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तैमूर की है शर्मिला टैगोर को चिंता, कहा- मीडिया अटेंशन मिलने से हो सकता है प्रभावित

शर्मिला टैगोर ने कहा तैमूर और इनाया के इर्द-गिर्द होने से सच में मुझे खुशी होती है और मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा वक्त उनके साथ गुजार सकूं. 

तैमूर की है शर्मिला टैगोर को चिंता, कहा- मीडिया अटेंशन मिलने से हो सकता है प्रभावित
शर्मिला शनिवार को 74 साल की हो गईं.

नई दिल्ली: अभिनेत्री शर्मिला टैगोर शनिवार को 74 साल की हो गईं. शर्मिला से जब पूछा गया कि जन्मदिन पर वह क्या कर रही हैं तो उन्होंने कहा, 'ज्यादा कुछ नहीं, मुझे डर है कुछ दोस्त आ सकते हैं. सबा और सैफ को अगर मौका मिला तो वे आ सकते हैं देखते हैं क्या होता है'.

फिल्म 'आराधना' की अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से जब पूछा गया कि दो खूबसूरत बच्चों पोता (तैमूर) और नातिन (इनाया) की मौजूदगी से पिछले एक साल में वह क्या चीज है जो आपके लिए बदली है तो उन्होंने कहा, 'हां, इससे निश्चित रूप से मेरी खुशी बढ़ी है, बिल्कुल.. मैं जितना उन्हें मिल सकती हूं मिलती हूं, लेकिन ज्यादा नहीं क्योंकि हम अलग-अलग शहरों में रहते हैं. लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहूंगी कि उन्हें देखकर मुझमें फिर से एक नई ऊर्जा आ जाती है, उत्साहित हो जाती हूं. छोटे बच्चों की चपलता, ऊर्जा से बढ़कर कुछ नहीं है. वे कई चीजों को लेकर उत्सुक और उत्साही होते हैं. तो हां, तैमूर और इनाया के इर्द-गिर्द होने से सच में मुझे खुशी होती है और जैसा कि मैंने कहा कि मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा वक्त उनके साथ गुजार सकूं'. 

अपने करियर के शिखर पर होने के दौरान मां और अभिनेत्री का बेहतरीन संयोजन करने वाली शर्मिला ने बताया कि 'सफर' और 'छोटी बहू' के दौरान वह गर्भवती थीं और गर्भावस्था के अंतिम दिनों में काफी बीमार पड़ गई थीं. फिर 'बेशरम' के दौरान सबा के साथ गर्भवती थीं. शर्मिला ने यह पूछे जाने पर कि क्या वह अभी भी अपने पति व पटौदी के नवाब मंसूर अली खान पटौदी पर बायोपिक को लेकर उत्साहित हैं तो उन्होंने कहा, 'देखिए, यह इस पर निर्भर करेगा कि जहाज का कप्तान कौन है, निर्माता और निर्देशक.'

शर्मिला ने कहा मेरा मनना है कि उनके जीवन में जो उतार-चढ़ाव व रोचक घटनाएं हुई उस हिसाब से यह एक अच्छी कहानी है. पिता का निधन होना, एक आंख खो देना, उसके बाद उनका एवरेज 60 से 30 पर आ गया, इतनी कम उम्र में इतना सब सहना..मुझे नहीं लगता कि कोई और इन सबसे से सहजता से निपट पाता. आंख दुर्घटना के बाद उन्होंने न केवल बल्लेबाजी की बल्कि क्षेत्ररक्षण भी किया. मेरे ख्याल से वह एक असाधारण खिलाड़ी थे. भगवान जानते हैं कि अगर उनके दोनों आंख होते तो फिर वह कितनी उपलब्धि हासिल कर लेते. वह उन्हें काफी याद करती हैं. उन्होंने कहा कि जिंदगी ने उन्हें जो कुछ दिया है उसके लिए वह आभारी हैं'. 

शर्मिला ने यह पूछे जाने पर कि हमारे समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लकेर काफी बातें हो रही हैं, तो उस जमाने में उन्हें किस चीज ने मजबूत, आत्मनिर्भर और निडर बनाया तो उन्होंने कहा, 'शायद मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण हमारे परिवार में हमेशा मजबूत महिलाएं रही हैं और मुझमें आत्मविश्वास भी था. मैं करियर के बारे में ज्यादा सोचती भी नहीं थी. मैंने काम करना पसंद किया और इसका लुत्फ उठाया, लेकिन मुझे अन्य चीजों में भी दिलचस्पी थी. मेरे परिवार से मुझे बेहतरीन समझ मिली थी और शायद इस बात ने मुझे किसी भी नुकसान से दूर रखा'.

शर्मिला से जब पूछा गया कि उनका पोता तैमूर मीडिया में सुपरस्टार बन चुका है तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि इस बात लेकर उन्हें थोड़ी चिंता होती है. फिलहाल तैमूर इन सब चीजों को समझने के लिए बहुत छोटा है, लेकिन बड़े होने पर ज्यादा मीडिया अटेंशन मिलने से वह प्रभावित हो सकता है. लेकिन जैसे कि सारा ने कहा है कि हम इस बारे में क्या कर सकते हैं? आज के दौर में हम मीडिया के बिना रह ही नहीं सकते. 

(इनपुट-आईएएनएस)