Rajasthan News: राजस्थान के बाघों की अठेखेलियों को लेकर विश्व पटल पर अपनी खास पहचान रखने वाला प्रदेश का सबसे बड़ा रणथंभौर टाईगर रिजर्व इन दिनों बढ़ते बाघ-मानव संघर्ष को लेकर लगातार सुर्खियों में है.
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Rajasthan News: राजस्थान के बाघों की अठेखेलियों को लेकर विश्व पटल पर अपनी खास पहचान रखने वाला प्रदेश का सबसे बड़ा रणथंभौर टाईगर रिजर्व इन दिनों बढ़ते बाघ-मानव संघर्ष को लेकर लगातार सुर्खियों में है. महज 54 दिनों में रणथंभौर में बाघ के हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद रणथंभौर में गुस्साएं ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन भी देखने को मिला.
कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा को हस्तक्षेप करना पड़ा. रणथंभौर में लगातार बढ़ते बाघ मानव संघर्ष की घटनाओं ने ना सिर्फ आम लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया, बल्कि वन विभाग के अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर भी कई सवालिया निशान खड़े कर दिया.
ऐसे में रणथंभौर को लेकर हो रही किरकिरी के बाद वन विभाग हरकत में आया और ठोस कदम उठाते हुए एनटीसीए से आदेश मिलने के बाद बाघ शिफ्टिंग की कार्रवाई को अंजाम देना शुरू कर दिया, ताकि रणथंभौर में बढ़ते बाघ मानव संघर्ष पर विराम लगाया जा सके.
इसी कड़ी में वन विभाग द्वारा रणथंभौर से एक बाघ को कैलादेवी अभ्यारण में शिफ्ट कर एनक्लोजर में कैद कर दिया. प्रदेश का सबसे बड़ा रणथंभौर टाईगर रिजर्व बाघों की अठेखेलियों को लेकर विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है, जिसकी वजह से यहां हर साल लाखों देशी-विदेशी सैलानी रणथंभौर भ्रमण पर आते हैं.
जंगल सफारी कर टाईगर की अठेखेलियों का लुफ़्त उठाते हैं, लेकिन इन दिनों रणथंभौर बाघ मानव संघर्ष को लेकर सुर्खियों में है. रणथंभौर टाईगर रिजर्व में महज 54 दिन में टाईगर हमले में तीन लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है. इन 54 दिनों में रणथंभौर में पहला हमला बाघिन T-84 एरोहेड की मादा शावक कनकटी ने किया.
कनकटी ने 16 अप्रैल 2025 को त्रिनेत्र गणेश दर्शन कर अपनी दादी के साथ लौट रहे एक सात वर्षिय बालक कार्तिक सुमन को मौत के घाट उतार दिया. उसके बाद इसी मादा शावक कनकटी ने 11 मई को वन विभाग के रेंजर देवेंद्र चौधरी पर हमला किया और उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया.
लगातर हुई इन दोनों घटनाओं से रणथंभौर के अधिकारियों के होश उड़ गए और अधिकारियों ने उच्च स्तर पर बात कर हमलावर मादा शावक कनकटी को ट्रंकुलाइज कर रणथंभौर के भीड़ क्षेत्र में बने एनक्लोजर में कैद कर दिया. कनकटी को कैद करने के बाद वन अधिकारियों राहत की सांस ली ही थी कि रणथंभौर में एक बार फिर टाईगर अटैक हो गया.
इस बार हमला रणथम्भौर दुर्ग में हुआ, जहां कनकटी के भाई नर शावक ने जैन मंदिर के सेवादार राधेश्याम माली को मौत के घाट उतार दिया. घटना के बाद लोगों के सब्र का बांध भी टूट गया और आस-पास के सैंकड़ों ग्रामीण रणथंभौर में बढ़ते बाघ मानव संघर्ष और वन अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करते हुए रणथंभौर के मुख्य प्रवेश द्वार गणेश धाम पर सड़क जाम कर धरने पर बैठ गए.
ग्रामीणों का धरना करीब 33 घंटे तक चला और वन विभाग की लाख कोशिशों के बाद भी ग्रामीण नहीं माने. आखिरकार सवाई माधोपुर विधायक एवं सूबे के कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा को मौके पर आना पड़ा और उनके हस्तक्षेप के बाद ही ग्रामीणों का धरना समाप्त हो पाया.
इस दौरान डॉक्टर किरोडी लाल मीणा ने भी वन अधिकारियों की कार्यशैली पर कई तरह के सवाल खड़े किए और केंद्रीय वन मंत्री व मुख्यमंत्री से चर्चा करने की बात कही तब जाकर मामला शांत हुआ. रणथंभौर में बढ़ती बाघ मानव संघर्ष की घटनाओं और लोगों के आक्रोश को देखते वन अधिकारी हरकत में आए और उच्च अधिकारियों से चर्चा कर एनटीसीए से बाघों की शिफ्टिंग को लेकर आदेश जारी करवाए गए.
एनटीसीए से आदेश मिलने के बाद रणथंभौर वन प्रशासन हरकत में आया और तुरंत प्रभाव से बाघिन टी 84 नर शावक को ट्रंकुलाइज कर रणथंभौर के सैकंड डिवीजन कैलादेवी अभ्यारण में बने एनक्लोजर में शिफ्ट कर दिया गया. वन विभाग ने नर शावक की शिफ्टिंग की कार्रवाई को बेहद गोपनीय रखा. यह वही नर शावक है जिसने जैन मंदिर के सेवादार राधेश्याम माली को मौत के घाट उतारा था.
