नागौर: शहीद के परिवार को इस तरह प्रताड़ित कर रहा सरपंच, कलेक्टर से लगाई गुहार

मात्र 20 साल की उम्र में पाकिस्तान के तीन बंकर उड़ाकर तीन पाकिस्तानी जवानों को मार गिराकर देश के लिए शहीद होने वाले नागौर जिले के जूसरी निवासी जवान हरि भाकर का परिवार आज दर-दर की ठोकर खा रहा है.

नागौर: शहीद के परिवार को इस तरह प्रताड़ित कर रहा सरपंच, कलेक्टर से लगाई गुहार
शहीद हरि भाकर के भाई हरेंद्र भाकर भी सेना में ग्रेनेडियर हैं.

हनुमान तंवर, नागौर: मात्र 20 साल की उम्र में पाकिस्तान के तीन बंकर उड़ाकर तीन पाकिस्तानी जवानों को मार गिराकर देश के लिए शहीद होने वाले नागौर जिले के जूसरी निवासी जवान हरि भाकर का परिवार आज दर-दर की ठोकर खा रहा है. गांव का सरपंच शहीद जवान हरि भाकर के परिवार को इस कदर प्रताड़ित कर रहा है कि वह शहीद का स्मारक बनाने में भी रोड़े अटका रहा है. 

हालात नहीं सुधरते देख शहीद के भाई व पिता ने नागौर पहुंचकर जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव से गुहार लगाई है. शहीद हरि भाकर के भाई हरेंद्र भाकर भी सेना में ग्रेनेडियर हैं और अपने शहीद भाई के स्मारक बनाने को लेकर उत्पन्न हुए हालातों के कारण शहीद का छोटे भाई हरेंद्र जो खुद सैनिक हैं उसे भी पिता के साथ आकर कलेक्टर से गुहार लगानी पड़ी.

23 मार्च 2019 को भारतीय सेना में कार्यरत ग्रनेडियर हरि भाकर पाकिस्तानी सेना से लोहा लेते शहीद हुए थे. नागौर जिले की मकराना तहसील के जूसरी गांव निवासी हरि भाकर ने शहीद होने से पहले पाकिस्तान के तीन बंकर उदा दिये थे और तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था. शहीद भाकर को मरणोपरांत सेना मैडल से नवाजा गया. शहीद भाकर के परिवार ने शहीद की याद में अपनी दो बीघा निजी जमीन पर स्मारक बनाने का काम शुरू किया और जमीन सरकार को देने के लिए मकराना एसडीएम के यहां आवेदन भी किया. इस बीच गांव के सरपंच ने स्मारक के काम में रोड़े अटकाने शुरू कर दिये.

शहीद भाकर के परिवार ने स्मारक बनाने वाली जगह पर निजी खर्चे से ट्यूबवेल खुदवाया, लेकिन इसे लेकर सरपंच ने शिकायत कर दी कि सरकारी ट्यूबवेल का निजी उपयोग कर रहे हैं, जिसकी एसडीएम ने जांच भी की. इस तरह सरपंच ने एक शहीद के परिवार को प्रताड़ित करने का सिलसिला चालू कर दिया. यहीं नहीं कुछ दिन पहले सरपंच के घर से 100 मीटर दूर चौराहे पर शहीद हरि भाकर के नाम के लगाए बोर्ड को भी उखाड़ दिया गया.

शहीद का स्मारक बनाने के लिए नागौर सांसद ने पांच लाख रुपए स्वीकृत किये. पहली किश्त के रुप में ग्राम पंचायत को 3.75 लाख रुपए मिल भी गए, लेकिन स्मारक का काम शुरू नहीं किया गया. हालात को देखते हुए शहीद के परिवार के कार्यकारी एजेंसी बदलवाने के लिए नागौर सांसद को आवेदन करना पड़ा. शहीद के परिवार जनों ने कहा कि सरपंच द्वारा अब यह कहा जा रहा है कि वह परिवार के जो दूसरे सदस्य सरकारी नौकरी करते हैं उनका तबादला करवा देगा. इस तरह लगातार प्रताड़ना से परेशान शहीद के पिता पदमाराम व सेना में ग्रेनेडियर के पद पर कार्यरत शहीद के भाई हरेंद्र भाकर ने आज कलेक्टर से गुहार लगाई है.

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