टाप ऐप से) माध्यम से गुगल प्रो में अंकन किया जायेगा. 

15 दिन में स्वच्छता मैप संबधी सर्वेक्षण कार्य को अन्जाम देंना होगा- 
इस संबंध में जिला परियोजना समन्वयकों को स्पष्ट निर्देष दिये कि वे 15 दिन में स्वच्छता मैप संबधी सर्वेक्षण कार्य को अन्जाम दें और इस कार्य में कोई ढ़िलाई न बरते. किसी प्रकार की परेशानी आये तो मुख्यालय के अधिकारियों से सीधे सम्पर्क करें. वे स्वंय भी किसी एक जिले में आकर ठोस और तरल कचरे की जमीनी हकीकत का जायजा लेगें. विभाग ने जिला परियोजना समन्वयकों को आष्वस्त किया कि इस कार्य में उनके समक्ष आने वाली हर समस्या का निदान किया जायेगा. साथ ही इस कार्य में संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जायेगी.

 

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