रणथंभौर में 54 दिनों में हुई टाईगर अटैक की घटना के बाद एनटीसीए द्वारा एक आदेश जारी कर बाघिन टी 84 के तीनों शावकों को अन्यत्र शिफ्ट करने की अनुमति दी गई है. आदेश के मुताबिक बाघिन टी 84 के मेल शावक को धौलपुर-करौली अभ्यारण, मादा शावक कनकटी को मुकुंदरा टाईगर हिल्स व दूसरी मादा शावक को रामगढ़ विषधारी अभ्यारण में शिफ्ट किया जाना है.
एनटीसीए के आदेश के मुताबिक वन विभाग ने टी 84 के नर शावक को कैलादेवी अभयारण्य में बने एनक्लोजर में शिफ्ट कर कर कर दिया. वहीं रणथंभौर के भीड़ क्षेत्र में बने एनक्लोजर में कैद दो लोगों की हत्या की आरोपी मादा शावक कनकटी को भी जल्द ही रणथंभौर से मुकुंदरा टाईगर हिल्स शिफ्ट किया जाएगा.
वहीं कनकटी की बहिन मादा शावक को भी जल्द ही रामगढ़ विषधारी टाईगर रिजर्व में शिफ्ट किया जाएगा. टाईगर शिफ्टिंग को लेकर वन अधिकारी तैयारियों में जुटे हुए हैं. रणथंभौर में बढ़ते बाघ मानव संघर्ष की घटनाओं को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि रणथंभौर में वर्तमान में करीब 82 बाघ बाघिन और शावक हैं, जिनमें 32 शावक शामिल है.
इन शावकों में अधिकतर शावक सब एडल्ट है और जल्द ही अपनी माँ से अलग होकर अपनी खुद की टेरेटरी की तलाश में है. उनका कहना है कि बाघिन टी 84 एरोहेड के तीनों सब एडल्ट शावको को प्राकृतिक रूप से अभी अच्छे से शिकार करना नही आता है और ये शारीरिक रूप से भी अन्य बाघों की अपेक्षा कमजोर है, जिसके चलते ये शावक इंसानों पर हमला कर रहे है, जिसकी वजह से इन्हें शिफ्ट करना आवश्यक था.
वन्यजीव विशेषज्ञ यादवेन्द्र सिंह का कहना है कि रणथंभौर में बाघों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसके चलते यहां बाघों के लिए इलाका भी कम पड़ रहा है. ऐसे में युवा होते बाघ शावकों को रणथंभौर से शिफ्ट करना आवश्यक हो गया था और इनकी शिफ्टिंग वन विभाग की एक अच्छी पहल कही जा सकती है, लेकिन इनकी शिफ्टिंग के बाद भी रणथंभौर खतरा अभी टला नहीं है.
क्यों कि यहां अभी भी बाघिन रिद्धि व सुल्ताना के शावक उसकी इलाके में विचरण कर रहे हैं, जहां विगत दिनों टाईगर हमले में तीन लोगों की मौत हुई है. रणथंभौर में लगातार बढ़ते बाघ मानव संघर्ष की घटाओं ने इन दिनों रणथंभौर को सुर्खियों में लाकर खड़ा कर दिया. जिसकी वजह से जहाँ वन विभाग पर कई तरह के सवाल खड़े हुए.
वहीं रणथंभौर के वनाधिकारियों की कार्यशैली ने सरकार की भी खूब किरकिरी करवाई, जिसके बारे में सरकार के कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा भी खेद जता चुके. बड़ी बात यह है कि रणथंभौर में विगत 54 दिनों में टाईगर अटैक में तीन लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद वन विभाग हरकत में आया, जबकि पहली घटना के बाद ही रणथंभौर की पांच सदस्यीय कमेटी ने बाघिन एरोहेड टी 84 के तीनों शावकों को अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग की थी.
इसके बाद भी उच्च स्तर पर बैठे अधिकारियों एवं एनटीसीए द्वारा कमेटी की रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया. अगर समय रहते ही एनटीसीए द्वारा शिफ्टिंग के आदेश जारी कर दिए जाते तो संभवतया कम से कम दो जनों को तो बचाया जा सकता है. खैर अब एनटीसीए द्वारा टाईगर शिफ्टिंग को लेकर आदेश दे दिए गए.
रणथंभोर वन प्रशासन द्वारा आदेश की अनुपालन में टी 84 के नर शावक को कैलादेवी अभ्यारण के एनक्लोजर में शिफ्ट कर दिया. शेष दोनों शावकों को भी जल्द ही रामगढ़ व मुकुंदरा शिफ्ट कर दिया जाएगा, लेकिन इन टाईगर की शिफ्टिंग के बाद भी वन अधिकारियों को बेहद चौकन्ना रहना होगा और बाघों की मॉनिटरिंग पर ध्यान रखना होगा. क्यों कि रणथंभौर में अभी भी कई टाईगर शावक हैं, जो टेरेटरी की तलाश में घूम रहे हैं.
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Reporter- Arvind Singh