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सत्ता का महासमर: क्या चुनावों में जैसलमेर की जनता की इन उम्मीदों पर खरी उतर पाएंगी पार्टियां?

प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों पर जी मीडिया द्वारा एक-एक कर सतही पड़ताल की जा रही है. इस बार हम आपको जैसलमेर का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे और बताएंगे कि वहां विकास पर सरकार कितनी खरी उतरी है और वहां के लोगों की आने वाली सरकार से क्या उम्मीदे हैं.  

सत्ता का महासमर: क्या चुनावों में जैसलमेर की जनता की इन उम्मीदों पर खरी उतर पाएंगी पार्टियां?

जैसलमेर: राजस्थान में चुनावी बिगुल बज गया है और सभी बड़ी पार्टियां जोर-शोर के साथ चुनावी तैयारियों में जुट गई हैं. इस बीच हम आपको राजस्थान के सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में आज तक कितना विकास कार्य हुआ है और पिछले वादों को कितना पूरा गया है का रिपोर्टकार्ड पेश करेंगे. जी मीडिया के स्पेशल प्रोग्राम 'सत्ता का महासमर' के जरिए हम आपको बताएंगे कि आपके क्षेत्र में सरकार, मंत्री और विधायकों ने जनता उम्मीदों को कितना पूरा किया है. 

सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के प्रोजेक्ट बीच में अटके हुए हैं
जैसलमेर में पवन उर्जा और सौर उर्जा के क्षेत्र में बेहतर काम से एक नई उम्मीग जगी थी लेकिन बिजली की खरीद को लेकर पॉलिसी क्लियर नहीं होने से नए प्रोजेक्ट लगने बंद हो गए हैं. हलांकि स्थानीय विधायक का दावा है कि बिजली इलाके के कई गांवों और ढाणियों में पहुंचाई गई है 

पवन उर्जा और सौर उर्जा के आगमन के बाद जिलेवासियों को उम्मीद जगी थी कि जैसलमेर जिला अब विकास की नई ईबारत लिखेगा. कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों ने यहां अपने प्रोजेक्ट आरम्भ भी किए और जैसलमेर जिला उर्जा उत्पादन के मामले में देषभर के अग्रणी इलाकों की सूची में शुमार हो गया. इससे लोगों को रोजगार के साथ- साथ इन कंपनियों से जुड़े विभिन्न कार्यों में काम मिलने लगा लेकिन जैसलमेर का यह सुखद सपना कुछ समय बाद ही ही टूट गया क्योंकि राज्य सरकार द्वारा इन कंपनियों द्वारा पैदा की जा रही बिजली की खरीद को लेकर पॉलीसी क्लियर नहीं की गई थी.  पहले तो सही भाव में सरकार बिजली खरीद रही थी लेकिन बाद में सरकार द्वारा बिजली के भावों में कमी कर दी गई और पॉलिसी को लेकर संशय पैदा कर दिया गया जिससे अब यहां नए प्रोजेक्ट लगने बंद हो गए हैं और रोजगार की उम्मीद लिए युवाओं के सपने भी दम तोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. 

ग्रामीण इलाकों में बिजली जैसलमेर के लिए एक बड़ी समस्या थी, जैसलमेर का एक बड़ा इलाका ऐसा था जहां आजादी के बाद से लेकर अबतक बिजली नहीं पहुंच पाई थी लेकिन इस बार सरकार दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत ऐसे गांवों और ढाणियों में बिजली पहुंचाकर जैसलमेर के ग्रामीणों को बड़ी राहत प्रदान की है. हालांकि, केन्द्र सरकार की इस योजना में राज्य सरकार ने पूरी भागीदारी निभाई है. 

स्थानीय विधायक ने भी इस योजना के तहत विद्युत विभाग के साथ तालमेल बिठाकर ऐसे गांवों और ढाणियों को चिन्हित कर बिजली पहुंचाई है जहां लोग आज भी दिन अस्त होने के बाद लालटेन की रोशनी में अपना जीवन यापन कर रहे थे.

अब भी गर्मियों में लोगों को होती है पानी की समस्या
जैसलमेर के बारे में कहा जाता था कि 'घी मांगो तो मिलेगा...लेकिन पानी मांगो तो नहीं मिलेगा' जाहिर है यहां के लोगों के लिए पानी अनमोल हुआ करता था लेकिन अब हालात बदल गए हैं. इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने जैसलमेर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी. जहां पहले खेतों की सिंचाई और मवेशियों के पानी के लिए बारिश के मौसम का इंतजार होता था. अब नहर आने से पीने के पानी से लेकर सिंचाई के पानी तक का मुकम्मल इंतजाम हो गया है. अब जैसलमेर का किसान सालभर खेती करता है और रेतीली धरती से सोना उगाता है. पानी मिलने से पैदावार बढ़ा तो किसानों की चौखट पर खुशियों की बारिश होने लगी और जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर में न सिर्फ सुधार हुआ बल्कि उनके रहन सहन में भी काफी बदलाव आया है.

