एक मंच पर दिखे डोटासरा-पूनिया, सियासी फिजाओं में शुरू हुई 2 अध्यक्षों की पूर्व मुलाकात की चर्चा

पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने इस सम्मान समारोह में मंच साझा किया तो यह भी लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया.

एक मंच पर दिखे डोटासरा-पूनिया, सियासी फिजाओं में शुरू हुई 2 अध्यक्षों की पूर्व मुलाकात की चर्चा
एक मंच पर दिखे गोविंद सिंह डोटासरा और सतीश पूनिया.

शशि मोहन/जयपुर: राजनीति में नेताओं मुलाकात बहुत अहमियत रखती है और अगर ऐसी कोई मुलाकात दो परस्पर विरोधी पार्टियों की हो तो मामला कुछ ज्यादा ही खास बन जाता है. ऐसा ही नजारा राजधानी में पिंकसिटी प्रेस क्लब के स्थापना दिवस समारोह में दिखा, जब समारोह के आखिर दिन कांग्रेस और बीजेपी के खास चेहरे प्रेस क्लब पहुंचे. 

पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने इस सम्मान समारोह में मंच साझा किया तो यह भी लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया. अब भले ही इसे राजनीति से परे कहा जाए. लेकिन दो प्रदेशाध्यक्षों को एक साथ देखकर कई लोगों को लंदन में हुई दो प्रदेशाध्यक्षों की मुलाकात के साथ ही कुछ पुराने किस्से भी याद आ गए. 

दरअसल, राजनीति में हर एक्शन का रिएक्शन होता है और कोई भी एक्शन बिना किसी कारण के नहीं होता. कुछ इसी तरह नेताओं की हर मेल-मुलाकात पर भी कई लोगों की नजर रहती है. ऐसी मुलाकातें कई बार सुर्खियां बटोरती हैं. यह मुलाकात दो प्रमुख पार्टियों या कहें परस्पर विरोधी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के प्रदेशाध्यक्षों की हों तो और भी ज्यादा चर्चा का मुद्दा बन जाती हैं.

राजधानी में शुक्रवार को ऐसा ही नजारा पिंकसिटी प्रेस क्लब में दिखा. मौका था प्रेस क्लब के 29वें स्थापना दिवस समारोह का. तीन दिवसीय कार्यक्रम के आखिरी दिन खबरनवीसों के सम्मान समारोह में बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा पहुंचे तो दोनों नेताओं की नजरें मिलीं. भले ही दोनों प्रदेशाध्यक्षों के लिए यह मुलाकात औपचारिक चर्चाओं से ज्यादा कुछ नहीं हो. लेकिन प्रदेश के राजनीतिक जगत के साथ ही खबर नवीसों में भी इस मुलाकात की चर्चा रही. दोनों नेताओं ने काफी देर तक आपस में बातचीत की.

समारोह में चल रहे कथक नृत्य के दौरान भी पूनिया और डोटासरा में बातों की जुगलबंदी ही ज्यादा चलती दिखाई दी. अपने-अपने सम्बोधन में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की तारीफ भी की. पूनिया ने कहा कि ऐसी मुलाकातें होती रहनी चाहिए. उन्होंने कहा कि दो अलग पार्टियों के अध्यक्षों की मुलाकात लोकतंत्र में ही संभव है. पूनिया ने कहा कि यही भारत की खूबसूरती है कि दल कोई भी हो. लेकिन दिल मिले हुए होने चाहिए. 

इधर, पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा ने भी इस मुलाकात को सौहार्दपूर्ण बताया. डोटासरा ने कहा कि मानवता का तकाजा कहता है कि संवाद सबके साथ होना चाहिए. उन्होंने कहा कि विचारधारा अपनी जगह है और जब सिम्बल बंटकर चुनाव होते हैं तो 15 दिन अपनी-अपनी पार्टी की बात नेता बेशक करें. लेकिन जब सरकार बन जाती है तो वह सबको साथ लेकर काम करती है और इसी तरह जनता की बात या समस्याएं सरकार तक पहुंचाना विपक्ष की जिम्मेदारी होती है.

डोटासरा ने कहा कि सबका क्षेत्र समग्र है और उसी नजरिए को रखते हुए राजनेता को सबके साथ अच्छे संबंध रखते हुए जनता के ट्रस्टी के रुप में काम करना चाहिए. डोटासरा और पूनिया इस मुलाकात को बेहद सामान्य तरीके से ले रहे हैं. लेकिन प्रेस क्लब के साथ ही राजनीतिक जगत में इस मुलाकात के साथ पिछले साल लन्दन में हुई मुलाकात का जिक्र भी हो रहा है.

पिछले साल 6-7 दिसम्बर को लन्दन में हुए एक कार्यक्रम में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और पीसीसी के तल्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट भी मिले थ और उस मुलाकात के बाद प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम भी दिखा. हालांकि, यह मुद्दा सिर्फ चर्चाओं तक ही सीमित था. लेकिन पिछले साल की मुलाकात के बाद हुए घटनाक्रम पर पूनिया कहते हैं कि राजनीति में इस तरह की बातें होती रहती हैं और समय के साथ उनका समाधान भी हो जाता है.