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सत्ता का महासमर: जैसलमेर में कुर्सी पर किसे बैठाएंगी ये जातियां?

प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों पर जी मीडिया द्वारा एक-एक कर सतही पड़ताल की जा रही है. इस बार हम आपको जैसलमेर का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे और बताएंगे कि वहां विकास पर सरकार कितनी खरी उतरी है और वहां के लोगों की आने वाली सरकार से क्या उम्मीदे हैं.  

सत्ता का महासमर: जैसलमेर में कुर्सी पर किसे बैठाएंगी ये जातियां?

जैसलमेर: राजस्थान में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है और प्रदेश की दोनों ही बड़ी पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है. प्रदेश में चुनाव जीतने के लिए दोनों पार्टियां जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई हैं. इसी बीच हम आपके सामने राजस्थान के सभी विधानसभा क्षेत्रों का रिपोर्टकार्ड पेश कर रहे हैं. जी मीडिया के स्पेशल प्रोग्राम 'सत्ता का महासमर' के जरिए हम आपको बताएंगे कि आपके क्षेत्र में सरकार, मंत्री और विधायकों ने जनता उम्मीदों को कितना पूरा किया है. 

प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों पर जी मीडिया द्वारा एक-एक कर सतही पड़ताल की जा रही है. इस बार हम आपको जैसलमेर का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे और बताएंगे कि वहां विकास पर सरकार कितनी खरी उतरी है और वहां के लोगों की आने वाली सरकार से क्या उम्मीदे हैं.  

राजस्थान के पश्चिमी छोर बर बसा जैसलमेर भारत पाकिस्तान का सरहदी जिला है. काफी लंबी सीमा पाकिस्तान से लगी होने की वजह से यह बेहद संवेदनशील इलाका भी है. हालांकि जैसलमेर की दुनिया भर में पहचान यहां के रेतीले धोरों की वजह से है. जैसलमेर की पहचान दुनिया के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्र के रुप में भी है. 28 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला यह विधानसभा क्षेत्र प्रदेश और देश की राजनीति में हमेशा प्रभावी पहचान दर्ज कराता रहा है. जैसलमेर की पहचान पर्यटन नगरी के तौर भी होती है. यहां की खूबसूरती को निहारने के लिए दुनियाभर से सैलानी आते हैं. 

हर साल यहां पर आने वाले सैलानियों की संख्या में इजाफा ही हो रहा है. ऐसे में जैसलमेर का विकास न सिर्फ यहां के लोगों के लिए मायने रखता है, बल्कि बाहर से आने वाले सैलानियों के बीच भी जैसलमेर और प्रदेश की छवि का प्रतिनिधित्व करता है. आजादी के बाद लम्बे समय तक जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र विकास से महरूम ही रहा है लेकिन पिछले कुछ सालों में जब देश और प्रदेश में विकास के पहिये ने गति पकड़ी तो जैसलमेर जिले ने भी उस रफ्तार के साथ कदमताल मिलाते हुए विकास की नई इबारतें लिखना आरम्भ कर दिया है.

दुनिया के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्र जैसलमेर में सियासी समीकरनों की बात करें तो जैसलमेर में राजपूत और मुस्लिम जाति के पास ही हमेशा सत्ता की चाबी रही है. इन जातियों ने जिस दल के साथ अपना हाथ मिलाया है जैसलमेर से उसी उम्मीदवार को सफलता मिली है. जैसलमेर में अबतक हुए चौदह विधानसभा चुनाव में 12 राजपूत उम्मीदवार विधायक बने, एक एक बार ब्राहमण और मेघवाल जाति से विधायक बने हैं. राजपूत जाति बाहुल्य इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव में कांग्रेस चार बार, भाजपा चार बार, निर्दलीय चार बार और एक एक बार जनता दल और स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीते हैं.

जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में राजपूत बाहुल्य तीन क्षेत्र खडाल एसोढाण और बसिया हैं. राजपूत जाति की आबादी 29 हजार है. वहीं 37 हज़ार सिन्धी मुस्लिम, 26 हजार अनुसूचित जाती, 13 हजार अनुसूचित जनजाती है. इस बार करीब बीस हजार नए युवा मतदाता जुड़े हैं. मुस्लिम और अनुसूचित जाति ज्यातार कांग्रेस के साथ रहे हैं जबकि राजपूत बीजेपी के साथ जाते रहे हैं. पिछले चुनाव में बीजेपी के छोटूसिंह और कांग्रेस से रूपाराम धणदे के बीच सीधा मुकाबला था जिसमें बीजेपी के छोटूसिंह ने 2800 वोटों से विजय हासिल की थी.

इस बार विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है. जैससलमेर विधानसभा के नतीजे शहरी क्षेत्र के मतदाता ही तय करते हैं.