राजस्थान: फिर फेल हुए पेयजल स्कीम में कंक्रीट के सैंपल, कब होगी दोषियों पर कार्रवाई?

2 करोड़ की लागत से तैयार हो रही इस टंकी का निर्माण एक्सईएन पवन अग्रवाल की देखरेख में हो रहा था. अब दोषी इंजीनियर्स और ठेकेदार पर कार्रवाई की जिम्मेदारी टेक्निकल कमेटी की है.

राजस्थान: फिर फेल हुए पेयजल स्कीम में कंक्रीट के सैंपल, कब होगी दोषियों पर कार्रवाई?
अब सैंपल के पास-फेल के बीच पेयजल स्कीम का काम पूरी तरह से रूका पड़ा है.

जयपुर: ढेहर के बालाजी पेयजल प्रोजेक्ट में घटिया क्वालिटी का इस्तेमाल कर ठेकेदारों और इंजीनियर्स ने जमकर लूट मचाई. सरकारी लैब के बाद अब दूसरी लैब में भी कंक्रीट के सैंपल फेल हो गए. इस रिपोर्ट के बाद ये साफ जाहिर होता है कि ठेकेदार घासीराम गोयल कॉन्ट्रैक्टर कंपनी को मुनाफा पहुंचाने के लिए इंजीनियर ने मिलीभगत की. 

2 करोड़ की लागत से तैयार हो रही इस टंकी का निर्माण एक्सईएन पवन अग्रवाल की देखरेख में हो रहा था. अब दोषी इंजीनियर्स और ठेकेदार पर कार्रवाई की जिम्मेदारी टेक्निकल कमेटी की है. इस पेयजल स्कीम के जरिये 20 कॉलोनियों की करीब 80 हजार आबादी को पेयजल सप्लाई होनी है लेकिन भष्ट्राचार के कारण अब दर्जनों कॉलोनी को पानी के लिए और इंतजार करना पड़ेगा. 

सरकारी लैब नेशनल टेस्ट हाउस में फेल हो गई थी क्वालिटी
इससे पहले टंकी के निर्माण क्वालिटी की जांच सरकारी लैब नेशनल टेस्ट हाउस में फेल हो गई थी लेकिन उसके बावजूद भी टंकी का निर्माण कार्य चल रहा था जबकि नियम ये कहते हैं कि टेस्ट में फेल हो चुके सैंपल के बाद निर्माण को तोड़कर दोबारा बनाया जाना चाहिए. एक्सईएन पवन गोयल, तत्कालीन एईएन महेंद्र वर्मा और जेईएन सांवरमल ढाका की देखरेख में टंकी का निर्माण करवाया जा रहा था. अतिरिक्त मुख्य अभियंता देवराज सौलंकी का कहना है कि शिकायते मिलने पर जांच की गई थी. अब दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी.

बीसलपुर का पानी नहीं मिल पाएगा
टंकी की क्वालिटी खराब होने से अब अगली गर्मियों में भी लोगों को प्रेशर से बीसलपुर का पानी नहीं मिल पाएगा हालांकि कोर कटिंग टेस्ट में ये सैंपल पास हो गए हैं लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि तीन में से दो लैब में कंक्रीट के सैंपल फेल हो गए. घासीराम गोयल कॉन्ट्रैक्टर कंपनी को मार्च 2018 में टंकी के निर्माण का टैंडर दिया गया था, जो टंकी के निर्माण में रेडीमेड कंक्रीट डलवा रहा था. ओवरहैड टंकी बनाने वाली जगह को लेकर कोर्ट में विवाद चल रहा था. इसलिए ठेकेदार कंपनी ने पेमेंट उठाने के लिए पहले पाइपलाइन का काम करवा दिया. ठेकेदार ने ओवरहैड टंकी का काम शुरू करवा दिया, लेकिन विभाग के इंजीनियरों की मिलीभगत से कंक्रीट मौके के बजाए दूसरी कंपनी से रेडीमिक्स कंक्रीट मंगवाया.
कंक्रीट मैटेरियल की क्यूब टेस्टिंग की रिपोर्ट आने से पहले ही टंकी के पिलर, कर्व दीवार और डोम का निर्माण करवा दिया था. अब सैंपल के पास-फेल के बीच पेयजल स्कीम का काम पूरी तरह से रूका पड़ा है.