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Sawai Madhopur News: राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में खंडार उपखंड क्षेत्र में बहने वाली बनास नदी ने इस बार ऐसा रौद्र रूप दिखाया है जिसे देखकर दशकों पुराने भयावह मंजर ताजा हो गए है. बनास पुल बनने के बाद पहली बार पूरी तरह डूब गया, जिससे प्रशासन ने आवागमन बंद कर दिया है. हालांकि जलस्तर घटने से अब राहत की उम्मीद बंधी है.
44 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब 25 फीट ऊंचा बनास पुल पानी में डूब गया. नदी का जलस्तर खतरे के निशान 198 मीटर को पार कर 198.790 मीटर तक पहुंच गया. इससे आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बना रहा. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा भयंकर दृश्य उन्होंने 1981 में देखा था, जब मोरेल बांध टूटने पर बनास नदी ने तबाही मचाई थी और कई गांव बह गए थे.
बुजुर्गों के जहन में उस वक्त का खौफनाक मंजर आज भी ताजा है. इस बार भी नदी का तेज बहाव लोगों में डर पैदा कर रहा है. बनास ब्रिज पर स्टेट हाईवे निर्माण के दौरान बनाई गई सीमेंट कंक्रीट की परत बहाव में उखड़ गई, हालांकि पुलिया पूरी तरह सुरक्षित बताई जा रही है.
प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए ब्रिज के दोनों ओर बेरिकेड्स लगाकर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी थी. बनास नदी में जलस्तर कम होने के साथ ही पुलिया पर पैदल आवागमन शुरू हुआ है. लेकिन प्रशासन ने बीसलपुर बांध से पानी छोड़े जाने पर हालात फिर बिगड़ने की आशंका जताई है.
वहीं, खंडार एसडीएम ज्योत्सना खेड़ा, तहसीलदार पुष्कर सिंह, खंडार थानाधिकारी लक्ष्मण सिंह और बहरावंडा कलां थानाधिकारी सुमेर सिंह लगातार मौके पर मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं. बनास नदी के इस उफान ने एक बार फिर लोगों को चेताया है कि प्रकृति के आगे सब बेबस हैं. राहत की उम्मीद है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है.
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