हालांकि जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र के कुछ गांव आज भी सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं. वजह ये है कि ये गांव नहर के अंतिम छोर पर बसे हैं. जहां तक पानी पहुंच नहीं पाता. पानी की कमी की वजह से नहर के अंतिम छोर के गांवों के किसानों को बुआई के सीजन में आंदोलन करना पड़ता है. स्थानीय विधायक दावा करते हैं कि नहर के पानी के वितरण को लेकर हमेशा सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाते हैं. उनका कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में काफी संख्या में ग्रामीण इलाकों में नलकूपों की खुदाई कराई है. जिससे पीने के पानी की समस्या दूर हो गई है.

सारे दावों के बीच सच्चाई ये है कि गर्मी के मौसम में पीने के पानी के लिए हाहाकार मच जाता है. जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र के लोग त्राहि त्राहि करते हैं.

कई जगह हुआ सड़कों का निर्माण लेकिन अब भी है दिक्कतें
किसी जमाने में उंट और बैलगाडियों से परिवहन करने वाले जैसलमेर के लोग अब हवाई सफर कर रहे हैं, पशुपालन और परम्परागत खेती करने वाला किसान अब नई तकनीक का इस्तेमाल कर साल भर फसलें उगा रहा है. अकाल और पानी की कमी से जूझते इस इलाके में इंदिरा गांधी नहर ने शहर के विकास को एक नई दिशा दे दी लेकिन यहां की सड़कों की बात की जाए तो इसको लेकर काम तो हुआ है लेकिन इन सब के बाद भी एक बड़ा भूभाग ऐसा है जहां सडकों की दरकार है.

जैसलमेर विधानसभा इलाके का लंबा चौड़ा भूभाग है और यहां पर क्षेत्रफल के अनुपात में आबादी का निवास छितरा हुआ है. ऐसे में एक स्थान से दूसरे स्थान की दूरी अधिक है और लोग छोटी छोटी ढाणियों और गांवों में निवास करते हैं. आबादी का घनत्व कम होने के चलते यहां सडकों के निर्माण को लेकर भी सरकारों ने गंभीरता नहीं दिखाई थी इसलिए रेतीले कच्चे मार्गों पर लोग अपने उंटों पर सफर करने को मजबूर हुआ करते थे. हलांकि अब कई गावों और ढाणियों को प्राथमिकता के साथ सडकों से जोड़ा गया है. विधायक दावा करते हैं कि नई सड़कों की स्वीकृति के साथ साथ मिसिंग लिंक सड़कों के निमार्ण पर भी सरकार द्वारा करोडों रूपये खर्च कर यहां की जनता को राहत प्रदान की गई है. 

शिक्षा के लिए नहीं हैं पर्याप्त अवसर
शिक्षा के क्षेत्र में जैसलमेर जिला आज भी पिछड़ा हुआ ही कहा जा सकता है. युवाओं के पास उच्च शिक्षा के लिए कुछ खास विकल्प नहीं है. विधायक का दावा है कि स्कूलों को क्रमोन्नत किया गया है, महिलाओं के लिए पॉलीटैक्निक कॉलेज भी खुलवाया गए हैं लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि बेहतर शिक्षा का सपना अभी कोसों दूर है.

स्कूली शिक्षा को छोड़ दें तो यहां के युवाओं के पास पर उच्च शिक्षा के लिए कुछ खास विकल्प नहीं है जिसकी वजह से यहां के युवाओं को  बेहतर शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर रूख करना पड़ रहा है. जैसलमेर जिले में उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिए आज भी बेहतर विकल्प नहीं है जिससे यहां का गरीब युवा पढ़ाई छोड़ने को मजबूर है. बेहतर शिक्षा और उससे सृजित होने वाले बेहतर रोजगार के अवसर आज भी जैसलमेर के लिए दूर की कौड़ी ही बने हुए हैं. समृद्ध और सक्षम लोग बड़े शहरों में जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं लेकिन यहां का गरीब आज भी उच्च शिक्षा का सपना लिए सरकार की ओर ही ताक रहा है.

