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Sawai Madhopur News : विगत दिनों जिले में हुई भारी बारिश के चलते जहाँ जिले के करीब एक दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे और बाढ़ ग्रस्त गांवो में हालात बेहद विकट हो गए थे ,वही जिले के जड़ावता गांव में पानी आने से गांव से सटे खेतों में गहरी गहरी खाइयां पड़ गई. लगातार पानी की आवक होने से गांव के खेत 50 से 80 फिट तक कि गहरी खाई में तब्दील हो गए और मिट्टी का कटाव होने एंव मिट्टी धसने से खेत के मेर पर बना एक मकान दो दुकान ओर एक मन्दिर पूरी तरह खाई में समा गए और जमीदोंज हो गए.
लगातार पानी की आवक होने से खाई बढ़ती गई और गांव के अन्य मकान भी खाई की जद में आने लगे ,ऐसे में कुदरत के इस कदर में अपनी आंखों के सामने अपने मकानों को जमीदोंज होता देख ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू किया और पानी के बहाव को दूसरी तरफ मोड़ने का प्रयास किया.
लेकिन बावजूद इसके खेतों पर बनी खाइयां बढ़ती ही गई ,सूचना पर आपदा प्रबंधन मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा मौके पर पहुंचे. मंत्री के आने पर प्रशासन भी हरकत में आया और आनन फानन में आलाधिकारी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीम के साथ मौके पर पहुंचा , इस दौरान मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने खुद मौके पर मौजूद रहकर पानी को डायवर्ट कराने का प्रयास किया ,मंत्री डॉक्टर किरोडी लाल मीणा खुद एलएनटी मशीन पर चढ़ गए और पानी के बहाव को मोड़ने का प्रयास किया जो कुछ हद तक कारगार भी साबित हुआ.
अब भेलेही दो दिनों से बारिश का दौर थम गये हो ,लेकिन जड़ावता गांव में अब भी हालत बेकाबू ही नजर आ रहे है. बारिश थमने से खेतों में बनी खाइयों में पानी की आवक तो कम हो गई ,लेकिन खाइयों में मिट्टी धसने का सिलसिला अब भी जारी है ,खाई में ग्रामीणों का एक मकान दो दुकान कर एक मन्दिर पहले ही समा चुका वही अब भी खाई के नजदीक बने करीब चार मकान गिरने की कगार पर है ,जिन्हें बचाने के लिए आज भी ग्रामीण पूरी ताकत के साथ लगे हुए हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन समय पर चेता होता तो ग्रामीणों के आशियाने नहीं उजड़े होते और ना ही उन्हें खेत खाइयों में तब्दील होते और ना उनके अमरूदों के बगीचे उजड़ते ,ग्रामीणों का आरोप है कि बार बार सूचना देने के बावजूद प्रशासन गांव में नही पहुंचा ,वो तो मंत्री किरोड़ी का भला हो जो वे मौके पर आ गए और खुद एलएनटी मशीन पर चढ़कर पानी के बहाव को मोड़ने का प्रयास किया ,जिससे कुछ हद तक राहत मिली है.
ग्रामीणों का कहना है कि अभी भी खाई में मिट्टी धस रही है और गांव के दो चार मकान गिरने की कगार पर है ,अगर मिट्टी का धसना नहीं रुका तो कभी भी ये मकान जमीदोंज हो सकते है. मौके पर आज भी प्रशासन का कोई नुमाइंदा मौजूद नहीं है और ग्रामीण खुद ही अपने स्तर पर अपने मकानों को गिरने से बचाने के प्रयास में जुटे हुए हैं.
जिले में हुई भारी बारिश से सर्वाधिक नुकसान जड़ावता गांव के ग्रामीणों को उठाना पड़ा है ,गांव के खेतों में बनी खाइयां लगातार बढ़ रही है और अभी भी गांव के दो चार मकानों के गिरने का खतरा बना हुआ है. ग्रामीण ही अपने स्तर पर अपने मकानों को बचाने की कोशिश में जुटे हैं.
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