जिले में स्कूली शिक्षा को लेकर भी हालात कुछ ज्यादा अच्छे नहीं है. सरकार ने ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक, उच्चप्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल तो खोल दिए गए हैं लेकिन ज्यादातर स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते यहां के छात्रों को बेहतर शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. विधायक दावा करते हैं कि स्कूलों को क्रमोन्नत किया गया है, हर पंचायत मुख्यालय पर उच्च माध्यमिक स्कूल खोला गया है. उनका कहना है कि जैसलमेर में किसी जमाने में केवल एक पीजी कॉलेज हुआ करता था लेकिन अब महिलाओं के लिए अलग महाविद्यालय तकनीकी शिक्षा के लिए पॉलीटैक्निक कॉलेज भी खुलवाया गए हैं लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि बेहतर शिक्षा का सपना अभी कोसों दूर है.

क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की भी है कमी
जैसलमेर जिले की स्वास्थ्य सेवा बदहाल हालत में है. अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनें तो उपलब्ध करवा दी गई हैं लेकिन डॉक्टरों की कमी की वजह से लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. जैसलमेर जिले की चिकित्सा व्यवस्थाएं प्रदेश के दूसरे जिले से थोड़ी बेहतर है. सरकार ने यहां पर चिकित्सालय के भवन और अत्याधुनिक मशीनें तो उपलब्ध करवा दी हैं लेकिन मरीजों का इलाज करने और इन मशीनों का संचालन करने वाले डॉक्टरों की कमी के चलते लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है.

वर्तमान विधायक छोटूसिंह भाटी ने दावा किया था कि अगर वो चुनाव जीतते हैं तो सत्ता में आने के बाद जैसलमेर जिले की चिकित्सा व्यवस्था को पटरी पर ले आएंगे लेकिन सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी यहां पर चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है. ऐसे में जिला मुख्यालय का चिकित्सालय ही अपनी दुर्दषा पर आंसू बहा रहा है.

विधायक छोटूसिंह भाटी का कहना है कि विधानसभा से लेकर मंत्री तक वो लगातार जिले की चिकित्सा व्यवस्थाओं के लिए मांग करते रहे हैं लेकिन खुद चिकित्सक बड़े शहरों को छोड़ जैसलमेर जैसी छोटी जगह पर आना नहीं चाह रहे हैं इसलिए यहां पर समस्या लगातार बनी हुई है. 
हालांकि, राज्य सरकार ने भामाशाह कार्ड एक तोहफे के रुप में दिया जैसलमेर को दिया है. जिससे गरीब एवं मध्यम वर्गों को अपने इलाज के लिए लाखों रुपए की सहायता मिल जाती है. वह अपना इलाज बड़े से बड़े अस्पताल में निशुल्क करवा सकते हैं. 

जैसलमेर की वर्तमान सियासत की बात करें तो आगामी चुनाव में जनता वादों और दावों की कसौटी पर सरकार को परखने के लिए तैयार है. 

जैसलमेर की राजनीति में गाजी फकीर एक बहुत बडा नाम माना जाता है. जिले में कांग्रेस पार्टी में जो भी निर्णय होते हैं वो बिना फकीर की सहमति के नहीं होते हैं. मुस्लिम जाति के धर्मगुरू होने के कारण मुस्लिम वोटरों पर इनका खासा प्रभाव है. प्रदेश कांग्रेस बिना फकीर की सहमति के जैसलमेर के उम्मीदवार की टिकट फाईनल नहीं करती है लेकिन यह बात भी उतनी ही सत्य है कि पिछले चौदह चुनावों में गाजी फकीर का एकमात्र उम्मीदवार मुल्तानाराम बारूपाल ही चुनाव जीत पाया है लेकिन फकीर परिवार ने जिस उम्मीदवार का हाथ थामा है उसे पार ही लगाया है. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रूपाराम के साथ फकीर परिवार की अनबन का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा. वहीं इस बार रूपाराम फिर से जैसलमेर कांग्रेस से उम्मीदवारी के लिए ताल ठोक रहे हैं. जैसलमेर विधानसभा से कांग्रस की ओर से रूपाराम धणदे, उम्मेदसिंह तंवर, सुनीता भाटी, जनकसिंह भाटी अपनी अपनी उम्मीदवारी जता रहे हैं.

बीजेपी की बात करें तो वर्तमान विधायक छोटूसिंह भाटी जैसलमेर से दूसरी बार चुनाव जीत कर विधानसभा में पहुंचे है. इससे पहले राज्य में बीजेपी की सरकार नहीं होने से वो विकास के सवालों को विपक्ष में होने की वजह से टाल गए लेकिन इस बार जैसलमेर की जनता उनके वादों और दावों का हिसाब लेगा.

सरकार द्वारा अब तक किए गए काम और विकास के बाद भी जैसलमेर को हर क्षेत्र में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. जिसके बाद अब जैसलमेर की किस्मत का फैसला यहां की जनता के ही हाथ में है और उन्ही पर निर्भर करता है कि वो इस चुनाव में कौन से नेता और कौन सी पार्टी को जैसलमेर की कमान सौंपना चाहती है.